मुंबई। मैं एक रेगुलर नॉर्मन पर्सन हूं जो कि बस स्टॉप पर बस के पीछे भागता है। जिसके पास बारिश के दिनों में छाता नहीं है लेकिन प्लास्टिक की किसी चीज या फिर अखबार से अपने आपको बचाता है। घर से लाया हुआ पराठा खाता है और एवरेज लुक वाला एक एवरेज आदमी है। एवरेज से कम इकोनॉमिकल और हार्डवर्क करने वाला व्यक्ति हूं जो माता-पिता के आशीर्वाद पर विश्वास रखता हूं। यह कहना है बैडमेन के नाम से मशहूर अभिनेता गुलशन ग्रोवर का। उन्होंने जागरण डॉट कॉम के एंटरटेनमेंट एडिटर पराग छापेकर से बातचीत के दौरान अपने फिल्मी सफर के बारे में बताया। एंटरटेनमेंट शो लाइट्स कैमरा एक्शन में गुलशन ग्रोवर से पूरी बातचीत को देख सकते हैं। पूरा वीडियो देखने को लिए नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर सकते हैं -

ऐसे हुई दत्त साहब से मुलाकात

गुलशन ग्रोवर ने बताया कि, मैं प्रोफेसर रौशन तनेजा के एक्टिंग स्कूल में कोर्स कर रहा था। वहां पर अनिल कपूर सहित कई लोग एक्टिंग सीखने आते थे। उस समय मुझे वही नौकरी मिल गई और यहां पर सितारों के बच्चे भी एक्टिंग सीखने आया करते थे। मैं भी टीचर बन गया था। उस समय सुनील दत्त और संजय दत्त वहां आए थे। इसके बाद दत्त साहब ने मुझे रॉकी में काम दिया और अब सिनेमाई सफर का सिलसिला जारी है।

सिनेमा में खलनायक

गुलशन ग्रोवर कहते हैं कि, अब सिनेमा में खलनायक होता ही नहीं है। सिनेमा का रूझान बदल चुका है। यह बात जब मुझे समझ आई तब मैंने भी बदलाव करने का सोचा। मैंने विदेशी फिल्मोंं में काम करना शुरू कर दिया। गुलशन कहते हैं कि, मैं कमर्शियल सिनेमा का पहला एक्टर हूं जिसने बॉलीवुड टू हॉलीवुड ट्रांजिशन शुरू किया। पहला एक्टर हूं जो अब पोलिश फिल्म में भी काम कर रहा है। मैंने मलेशियन और इरानी सहित कई देशों की फिल्मों में काम किया है।

थिएटर के एक्सपीरियंस को कोई नहीं कर सकता रिप्लेस

गुलशन ग्रोवर कहते हैं कि, भले ही डिजीटली हम बढ़ रहे हैं। लेकिन थिएटर के एक्सपीरियंस को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता है। खुशी की बात यह है कि डिजीटल प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिएटिविटी दिखाने का ज्यादा मौका मिल रहा है।

Posted By: Rahul soni

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