प्रियंका सिंह, मुंबई ब्यूरो। हिंदी सिनेमा के साथ ही डिजिटल प्लेटफार्म और पंजाबी फिल्मों में भी काम कर रहे हैं अभिनेता जिमी शेरगिल। सोनी लिव की वेब सीरीज ‘योर आनर 2’ में जज की भूमिका में नजर आए जिमी से प्रियंका सिंह की बातचीत के अंश...

आपने कहा था कि आपर्को हिंदी फिल्मों में ज्यादा लीड रोल न मिलने का पछतावा नहीं है। क्या ऐसा इसलिए क्योंकि आप पंजाबी फिल्मों और डिजिटल प्लेटफार्म पर लगातार लीड रोल कर रहे हैं?

मुझे जब कोई किरदार या फिल्म का मुद्दा दिलचस्प लगता है तो मैं कर लेता हूं। मैंने करियर की शुरुआत ‘माचिस’ से की थी। वह मल्टीस्टारर फिल्म थी। ‘मोहब्बतें’ में भी कई कलाकार थे। उसके बाद से मैंने लीड और दो हीरो वाली फिल्में की। काफी वक्त तक मैंने इसी तरह के काम किए। फिर अचानक से ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ में मुझे मौका मिला, जिसमें मेरा किरदार काफी दिलचस्प था। तब कोई कैरेक्टर रोल नहीं करता था। उसके बाद यारी-दोस्ती में कुछ फिल्में की, लेकिन अब वो सब हो गया है। वक्त के साथ चलना जरूरी है, नहीं तो लोगों को लगेगा यह तो बस छोटे किरदार करता है। मेरे साथ ऐसा कई बार हो चुका है।

इस शो में आप ऐसे पिता के किरदार में हैं, जो अपने बेटे को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाता है। वास्तविक जीवन में किस तरह के पिता हैं?

पिता और बेटे के बीच एक अलग तरह का बांड होता है, वह बांड हम में है। हमारी कई पसंद-नापसंद एक जैसी हैं। बच्चे जब बड़े हो रहे होते हैं तो उनकी भी एक पर्सनल लाइफ होती है। सारा दिन उनका स्कूल में चला जाता है और बचा हुआ वक्त दोस्तों के साथ। हम भी उस उम्र से गुजरे हैं। ऐसे में उन्हें उनका स्पेस देना मेरा काम है।

आप दिसंबर में 51 साल के हो जाएंगे। बढ़ती उम्र एक एक्टर के लिए क्या दिक्कतें लाती है?

बढ़ती उम्र के साथ जो दिक्कतें आती हैं, वे तो होती ही हैं। उन दिक्कतों के आने के बाद ही हम चीजों को गंभीरता से लेने लगते हैं। साल 2011 में मुझे सेहत संबंधी दिक्कतें हुई, तब मैंने सेहत पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। एक्टर होने के नाते कई बार हमें अपने किरदार के मुताबिक अपना वजन घटाना-बढ़ाना पड़ता है। एक पंजाबी फिल्म के लिए मैंने अपना वजन 97 किलोग्राम कर लिया था। उसे कम करने में बहुत मेहनत लगी थी। मैंने अपने निर्देशक से कहा था कि अब जो दूसरी फिल्म बना रहे हो, वह यंग लड़के की कहानी बनाना, ताकि मैं अपना वजन कम करके यंग लगने की कोशिश करूं।

साल 2015 से सोच लिया था कि कुछ भी हो, सेहत को बिल्कुल इग्नोर नहीं करूंगा। बहुत मेहनत करनी पड़ती है खुद को फिट करने के लिए, लेकिन कुछ वक्त के बाद उस मेहनत में मजा आने लगता है। फिटनेस का रिजल्ट एक दिन या छह महीने में नहीं मिलता है। उसके बाद जब आप अपनी पुरानी फोटो देखते हैं तो लगता है कि पहले मेहनत क्यों नहीं की! अब मैं अपने पैटर्न को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता हूं। 

Edited By: Ruchi Vajpayee