नई दिल्ली, जेएनएन। तमिल सिनेमा के ‘थलाइवा’ माने जाने वाले अभिनेता राजनीकांत को हाल ही में दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार से सम्मानित किया गया है। अवॉर्ड जीते ने बाद राजनीकांत ने कहा ‘मैं ये अवॉर्ड अपने दोस्त, बस ड्राइवर और मेरे सहकर्मी राज बहादुर को डेडीकेट करना चाहता हूं। राज बहादुर ही वो शख्स थे जिन्होंने मेरे अंदर एक्टिंग का टैलेंट को पहचाना और मुझे सिनेमा में आने के लिए प्रोतसाहित किया’। आपको बताते चलें कि राज बहादुर ही वो शख्स हैं जिन्होंने शिवाजी राव गायकवाड़ को तमिल सिखाई और एक्टिंग की दुनिया में भेजा।

रजनीकांत का हर फैन जानता है कि एक्टर और राज बहादुर की दोस्ती करीब 50 साल पुरानी है। ये याराना उस उस ज़माने का जब एक्टर बस कंडक्टर हुआ करते थे। हाल ही इस बार में राज बहादुर ने न्यूज़ 18 से बात की और अपनी दोस्ती के बारे में बताया। राज बहादुर ने कहा, ‘हमारी दोस्ती 50 साल पुरानी है। मैं उनसे 1970 में मिला था जब उन्होंने बतौर काम करना शुरू किया था और मैं तब ड्राइवर था। वो हमारे ट्रांस्पोर्ट स्टाफ ग्रुप का सबसे अच्छा एक्टर था। जब भी हमारे यहां कल्चर प्रोग्राम होता था रजनी स्टेज पर परफॉर्म करता था, ड्यूटा के बाद वो कई प्लेज़ में भी काम करता था। वो बेस्ट परफॉर्म था’।

‘मैंने उसे चेन्नई जाने की ज़िद की और एक्टिंग स्कूल ज्वाइन करने के लिए कहा। उसके एक्टिंग कोर्स के दो साल पूरे हो जाने के बाद इंस्टीट्यूट ने एक प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ किया जहां रजनीकांत को परफॉर्म करना था। के बालाचंद्रण वहां चीफ गेस्ट थे, वो रजनी के पास आए और उन्होंने उससे तमिल सीखने के लिए कहा। रजनी ने जब मुझे ये बताया तो मैंने उससे कहा ‘तुम्हें फिक्र करने को कोई ज़रूरत नहीं है। मैंने उससे कहा कि अब से तुम मुझसे सिर्फ तमिल में बात करोगे और उसके बाद जो कुछ भी हुआ वो आप सब जानते हैं वो इतिहास है’।

रजनीकांत कई मौकों पर ये बता चुके हैं कि उस ज़माने में राज बहादुर 400 रुपए महीना कमाते थे, और हर महीने 200 रुपए एक्टर को चेन्नई भेजते थे जब वो एक्टिंग स्कूल में थे। रजीनाकांत ने करीब 2-3 साल राज बहादुर की आधी सैलरी पर गुज़ारा किया था। अब राज बहादुर अपने काम से रिटायर हो चुके हैं और अपने भाई के परिवार के साथ सादा जिंदगी बिताते हैं।

 

Edited By: Nazneen Ahmed