[स्मिता श्रीवास्तव]। फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ कई मायनों में खास है। मां बनने के बाद करीना कपूर की यह पहली फिल्म है। वहीं शादी के बाद सोनम कपूर की रिलीज होने वाली पहली फिल्म भी है। फिल्म में दोनों पहली बार स्क्रीन शेयर कर रही हैं। फिल्म और जिंदगी के विभिन्न पहलुओं पर सोनम और करीना ने साझा की दिल की बातें...

इस साल के लिए आपकी विश लिस्ट क्या थी?
मैं हमेशा से ‘वीरे दी वेडिंग’ करने की इच्छुक थी। आखिरकार वह साकार हुई। फिल्म की भाषा प्रोग्रेसिव और मॉर्डन है। इन्हीं वजहों से प्रोमो को शानदार रेस्पांस मिला है।

फिल्म को महिला सशक्तिकरण और फेमिनिज्म का मिश्रित रूप कहना कितना उचित होगा?
यह प्यार, दोस्ती और शादी के इर्दगिर्द है। चार सहेलियों की कहानी है। चारों शादी की अलगअलग स्टेज पर हैं। उनकी जिंदगी के मुद्दों को उठाया गया है। चार लड़कियों पर फिल्म होने का अर्थ फेमिनिज्म की बात करना नहीं है। मैं इसे फेमिनिज्म आधारित फिल्म नहीं कहूंगी। महिलाओं को केंद्र में रखकर बनी यह मनोरंजक फिल्म है। हम यहां कोई आवाज नहीं उठा रहे कि महिलाओं को कैसा होना चाहिए। बस यह समय ऐसी फिल्मों के लिए उपयुक्त है। दर्शक इस मिजाज की फिल्में देखने को तैयार हैं।

सोशल इश्यू बेस्ड फिल्मों को कितना अहम मानती हैं?
सामाजिक विषय पर पहले भी फिल्में बनती आई हैं। उन्हें बनाते समय कुछ चीजों का खास ध्यान रखना होता है। हम एक्टर हैं राजनेता नहीं। अगर फिल्म में कोई संदेश होता है तो अच्छी बात है। वरना हमारा मकसद मनोरंजन करना है। आमिर खान की फिल्में संदेश प्रधान होने के साथ एंटरटेनिंग होती हैं। ‘दंगल’ में कड़ा संदेशनिहित था।

फिल्म के लिए आपने वजन तेजी से घटाया...
मेरे लिए वजन कम करना कोई चुनौती नहीं थी। मैं हमेशा से अपनी फिटनेट को लेकर सजग रही हूं। योग और डाइटीशियन की सलाह से डाइट मैं वर्षों से फॉलो कर रही हूं। मेरे लिए फिट रहना जिंदगी जीने का हिस्सा है।

शादी को लेकर आपका क्या नजरिया रहा?
शादी के बाद मेरी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया। शादी से पहले मैं काम कर रही थी। शादी के बाद भी वह जारी रहा। मेरा मानना है कि पति और परिवार का सपोर्ट बहुत जरूरी है। मुझे खुशी होगी अगर मैं लोगों को प्रेरित कर पाऊं कि वे समझे कि महिलाएं मल्टीटास्कर हो सकती हैं। रही बात नजरिए की तो शादी प्यार के लिए होती है। दोनों को एकदूसरे का सम्मान करना चाहिए। ज्यादातर महिलाएं शादी से पहले अपना पक्ष रखने से डरती हैं। जरूरी मुद्दों पर बात नहीं करतीं। मेरा मानना है कि आप शादी से पहले अपनी बात रखें। मैंने शादी से पहले अपनी बात रखी थी। प्यार और सम्मान सभी बाधाओं को तोड़ देगा।

महिला फिल्ममेकर्स को लेकर आपकी राय?
हमारे यहां जोया अख्तर, रीमा कागती जैसी सफल फिल्मकार हैं। रीमा के साथ मैंने ‘तलाश’ में काम किया था। उसमें आमिर खान थे। जोया की फिल्म में रणवीर सिंह हैं। महिला निर्देशकों को बड़ी स्टार कास्ट मिल रही है। मेरे ख्याल से आपके पास अच्छी स्क्रिप्ट होनी चाहिए। आप महिला हैं या पुरुष उससे फर्क नहीं पड़ता।

क्या आप मदरहुड को लेकर किताब लिखने की तैयारी में हैं?
नहीं। यह खबर निराधार है।

तैमूर अभी से स्टार बन गया है...
तैमूर जहां जाते हैं पैपराजी उनका पीछा करते हैं। मैं उस पर रोक नहीं लगा सकती। लोगों को समझना चाहिए कि वह अभी महज 17 महीने का है। लोगों को उसे खिलौने की तरह नहीं ट्रीट करना चाहिए। उसे आम बच्चों की तरह जीवन मिलना चाहिए। मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि उसे सामान्य जीवन दे सकूं।

हमारे यहां शादी आधारित फिल्में सफल रहती हैं जैसे ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’। उसकी वजहें क्या मानती हैं? 
बिना शादी की पृष्ठभूमि वाली फिल्में भी सफल रही हैं। शादी दिलचस्प विषय है। फिल्मों में उसे रोचक तरीके से उठाया जाता है। उपरोक्त फिल्मों का बजट बड़ा था। म्यूजिक भी बेहतरीन था। हमारे देश में शादी का मतलब जिंदगी और प्यार का जश्न मनाने जैसा होता है। हम उसके इर्दगिर्द कई कहानियां बुन सकते हैं।

17 की उम्र में आपने काम करना आरंभ किया। उस उम्र की मौज-मस्ती को कितना मिस किया?
नहीं। काम ही मेरा पैशन रहा है। मुझे फिल्मों में काम करना पसंद है। यही मेरा सपना था। मेरे लिए यही नार्मल लाइफ रही।  

Posted By: Sanjay Pokhriyal