दीपेश पांडेय, मुंबई। हिंदी सिनेमा में बीते ढाई दशक से ज्यादा वक्त से सक्रिय अभिनेता कृष्ण कुमार मेनन उर्फ के के मेनन वेब सीरीज ‘स्पेशल ऑप्स 1.5’ में एक बार फिर हिम्मत सिंह के किरदार में नजर आएंगे। पिछले साल रिलीज हुई वेब सीरीज ‘स्पेशल आप्स’ की प्रीक्वल यह सीरीज 12 नवंबर से डिज्नी प्लस हाटस्टार पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध होगी। के के से इस शो और हिंदी सिनेमा में उनके सफर पर बातचीत के अंश:

क्या पहले सीजन के दौरान ही यह तय हो गया था कि 1.5 सीजन बनाकर उसमें युवा हिम्मत सिंह की कहानी दिखाई जाएगी?

जहां तक मुझे मालूम है कि यह पहले से तय नहीं था और ऐसा भी नहीं है कि शो की सफलता के बाद यह निर्णय लिया गया। नीरज जी का क्रिएटिव माइंड लगातार चलता रहता है। मुझे लगता है कि पहले सीजन के बनने और सफल होने के बीच में कहीं उनके दिमाग में आया होगा कि सीजन 1.5 बनाकर हिम्मत सिंह की कहानी दिखाई जा सकती है।

इस सीजन में युवा दिखने और ज्यादा एक्शन करने के लिए क्या तैयारियां रहीं?

जैसा मैं हूं, शो में मुझे बिल्कुल वैसा ही किरदार निभाना था। मैं जैसा दिखता हूं, वैसा ही दिखाया गया है, हां पहले सीजन में उसको अधेड़ दिखाने में हमें काफी मेहनत लगी। इस बार किरदार में युवा जोश को लाना था। ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो आप जवानी में अलग और आक्रामक तरीके से करते हैं, लेकिन जोश के साथ-साथ मुझे किरदार में उसकी बुद्धिमत्ता को बरकरार रखना था।

इस शो में काम करने के बाद खुफिया विभाग के गुमनाम नायकों के बारे में आपके क्या विचार रहे?

मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि लोगों तक हमारे खुफिया विभाग के जासूसों, उनकी कार्यशैली, मेहनत और बलिदान के बारे में जानकारी देने वाले इस शो का हिस्सा बन सका। यह एक थैंकलेस जाब होता है, क्योंकि इसमें अगर आपने छह हजार बार देश को खतरों से बचाया है तो उसके बारे में किसी को जानकारी नहीं होती है, लेकिन अगर एक बार नहीं बचा सके या कुछ गड़बड़ हो जाती है तो वह बड़ा मुद्दा बन जाता है। ये एजेंट न किसी के सामने आते हैं, न ही उन्हें कोई जानता है। वे देश के साइलेंट हीरो होते हैं जो पर्दे के पीछे से काम करते रहते हैं।

हिंदी सिनेमा में करीब ढाई दशक के करियर के बाद क्या कुछ खास किरदारों की चाहत अभी भी बची है?

जी नहीं, मैं ऐसे स्वप्न नहीं देखता कि फलां तरह के किरदार निभाऊं जो भी किरदार मेरे सामने आता है मैं बस उसे जीवन देने की कोशिश करता हूं। सामान्यत: मैं स्क्रीन पर कहानी से जुड़े शख्स को ही पेश करने की कोशिश करता हूं, न कि किसी किरदार को। इस दुनिया में दो इंसान एक समान नहीं हो सकते हैं, सभी अलग होते हैं। इसलिए मेरी कोशिश यही है कि अपने एक्टिंग करियर में जितना हो सके उतने अलग-अलग इंसानों को पर्दे पर चित्रित करूं। इसमें सफलता और असफलता दोनों मिलेगी।

क्या करियर की असफलताएं आगे बढ़ने की चुनौती देती हैं?

मेरी कोशिश यही रहती है कि अपने नसीब को काम से न जोड़ूं। अगर मैं उससे जोड़ता हूं तो काम की सफलता या असफलता मुझे झकझोरेगी, जैसे ही मेरा काम खत्म होता है, मैं उससे अलग हो जाता हूं। हमने एक प्रोडक्ट बना दिया है, उसकी अपनी किस्मत होती है। उससे जुड़ाव नहीं रखना चाहिए। इससे सफलता मिलने पर आप गुरूर नहीं करेंगे और असफल होने पर ज्यादा निराशा नहीं होगी।

इंटरनेट मीडिया पर आपकी कम सक्रियता की क्या वजह है?

मैं अपनी जिंदगी वर्चुअल की जगह वास्तविक दुनिया में जीना ज्यादा पसंद करता हूं। जब कभी मुझे कोई अच्छा नजारा दिखता है तो मैं पहले उसे देखता हूं, कैमरा नहीं निकालता हूं। हालांकि मुझे आज की पीढ़ी को लेकर ईष्र्या भी होती है कि वे किस तरह सारी चीजों को क्रिएटिवली लोगों के सामने पेश कर लेते हैं। इंटरनेट मीडिया पर मैं ज्यादातर अपने काम से संबंधित चीजें ही पेश करता हूं, क्योंकि मुझे खुद को देखने का ज्यादा शौक नहीं है।

Edited By: Priti Kushwaha