मुंबई। वो अस्सी का दौर था। न सितारों के नखरे कम थे और न ही उनके बीच की राइवलरी। और उसी दौरान दक्षिण भारत से आई दो बेहतरीन अभिनेत्रियों के बीच चल रहे कोल्ड- वार ने सबको हिला कर रखा था। नाम था जयाप्रदा और श्रीदेवी।

ख़ूबसूरती से लेकर एक्टिंग तक, किसी भी मामले में किसी से पीछे नहीं। पर दोनों की पेशेवर लेवल कर कभी एक दूसरे से निभी नहीं। निर्माता दोनों के पीछे भागते और जैसे तैसे मना पाते और इसी कारण श्रीदेवी और जयाप्रदा ने एक साथ नौ फिल्मों में काम किया था। मवाली , मकसद , तोहफ़ा और आख़िरी रास्ता से लेकर मै तेरा दुश्मन तक। इसमें कुछ फिल्में सुपरहिट रही और कुछ कम चलीं लेकिन दोनों का रूतबा और जलवा कभी कम नहीं हुआ। उस दौर में दोनों के बीच कोल्ड-वार इतनी बढ़ गई थी कि हर बात के लिए तगड़ा मुकाबला होता। फिल्मों में काम करते वक्त दोनों प्रोफेशनल होतीं लेकिन बाकी समय एक दूसरे को देखना भी गंवारा नहीं। बताते हैं कि उस दौर में एक किस्सा हुआ। दोनों 1984 में एक फिल्म मकसद में काम कर रही थीं। श्रीदेवी और जयाप्रदा के साथ इस फिल्म में राजेश खन्ना और जीतेन्द्र जैसे बड़े स्टार्स थे। सबको दोनों के बीच की कोल्ड-वार मालूम थी।

बताते हैं कि शूटिंग के दौरान ही राजेश खन्ना ने दोनों को फिर से दोस्त बनाने के लिए एक प्रयास किया। जब दोनों एक मेकअप रूम में अपना टच-अप करवा रही थीं तो राजेश खन्ना ने बाकी लोगों को कमरे के बाहर बुला कर श्रीदेवी और जयाप्रदा को मेकअप रूम में बंद कर दिया। कहते हैं जब दो घंटे बाद दरवाजा खुला तो दोनों कमरे के अलग अलग कोनों में ख़ामोशी के साथ बैठी थीं। न एक दूसरे से कोई बात न सुलह। राजेश खन्ना भी समझ गए थे कि उनकी कोशिश नाकाम हो चुकी है और अब इस मामले में पड़ने का कोई फ़ायदा नहीं। बताते हैं कि उस दौरान श्रीदेवी और जयाप्रदा को लीड रोल में लेने के लिए होड़ लगी रहती थी और कई बार हीरोइन के तौर पर उनके नाम उछलते थे। फिल्म नगीना के लिए भी पहले जयाप्रदा का नाम आया था। लेकिन फिल्मों में सक्रियता ख़त्म होने के बाद दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी और कई सार्वजानिक कार्यक्रमों में श्रीदेवी और जयाप्रदा को काफ़ी घुले-मिले देखा जाता था।

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Posted By: Manoj Khadilkar

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