मंबई, स्मिता श्रीवास्तव व प्रियंका सिंह। विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश का आज आगमन हो रहा है। कोरोना काल में गणेशोत्सव में सादगी और संयम है, पर आस्था और उमंग पूर्ववत है। हमारी फिल्मों में ढोल-नगाड़ों के साथ उनके आगमन, पूजा-अर्चना और विसर्जन तक कई सीन फिल्माए गए हैं। ‘वास्तव’, ‘अग्निपथ’, ‘बाजीराव मस्तानी’ सहित अनेक फिल्मों में गणेशोत्सव की धूम रही। हीरो की एंट्री से लेकर, डांस कंप्टीशन, एक्शन सीन गणपति उत्सव की पृष्ठभूमि में रचे गए हैं। इन्हें फिल्माने की चुनौतियों, भगवान गणेश पर बने गानों के पीछे की कहानी, सेट पर उनकी मूर्ति के साथ शूटिंग करने के तरीकों सहित विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं स्मिता श्रीवास्तव व प्रियंका सिंह...

 

 

 

 

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रितिक रोशन और प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म ‘अग्निपथ’ में पहला गाना जो रिकार्ड किया था, वह देवा श्री गणेशा... था। यह सिर्फ आरती वाला गाना ही नहीं था, बल्कि फिल्म की सिचुएशन भी ड्रमैटिक थी। प्रियंका ने बताया था कि सेट पर जब उन्होंने गणेश जी की 35 फुट की विशाल मूर्ति देखी तो वह दो मिनट तक नतमस्तक हो गई थीं। वहीं फिल्म ‘बैंजो’ में उड़ते गुलाल और ढोल की थाप के बीच राक स्टाइल में गणेश जी की आराधना की गई थी। इस गाने के लिए 23 फीट की मूर्ति मुंबई के लालबाग के मूर्तिकारों ने बनाई थी। रितेश ने अपने हाथ पर भी गणपति का चेहरा पेंट कराया था। इस सीक्वेंस को फिल्माने की एनर्जी इतनी थी कि सेट पर गाना शूट हो जाने के बाद वहां मौजूद ढोल वालों के साथ पूरे क्रू ने जमकर डांस भी किया था।

 

 

 

 

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गणेश पूजन से शुभारंभ:

फिल्मों की शूटिंग का शुभारंभ ही गणेश पूजा के साथ होता है, लेकिन गणेशोत्सव को फिल्म में शामिल किया जाए तो उसको लेकर खास तैयारियां सेट पर की जाती हैं। फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे’ में गणपति के आगमन से लेकर विसर्जन तक के दृश्य हैं। इस फिल्म के सिनेमेटोग्राफर असीम बजाज कहते हैं, ‘आप किस नजरिए से कहानी कह रहे हैं, उसके मुताबिक ही काम करना पड़ता है। ‘सत्या’ फिल्म के गणपति बहुत अलग दिखेंगे। हमारा शूट भी रियल था, उनका भी रियल ही था। उन्होंने भी पूरे भक्तिभाव से किया था, लेकिन पृष्ठभूमि बदलती है तो मायने बदल जाते हैं, उसी के अनुरूप शूट करने का अंदाज भी बदल जाता है। मैं बिहार से हूं। हमारे यहां गणपति उत्सव उतनी धूमधाम से नहीं मनाया जाता जितनी दुर्गा पूजा और छठ पूजा। जब तक हमने ‘सत्या’ नहीं देखी थी तब तक इसकी व्यापकता समझ में नहींआई थी। इस फिल्म के लिए गणपति उत्सव पूरा रियल में शूट किया था। मुंबई में गणपति को पंडालों में स्थापित किया जाता है। वो मूर्तियां काफी बड़ी होती हैं। विसर्जन भी डेढ़, पांच, सात और 11वें दिन पर होता है। तब भक्तों की भारी भीड़ भी जुटती है। हमने अलग-अलग जगहों पर 12 कैमरों को लगाया था। सबको यही निर्देश था कि फ्रेम में गणपति होने चाहिए। हम गिरगांव चौपाटी में नाव पर सवार होकर समुद्र में गए थे, ताकि सामने से विसर्जन के लिए लाए जा रहे गणपति का फ्रेम ले सकें। हमारे निर्देशक अश्विनी धीर भीड़ के बीच अफरा-तफरी में गिर भी गए थे। भीड़ में संभलकर उठ पाना आसान नहीं होता। गणेश जी की कृपा ही थी कि वह सुरक्षित रहे। वह खुद गणपति के भक्त हैं। हर साल घर पर गणपति लाते हैं।'

इनडोर सेट बनाना चुनौतीपूर्ण:

फिल्म ‘एबीसीडी 2’ में हे गणराया... गाने के लिए विशाल इनडोर सेट बनाया गया था। इस फिल्म के प्रोडक्शन डिजाइनर परिचित परलकर के लिए इस गाने को शूट करना बेहद मुश्किल था। गाना भगवान गणेश पर था, लेकिन सेट पर उन्हें न ही गणेश जी की मूर्ति रखनी थी, न ही स्क्रीन लगाने थे, जिस पर वह गणेश जी की तस्वीरें दिखा पाते। परिचित कहते हैं, ‘मुझे एक दिन में उस सेट को ट्रांसफार्म करना था। उससे पहले उसी सेट पर फिल्म का चार्ली चैपलिन का डांस सीक्वेंस शूट किया गया था। चैलेंज उस सेटअप को बदलना था। सेट को ध्यान से देखा जाए तो उसका स्ट्रक्चर गणपति के चेहरे जैसा नजर आता है। कुछ पाबंदियां थीं कि एलईडी स्क्रीन फिल्म के डांस फिनाले से पहले इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। हमने गोल्डन वार्म लाइट्स लगाईं, जिससे उत्सव वाला फील आ गया था। गोल्डन रंग को बढ़ाने के लिए गोल्डन मिरर एक्रेलिक्स के पैच स्टेज के दोनों तरफ लगाए। हम लास वेगस में शूटिंग कर रहे थे। वहां के मुताबिक माहौल इंटरनेशनल स्टाइल में रखना था। अगर भारतीय फार्मेट होता, तो हम गणेश जी की मूर्ति या एलईडी पर उनकी तस्वीरें लगा सकते थे। ऐसे इनडोर सेट बनाना काफी मुश्किल होता है। आम सेट के मुकाबले त्योहार पर बने गाने डिमांड ज्यादा करते हैं, जिससे बजट बढ़ जाता है।

 

 

 

 

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हर भाषा संस्कृति से परे:

मराठी फिल्म ‘यारी दोस्ती’ में गणेशोत्सव पर बने गाने का सेट बना चुके आर्ट डायरेक्टर एंड प्रोडक्शन डिजाइनर देवेन सुभाष पवार कहते हैं, ‘मराठी और हिंदी फिल्मों में इसे मनाने के अंदाज में मुझे फर्क नहीं नजर आता है, क्योंकि गणेश जी के प्रति श्रद्धा भाव तो समान होता है। फर्क बजट का होता है। अन्य सेट के मुकाबले गणेशोत्सव के सेट को बनाने में ज्यादा मेहनत लगती है। ध्यान रखना पड़ता है कि किसी की भावनाएं आहत न हों। गणेश जी की मूर्ति से लेकर आसपास की चीजों को साफ-सुथरा रखकर काम किया जाता है, भले ही वो शूटिंग का सामान होता है। शूटिंग के लिए जो बड़ी मूर्ति के साथ छोटी मूर्ति होती है, उसकी पूजा करके हम विसर्जन कर देते हैं। बड़ी मूर्तियों का विसर्जन करना हमारे लिए संभव नहीं होता है। उन्हें संभालकर रख देते हैं।’

गानों में प्रयोग:

फिल्मों में गणेश भगवान के नामों पर इतने गाने बन चुके हैं कि उन पर नया गाना तैयार करना मुश्किल काम है। ‘एबीसीडी’ फिल्म में गणेशोत्सव के एक सीक्वेंस के लिए गीतकार मयूर पुरी को एक गाना तैयार करना था। मयूर बताते हैं, ‘फिल्म के निर्देशक रेमो डिसूजा सर ने कहा कि मेरे हीरो का इंट्रोडक्शन है और गणपति का माहौल है। मुझे भजन नहीं, डांस वाला गाना चाहिए। मैं गणेश और गणपति जैसे शब्द की बजाय उन्हें किसी और नाम से बुलाना चाह रहा था। मैंने मार्केट से जाकर एक किताब खरीदी, जिसमें गणेश जी के 1000 नाम थे, लेकिन उनमें से भी मुझे अपने गाने के लिए नाम नहीं मिला। फिर मैंने शंभु सुताया नाम सोचा, क्योंकि वह शिव के बेटे हैं। इस गाने के अंत में गुजराती में एक फार्मेट होता है, जो श्रीकृष्ण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। किसी ने उसे गणपति के लिए इस्तेमाल नहीं किया था, क्योंकि उसमें फिर राइम शब्द बहुत डालने पड़ते हैं। मुझे जितना आता था, सब इस गाने में निचोड़ दिया था। मुझे लगा था यह गणेश जी पर मेरा आखिरी गाना होगा, लेकिन क्लाइमेक्स में गणेश जी का गाना फिर चाहिए था। संगीतकार सचिन-जिगर ने कहा कि अब इस गाने में हिप हाप और रैप करते हैं। रैपर हार्डकौर को इस गाने के लिए बुलाया गया। गणेश जी किसी भी धर्म से परे हैं, इसलिए हमने इस गाने को पंजाबी में लिखा कि साडा दिल भी तू...साडी जान भी तू... अच्छी फीलिंग के साथ हर काम अच्छा होता है। ज, त, थ, इन्हें म्यूजिकल शब्द नहीं माना जाता है, लेकिन मैंने इनका इस्तेमाल किया। ‘एबीसीडी 2’ के लिए हमने गणेश जी पर शुद्ध क्लासिकल गाना बनाया था।’

17 नामों से बना गजानना:

फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ में गजानना...गाना के गीतकार प्रशांत इंगोले के लिए इस गाने को बनाना अलग था, क्योंकि यह गाना बाजीराव के दौर में सेट था। प्रशांत कहते हैं, ‘हम 17वीं शताब्दी के मुताबिक गाना बना रहे थे। मैंने भाषाई बंदिश नहीं रखी, क्योंकि फिल्म हिंदी में थी। मैंने रिसर्च की कि बाजीराव कैसे इतने पावरफुल बने, उस समय धर्म को लेकर लोगों की भावनाएं क्या थीं। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि गाने की कहानी क्या होगी, जो मस्तानी पर होने वाले अटैक वाली सिचुएशन के साथ मेल खाए, गाना ज्ञान वाला और प्रशंसा करने वाला भी न लगे। फिर मैंने गणेश जी के 17 नामों को लेकर गाना बनाया। पहले इस गाने को केवल 30 सेकेंड या एक मिनट का रखने की योजना थी। मैंने सिर्फ मुखड़ा लिखकर संजय लीला भंसाली सर को दे दिया था। उन्होंने कहा कि हम पूरा गाना बनाएंगे। मैंने अपना एक इंडिपेंडेंट गाना गणपति डांस भी बनाया है, जिसे पुणे के एक गणेश मंडल में शूट किया है, वहां गणेश जी 123 साल से स्थापित हैं। सब उनकी कृपा से हो जाता है।’

भाए एनिमेटेड गणेशा:

गणेश जी का एनिमेटेड अंदाज भी फिल्मों में दिखाया गया है। फिल्म ‘माय फ्रेंड गणेशा’ के निर्देशक राजीव एस रुईआ कहते हैं, ‘फिल्म में सिर्फ गणेश जी का किरदार एनीमेटेड था, बाकी सब एक्टर्स थे। लाइव किरदारों के एनिमेटेड किरदार से बातचीत वाले सीन चैलेंजिंग थे, क्योंकि साल 2007 में एनिमेशन का मार्केट ज्यादा नहीं था। चार पार्ट में फिल्म बन चुकी है, पांचवें पार्ट की तैयारी है। हर पार्ट के साथ एनिमेशन बढ़ता जा रहा है।’

Edited By: Priti Kushwaha