प्रियंका सिंह, जेएनएन। तापसी पन्नू अभिनीत फिल्म 'हसीन दिलरुबा’ आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। कुछ समय पहले ही तापसी रूस में छुट्टियां बिताकर स्वदेश लौटी हैं। इस फिल्म, छुट्टियों और इंटरनेट मीडिया पर बेबाक बयानों को लेकर उनसे बातचीत के अंश:

सवाल : आप रूस में छुट्टियां बिताकर स्वदेश लौटी हैं। उस ट्रिप पर आपने खूब साड़ियां पहनीं, जिसने लोगों का ध्यान खींचा...

जवाब : मुझे साड़ियां पहनना बहुत पसंद है। कॉटन और मलमल की बहुत सी साड़ियां मेरे पास हैं। मुझे साड़ी को थोड़ा ट्विस्ट करके पहनना अच्छा लगता है, जैसे टी-शर्ट के साथ या क्राप टाप और स्नीकर्स के साथ जो लुक आता है, वह मुझे पसंद है। मैंने विदेश में साड़ियां पहनीं, इसलिए लोगों का ध्यान गया होगा। 'हसीन दिलरुबा’ में मैंने साड़ियां पहनी हैं। साड़ी आकर्षक परिधान है।

सवाल : आपकी पहली फिल्म है, जो ओटीटी पर रिलीज हो रही है। बॉक्स आफिस का प्रेशर नहीं होगा?

जवाब : हां, मेरे लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का यह पहला अनुभव है। मुझे बॉक्स आफिस की चिंता होती है, पर वो इस बार नहीं है। कई बार फिल्में धीरे-धीरे पिकअप करती हैं, इसलिए कलेक्शन को लेकर कंफ्यूजन बना रहता है। इस बार रिलैक्स्ड हूं।

जवाब : आप इस फिल्म के लिए पहली पसंद नहीं थीं। फिल्म जब दूसरी अभिनेत्रियों के पास से होकर आपके पास आती है, तब उसे लेकर क्या सोच होती है?

जवाब : जिनकी यह फिल्म है, उनको शायद मैं इस फिल्म के लिए पहली पसंद नहीं लगी, लेकिन खुद में मैं माइंड ब्लोइंग हूं। अक्सर इस तरह के किरदार में मुझे लेने के लिए मेकर्स नहीं सोचते हैं। थोड़ा सा सेंशुअस (कामुक) किरदार था। मेरे लिए वही चीज मजेदार रही कि मुझे अपना वह साइड देखने को मिल रहा था, जो मुझे खुद ही नहीं पता था कि मैं कर सकती हूं। फिल्म में सुशील लड़की की बात है, जिसे घरेलू काम और खाना बनाना आता हो।

सवाल : आपके लिए सुशील लड़की की परिभाषा क्या है?

जवाब : मैं खुद को बहुत सुशील समझती हूं, भले ही दूसरों को न लगे। आपके लिए जो अच्छा है, वह किसी दूसरे को बुरा लग सकता है। सुशील शब्द को लेकर भी वही बात है। फिल्म में जो मेरा रानी का किरदार है, उसे खाना बनाना भले ही नहीं आता है, लेकिन दूसरे कामों में वह परफेक्ट है। ऐसे में वह खुद को सुशील समझती है। दूसरों को भले न लगती हो।

सवाल : फिल्म में प्यार में पागलपन दिखाया गया है। रियल लाइफ में आप प्यार में कितनी पागल हो सकती हैं?

जवाब : पागलपन वाले प्यार की बातें हमने ज्यादातर खबरों में पढ़ी हैं। वास्तव जीवन में करने को बहुत कुछ है। सिर्फ प्यार प्राथमिकता नहीं रह जाता है। प्यार में मैं इतना पागल नहीं हो सकती हूं कि किसी और के लिए खुद को नुकसान पहुंचाऊं।

सवाल : इंटरनेट मीडिया पर बेबाकी से बात कहने के साथ ही मर्यादा को बनाए रखना कितना जरूरी मानती हैं?

जवाब : मैं दिल्ली की हूं। बातों को खुलकर कहने में पीछे नहीं रहती, लेकिन परवरिश मायने रखती है। हम जो होते हैं, उसमें पढ़ाई-लिखाई, घर वालों की शिक्षा का योगदान होता है। मुझे यह बात सिखाई गई है कि किस परिस्थिति में कैसे बर्ताव करना है। दूसरी अहम बात है कि हमारे देश में आर्टिस्ट की छवि बहुत बड़ी होती है। फैंस स्टार को आदर्श की तरह देखते हैं। उनकी उम्मीदों का मान रखना आप पर निर्भर करता है।

 

 

 

 

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Edited By: Nazneen Ahmed