मुंबई। 2017 का आख़िरी महीना चल रहा है। कुछ दिनों बाद आप और हम 2018 का स्वागत कर रहे होंगे, मगर इस स्वागत के जश्न में आंख उन लोगों को याद करके नम भी होगी, जो इस साल हम सबको छोड़कर चले गये।

2017 में बॉलीवुड की कई ऐसी हस्तियों ने ज़िंदगी के सफ़र में अलविदा कहा है, जिनका जाना दिल को बिल्कुल गवारा नहीं। जी करता है, वो लौट आएं, मगर जाने वाले कब लौटकर आते हैं। बस उनकी यादें रह जाती हैं। यादें भी ऐसी, जो कचोटती हैं। रिश्ता भले ही कलाकार और दर्शक का हो, मगर अपने लगते हैं। उनके निभाए किरदार हम में से ना जाने कितने लोगों के लिए मिसाल बने होंगे। ज़िंदगी का मक़सद दे गये होंगे। उनका जाना इसीलिए दिल दहलाता है, तड़पाता है।

डायरेक्टर-प्रोड्यूसर और एक्टर नीरज वोरा 14 दिसंबर की सुबह दुनिया छोड़कर चले गये। अक्टूबर 2016 में नीरज को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था और तभी से वो कोमा में थे और उनका लगातार इलाज चल रहा था। कोमा में जाने से पहले नीरज हेरा फेरी 3 पर काम कर रहे थे, जिसका वो डायरेक्शन कर रहे थे। डायरेक्टर के तौर पर नीरज की आख़िरी रिलीज़ फ़िल्म 2009 में आयी शॉर्ट कट- द कॉन इज़ ऑन है, जबकि बतौर एक्टर वो आख़िरी बार 2015 की फ़िल्म वेल्कम बैक में दिखायी दिये थे। अक्षय कुमार के करियर की सबसे यादगार फ़िल्म हेरा फेरी नीरज ने ही लिखी थी। उन्हें याद करते हुए अक्षय ने ट्वीट किया है- मेरे कॉमेडी में आने के मुख्य कारणों में से एक, नीरज वोरा जैसे बहुमुखी प्रतिभा के धनी शख़्स के निधन की ख़बर सुनकर दुखी हूं। वो अपने आप में छोटा से उद्योग थे। उनसे कितना कुछ सीखा है। श्रद्धांजलि।

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4 दिसंबर की शाम लगभग 5.30 बजे लीजेंडरी एक्टर शशि कपूर का किरदार दुनिया के रंगमंच पर पूरा हो गया। मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में शशि कपूर ने आंखें मूंद लीं। 5 दिसंबर को मुंबई के सेंटाक्रूज़ इलाक़े में शशि कपूर का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 79 साल के शशि काफ़ी दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका जाना हिंदी सिनेमा के लिए बहुत बड़ी घटना है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर में फ़िल्मों का सिर्फ़ कारोबार नहीं किया, बल्कि इस कला को पोसने के लिए ज़द्दोज़हद भी की। ऐसा जोख़िम उठाया, जो शायद उनके बड़े भाई और शो-मैन कहे जान वाले राज कपूर भी उठाने की हिम्मत नहीं कर सके थे। अलविदा शशि साहब। आप पृथ्वी थिएटर की आबोहवा में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।

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रानी मुखर्जी के पिता राम मुखर्जी ने 22 अक्टूबर को अंतिम सांस ली। हम हिंदुस्तानी और लीडर जैसी फ़िल्मों के निर्माता राम मुखर्जी हिंदी सिनेमा की सम्मानित हस्तियों में शामिल थे। मुंबई के मशहूर फ़िल्मालय स्टूडियो के वो फाउंडिंग मेंबर थे। राम मुखर्जी की उम्र लगभग 84 साल थी।

15 अक्टूबर को एक और वेटरन फ़िल्ममेकर लेख टंडन (88 साल) ने अलविदा कह दिया। आम्रपाली जैसी आइकॉनिक फ़िल्म का निर्देशन लेख टंडन ने किया था, जो 39वें ऑस्कर अवॉर्ड्स की विदेशी भाषा केटेगरी में इंडिया की ऑफ़िशियल एंट्री थी।

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7 अक्टूबर को वेटरन फ़िल्ममेकर कुंदन शाह का देहांत हुआ। वो 69 साल के थे। कुंदन हिंदी सिनेमा में जाने भी दो यारों जैसी फ़िल्म के लिए जाने जाते हैं। उनका निधन हार्ट अटैक से ही हुआ था।

29 सितंबर को फ़िल्म और थिएटर पर्सनेलिटी टॉम ऑल्टर का निधन हुआ। वो कैंसर से पीड़ित थे। टॉम ने कई अहम फ़िल्मों में काम किया था और थिएटर में काफ़ी सक्रिय थे। टॉम 67 साल के थे।

43 साल के इंदर कुमार का निधन 28 जुलाई को हार्ट अटैक से हो गया। इंदर का इतनी कम उम्र में जाना दुखी कर गया। बताया जाता है कि काम ना होने की वजह से इंदर अवसाद की स्थिति में चल रहे थे। 

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हिंदी सिनेमा में मां के किरदारों के लिए मशहूर रीमा लागू 18 मई को हम सबको छोड़कर चली गयीं। उनकी मृत्यु की वजह कार्डिएक अरेस्ट बतायी गयी। रीमा महज़ 58 साल ती थीं। उनके निधन की ख़बर जज़्ब करना बॉलीवुड के लिए आसान नहीं था।

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70 साल की उम्र में विनोद खन्ना 27 अप्रैल को अनंत सफ़र के लिए चले गये। उनका जाना भी हिंदी सिनेमा के लिए करारा झटका था। सत्तर के दशक में अपनी ख़ूबसूरती से दिलों में बसने वाले विनोद खन्ना का जीवन दिलचस्प रहा- स्टारडम की बुलंदी, अध्यात्म से साक्षात्कार और सियासत से जुड़ाव। विनोद खन्ना अपने किलर लुक्स और एक्टिंग के एक ख़ास अंदाज़ के लिए जाने जाएंगे, जिसने विलेन को भी सबका प्यारा बना दिया।

साल 2017 ने पहला झटका 6 जनवरी को ही दे दिया, जब 66 साल की उम्र में वेटरन एक्टर ओम पुरी की हार्ट अटैक से आकस्मिक मृत्यु हुई। ओम साहब के निधन से हिंदी सिनेमा गहरे शोक में डूब गया। हालांकि उनकी डेथ पर कुछ विवाद भी हुआ, क्योंकि रिपोर्ट्स में अप्राकृतिक मृत्यु की आशंका ज़ाहिर की गयी थी, जो बाद में निराधार साबित हुई। 

Posted By: Manoj Vashisth