मुंबई। अभिनेत्री अदिति राव हैदरी को 'दिल्ली 6' और 'मर्डर 3' ने भरपूर चर्चा दी। उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में आए एक अरसा भी हो गया है, लेकिन उनके दिल में ख्वाहिश अभी बाकी थी। वे मेगाबजट फिल्म करना चाहती थीं। अक्षय कुमार की 'बॉस' ने उनकी ख्वाहिश पूरी की है। बातचीत अदिति से।

'बॉस' के ट्रेलर को उम्दा रिसपॉन्स मिला है। खासकर आपके बोल्ड अवतार को। क्या कहेंगी?

बड़ी खुशी महसूस हो रही है। कई दूसरी अभिनेत्रियों ने भी मेरे बिकनी अवतार की सराहना की। फिल्म का मिजाज और स्केल विशुद्ध मसाला और लैविश है। मेरे किरदार का काम उस फिल्म में बस रोमांस करना है। लिहाजा उसका बिकनी अवतार में होना लाजिमी है।

उस बिकनी गर्ल का गुड नेम क्या है?

उसका नाम अंकिता है। वह फिल्म में अक्षय के छोटे भाई बने शिव पंडित का प्यार है। शिव के किरदार का नाम भी शिव ही है। अंकिता के उनकी जिंदगी में आने के बाद नए समीकरण बनते हैं। शिव को कब्जे में लेकर विलेन अक्षय कुमार को पराजित करना चाहता है, पर अपने परिवार को अपनी आन-बान और शान समझने वाला अक्षय का किरदार अपने दुश्मन से लोहा लेता है। लब्बोलुआब यह है कि मारधाड़ से भरपूर होने के साथ-साथ परिवार की महत्ता पर भी जोर दिया गया है। उसे बखूबी पर्दे पर दिखाया गया है।

यह फिल्म मिलने की कहानी साझा कर सकेंगी?

हां, क्यों नहीं। मैं 'मर्डर 3' के समय एक फिल्म पत्रिका के लिए फोटो शूट कर रही थी। उस दौरान इस फिल्म के निर्माता अश्विन वर्दे की नजर मुझ पर पड़ी। उन्हें 'मर्डर 3' में मेरा काम भी बेहद पसंद आया था। उन्होंने उसी वक्त मुझे इस फिल्म का ऑफर दे दिया। फिल्म के स्केल और स्टारकास्ट को देख उसे ना कहने की तो बात ही नहीं थी।

क्या यह अदिति के करियर की टर्निग प्वॉइंट कहलाने वाली फिल्म है?

मैं हर फिल्म को अपना अगला कदम मानती हूं। मैं चाहती थी कि ज्यादा से ज्यादा लोगों में मैं जानी जाऊं। 'बॉस' जैसी फिल्म में मास अपील होती है। वह अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचती है। 'मर्डर 3', 'लंदन पेरिस न्यूयॉर्क' का अगला कदम थी। ठीक वैसे ही 'बॉस', 'मर्डर 3' का अगला स्टेप है।

फिल्म की शूटिंग कहां-कहां हुई है?

उसका अधिकतर हिस्सा दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव में शूट हुआ है। इंडिया गेट पर शूटिंग के दौरान वहां तकरीबन दो हजार लोग जमा हो गए थे। उनका कलाकारों के प्रति प्यार और सम्मान देखकर बहुत गर्व की अनुभूति हुई। मुझे नहीं लगता कि बाकी किसी और पेशे में आपको चाहने वाले लोगों की तादाद सैकड़ों में भी होती होगी। हमारे पेशे में तो है।

आप खुद भी दिल्ली की हैं। मुंबई में सालों से रह रही हैं। दोनों में महिलाओं के लिए कौन सा शहर अधिक सेफ है?

हमारी कंट्री में आप कहीं सेफ नहीं हैं। यहां जिस किस्म की परवरिश होती है, उसमें बलात्कार जैसी घटनाएं होनी कोई बड़ी बात नहीं। लड़कों की बीमार मानसिकता के पीछे वजह है कि वे लड़कियों की दुनिया से पूरी तरह कटे हुए हैं। मेरे ख्याल से बलात्कार जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम देने वाले किसी भी उम्र के शख्स को बख्शना नहीं चाहिए। ऐसा नहीं हो रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

उनकी मानसिकता को बीमार करने में फिल्मों को जिम्मेदार मानती हैं?

अगर फिल्म देखकर कोई व्यक्ति गलत काम करने के लिए प्रेरित होता है तो इसका साफ मतलब है कि वह अभी अपरिपक्व है। जो लोग फंतासी को हकीकत मान बैठेंगे, वे क्या करेंगे आगे? मैं यह भी नहीं कहती कि कुछ फिल्में प्रोवोकेटिव नहीं होती हैं, पर उसकी आड़ में आप हर फिल्म को उसी श्रेणी में नहीं घसीट सकते। जो इंसान खुद पर काबू न रख सके, वह काहे का मर्द? उन्हें बचपन से ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए कि महिलाओं को सम्मान की नजर से देखें। अफसोस है कि ऐसा नहीं होता। आज भी हम सड़ी शिक्षा व्यवस्था को फॉलो करने के लिए मजबूर हैं।

हम वापस 'बॉस' पर आते हैं। अपने कैरेक्टर अंकिता के जरिए आप अपनी इमेज चेंज कर रही हैं?

मैं अंकिता को अपना मेकओवर नहीं मानती। लोग मुझे देख कर कहते भी हैं कि मेरे चेहरे पर काफी मासूमियत है। यह नेचुरल है। मैं उसे कभी नहीं बदलना चाहूंगी। बोल्ड और बिंदास बाला का रोल मैं अपने तरीके से करूंगी। यह जरूरी भी है। हर किसी की फिगर बिपाशा सरीखी तो नहीं हो सकती। अब उसका मतलब यह तो नहीं है कि वह बिकनी में बोल्ड नहीं लगेगी।

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