स्मिता श्रीवास्तव। बीता साल नवाजुद्दीन सिद्दीकी के लिए काम के लिहाज से अच्छा रहा। उनकी फिल्म ‘रात अकेली है’ और ‘सीरियस मैन’ को खूब पसंद किया गया। इस साल ‘संगीन’, ‘जोगीरा सारा रा रा’ समेत कई फिल्मों में व्यस्त नवाज से स्मिता श्रीवास्तव की बातचीत के अंश ..

बीते साल आपका किसानी पहलू भी देखने को मिला..

मैं अपने गांव गया था। मेरे सभी भाई खेती करते हैं। दादा-परदादा के समय से घर में खेती हो रही है। अभिनय जगत में आने के बाद मेरा खेती से नाता छूट गया था। हालांकि खेती से जुड़ाव बचपन से ही है। वह कहीं न कहीं आदत में है। सो, मौका मिलते ही खेतों की तरफ चला गया था।

ओटीटी ने आपकी गंभीर कलाकार की छवि बना दी है, इस बारे में क्या कहना है?

मैं कॉमेडी अपने तरीके की करता हूं। कोई भी इंटेंस फिल्म हो, उसमें भी हम कॉमेडी कर ही लेते हैं। कॉमेडी में हाथ साफ है। थिएटर में मैंने 70-80 कॉमेडी नाटक किए थे। हमें फिल्म के जॉनर के हिसाब से एक्टिंग करनी पड़ती है। जिस प्रकार से डायरेक्टर चाहते हैं, उसके मुताबिक काम करना होता है। अगर उसमें ह्यूमर की अनुमति होती है तो हम कर देते हैं। यह प्रोजेक्ट पर निर्भर करता है। ओटीटी दर्शकों के लिए बहुत बड़ा बदलाव लेकर आया है। पिछले साठ साल में जो काम सिनेमा नहीं कर पाया, उसे ओटीटी ने सात महीने में कर दिया।

आपके थिएटर गुरु ने आपसे फिल्मों में कॉमेडी न करने के लिए कहा था..

हां, शुरुआत में राजपाल यादव और मैं स्टेज पर आते थे तो लोग हंसना शुरू कर देते थे। हमारी छवि वैसी बन गई थी। हम साथ में खूब कॉमेडी करते थे। अगर कोई नाटक एक घंटे का होता था तो हम उसे इंप्रोवाइज करके डेढ़ घंटे का कर देते थे। कॉमेडी करना खून में था तब थोड़े गंभीर किस्म के किरदार करने शुरू किए। गंभीर किरदार में भी कहीं न कहीं ह्यूमर का टच जरूर होता है। मुझे लगता है कि उतना काफी होता है।

हम वल्र्ड कंटेंट की बात करते हैं। क्या हम अपने कंटेंट में पिछड़े हैं?

हमारा कंटेंट पहले भी अच्छा था, लेकिन ओटीटी ने लोगों को आजादी दी है। सिनेमाघरों की तुलना में ओटीटी डेमोक्रेटिक प्लेटफॉर्म है जहां फिल्म सुपरस्टार की रिलीज हो या नवोदित कलाकार की, उसे देखने के लिए दर्शकों का बड़ा वर्ग मौजूद है।

आप चाहते हैं कि कठिन किरदारों के लिए आपका नाम याद रखा जाए?

जी, मैं चाहता हूं कि अलग-अलग मानसिकता वाले किरदार निभाऊं। वो लाइट किरदार भी हो सकते हैं। बहुत सारे कलाकार कहते हैं कि हम अलग कहानी कहना चाहते हैं, लेकिन मैं फिल्मों और किरदारों के जरिए अलग-अलग मानसिकता को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। उसे करने में थोड़ी मुश्किलें तो आती हैं, लेकिन वह काम मुझे संतुष्टि देता है।

आपने ‘मैक माफिया’ और ‘सेक्रेड गेम्स’ के बाद कोई और वेब सीरीज नहीं की..

‘मैक माफिया’को एमी अवॉर्ड मिला और ‘सेक्रेड गेम्स’ को यूरोप और अमेरिका में भी खूब देखा गया। मुझे खुशी इस बात की थी कि हमारे देश में बनी वेब सीरीज को पूरी दुनिया ने देखा। फिलहाल कोई वेब सीरीज कर भी नहीं रहा हूं। पर्याप्त फिल्में हैं तो उनमें ही व्यस्त हूं। अगर अगले साल कुछ अच्छा प्रस्ताव मिला और लगा कि ‘सेक्रेड गेम्स’ से बेहतर है तो जरूर करूंगा।

केन्या में ‘सेक्रेड गेम्स’ के दूसरे सीजन की शूटिंग हुई। वहां से जुड़े अनुभव के बारे में विस्तार से बताएं?

केन्या में एक बहुत खूबसूरत बंगला था। हमारी प्रोडक्शन टीम चाह रही थी कि वहां शूटिंग की जाए मगर बंगले के मालिक ने उसे किराए पर देने से साफ मना कर दिया। जब टीम ने बताया कि उन्हें ‘सेक्रेड गेम्स’ के लिए बंगला चाहिए तो आपको यकीन नहीं होगा कि उन्होंने अपना बंगला मुफ्त में शूटिंग के लिए दे दिया। उन्होंने कहा आपको जितना दिन चाहिए उतने दिन शूट करो। दरअसल, वह भी ‘सेक्रेड गेम्स’ के फैन थे।

अब आप लगातार लीड किरदार वाली ही फिल्में कर रहे हैं..

अब मेरे पास लीड रोल वाली फिल्में आ रही हैं। मैं फिलहाल सपोर्टिग रोल नहीं करूंगा। मैं यह नहीं कह रहा कि सपोर्टिग रोल छोटा होता है। किरदार तो किरदार होता है। अगर मेरे पास लीड रोल के ऑफर आते हैं तो उन पर फोकस करूंगा। हमारी इंडस्ट्री में कहते हैं कि फिल्में फ्लॉप नहीं होतीं, बजट फ्लॉप होता है। बड़ी फिल्मों के न चलने पर नुकसान ज्यादा होता है।

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