मुंबई। गुपचुप रहने वाले शाहिद कपूर अचानक दिखने लगे हैं। आत्मनिर्वासन से वापस आकर वह सबसे बातें भी कर रहे हैं। फिल्मों के प्रचार में मुख्य कलाकारों की भागीदारी महत्वपूर्ण हो गई है। उसी का निर्वाह करते हुए शाहिद कपूर भी 'फटा पोस्टर निकला हीरो' और अपने बारे में बातें करने के लिए हाजिर हैं..

शादी की तरह है फिल्म रिलीज

शाहिद कपूर स्वीकार करते हैं कि इन दिनों अभिनेताओं के ऊपर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। अब सिर्फ अभिनय में कुशल होना ही काफी नहीं है। हालांकि किसी भी अभिनेता का मूल गुण अभिनय ही है। प्राथमिकता भी वही रहती है लेकिन समय बदलने के साथ कई नई चीजें जुड़ गई हैं। फिल्मों का प्रचार उनमें से एक है। पहले ऐसा दबाव नहीं था। ऊपर से सोलो फिल्म हो तो अकेले पर सारा दबाव आ जाता है। जैसे घर में शादी होती है तो सभी को फोन करते हैं। उन्हें निमंत्रण पत्र भेजते हैं। अपनी खुशी में सभी को शामिल करना चाहते हैं। फिल्म रिलीज भी खुशी का टाइम है। जरूरी है कि हम सभी को इसके बारे में बताएं और निमंत्रित करें।

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न्यूमरोलॉजी में बदला नाम

इस फिल्म के पोस्टर में 'निकला' शब्द को रोमन में 'निखला' लिख दिया गया है। एक अतिरिक्त एच लगा हुआ है। इस संबंध में पूछने पर शाहिद स्पष्ट शब्दों में कहते हैं, ''यह स्पेलिंग देखकर मैं भी चौंका था। मैंने पता किया तो बताया गया कि न्यूमरोलॉजी की वजह से 'निखला' लिखा गया है। बहरहाल फटा पोस्टर निकला हीरो मसाला कॉमेडी इंटरटेनर है। राजकुमार संतोषी की कॉमेडी से सभी परिचित हैं। मैं खुद उनका फैन हूं। इस फिल्म को बनाते समय हमलोग

खूब हंसे हैं। खूब एंजॉय किया है। संतोषी जी ने जब स्क्रिप्ट सुनाई थी तो हंस-हंस कर हम बेहाल हो गए थे। उम्मीद है दर्शकों का भी फिल्म देखकर यही हाल होगा।''

पढ़ें:झूम उठे फैन जब 'फटा पोस्टर निकला हीरो'दर्शकों को खुश करने की जिम्मेदारी

'फटा पोस्टर निकला हीरो' विश्वास राव नामक लड़के की कहानी है। वह फिल्मों में काम करना चाहता है लेकिन उसकी मां चाहती है कि वह पुलिस में भर्ती हो। फिल्म में कुछ ऐसा होता है कि लोग उसे पुलिस इंस्पेक्टर समझने लगते हैं। जबकि वास्तव में वह नकली पुलिस इंस्पेक्टर है। शाहिद कहते हैं, ''लोगों को खुश करने के लिए वह पोस्टर फाड़ कर एंट्री मारता है। फिर भी उसे डर है कि कोई उसे मारे नहीं। चेहरे पर चोट लगने से हीरो बनने की संभावना कम हो जाएगी। वह बातचीत से ही हर मामले को सुलटाना चाहता है। वह मजेदार इंस्पेक्टर है। विश्वास राव दबंग या सिंघम के हीरो की तरह लार्जर दैन लाइफ नहीं है।''

मजा आए थियेटर में

फिल्म के लिए हां कहने के पीछे का तर्क रखते हुए शाहिद कपूर बताते हैं, ''फिल्म की स्क्रिप्ट सुनते समय मैं बहुत हंसा था। मुझे लगा कि अगर इतना ही मजा थिएटर में आए तो मैं खुश होऊंगा। मैं खुद को आम दर्शक ही मानता हूं। फिल्म देखते समय मैं भी एंजॉय करना चाहता हूं। थिएटर में सीटी ताली बजाना

चाहता हूं। हर एक्टर की यह ख्वाहिश होती है कि वह हिंदी फिल्मों के हीरो की तरह पर्दे पर एंट्री मारे। फिल्म दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए ही बनाई गई है।''

शुरू हुआ राउंड-2

अपनी अनुपस्थिति और लोकप्रियता में आई कमी के बारे में शाहिद कपूर को भ्रम नहीं है। वह इनके कारण भी जानते हैं। वह खुद ही कहते हैं, ''मेरी पिछली दो फिल्में नहीं चलीं। वे दोनों फिल्में तीन सालों के दरम्यान में आई। असफलता और अंतराल से ऐसी धारणा बनीं कि मैं अनुपस्थित हो गया हूं। इस साल मेरी दो फिल्में आएंगी। इसके बाद 'रैंबो राजकुमार' आएगी। एक अच्छी बात रही कि फिल्में चले न चले, लोगों ने मेरा काम पसंद किया। उन्होंने कभी नहीं कहा कि मेरा काम खराब था। ऐसा लगता है कि मुझे फिल्में चुनते समय थोड़ा सावधान रहना चाहिए। इस फिल्म के साथ मेरा राउंड 2 शुरू हो रहा है।''

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साबित करने को तैयार हूं

शाहिद की राय में लोगों की धारणाओं की इज्जत करनी चाहिए। अगर वे मानते हैं कि मेरी वापसी हो रही है, तो हो रही है। मैं भी इसे राउंड-2 कहने में क्यों हिचकूं। फिल्म देखने के बाद पता चलेगा कि मेरी वापसी है या नहीं? किसी भी फाइट में दस-बारह राउंड होते हैं। आखिरी फैसला उसके बाद आता है। मेरा तो अभी दूसरा राउंड है। पहले राउंड भी बुरा नहीं रहा। उसमें मेरी अनेक उपलब्धियां हैं। हां, कई बार गिरा भी हूं। इसी दौरान मैच्योर हुआ। खुद को समझा। इंडस्ट्री से सीखा। कुछ जिंदगी ने सिखाया। दस साल पहले मेरी इतनी ही ख्वाहिश थी कि पोस्टर पर मेरा चेहरा कब आएगा? दस सालों में 20 फिल्में कर चुका हूं। वैसे हर शुक्रवार को सभी स्टार्स को साबित करना पड़ता है। 20 सितंबर को मैं भी साबित करने के लिए तैयार हूं।

अगली फिल्म के बारे में शाहिद इतना ही कहते हैं कि उन्होंने विशाल भारद्वाज की फिल्म के लिए हां कहा है। यह फिल्म शेक्सपीयर के नाटक 'हैमलेट' पर आधारित होगी।

(अजय ब्रहा्रात्मज)

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