नई दिल्ली, जेएनएन। हैरतअंगेज एक्शन हमेशा से बॉलीवुड फिल्मों की जान है, पर कोरोना से बचाव सुनिश्चित करने की प्रक्रिया में इसे गढ़ने के तौर-तरीकों पर प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है। कंप्यूटर जनित विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स का इस्तेमाल कितना करगर हो सकेगा और क्या होगी एक्शन डिजाइन करने की बदली हुई रणनीति? यह एक्शन डायरेक्टर्स से जानने का प्रयास किया स्मिता श्रीवास्तव ने...

कालजयी फिल्म 'शोले' में ट्रेन का सीक्वेंस, घोड़ों के लंबे चेजिंग सीन थे। उसके लिए बीस घोड़ों को मुंबई से बेंगलुरु लाया गया था। बेंगलुरु के समीपवर्ती कस्बे रामनगर में 'शोले' की शूटिंग हुई थी। ये घोड़े फिल्मों के लिए प्रशिक्षित थे। उन्हें लाइट या विस्फोट से कोई दिक्कत नहीं होती थी जबकि समीप के इलाकों से बेंगलुरु के मैसूर क्लब पहुंचाए गए दूसरे बीस घोड़े बिल्कुल नौसिखिया थे।

एक घोड़ी ने पांच बार गब्बर सिंह यानी अमजद खान को गिरा दिया था। एक बार उसने धर्मेंद्र को भी गिरा दिया था। ऐसी कई दिक्कतों के बावजूद निर्देशक रमेश सिप्पी ने इसके एक्शन को यादगार बनाया। इसी तरह बी आर चोपड़ा की फिल्म 'द बर्निंग ट्रेन' में अचानक से ट्रेन में आग लग जाती है। उस दौर में वीएफएक्स नहीं था। इसलिए ऐसे दृश्य को गढ़ना काफी थ्रिलिंग था।

फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर रहे अनिल शर्मा बताते हैं, 'उस सीन के लिए हॉलीवुड फिल्म 'द टावरिंग इनफर्नो' के स्टंट कोऑर्डिनेटर पॉल स्टेडर को विदेश से बुलाया गया था। वह गैस से आग लगाने का नया सिस्टम लेकर आए थे। हर खिड़की पर फायर पैन लगा दिया करते थे। यह गैस के चूल्हे की तरह होता था, जिसे हम नॉब से नियंत्रित करते थे। एक सिलेंडर दो फायर पैन कंट्रोल करता था। दस खिड़कियों को कवर करने के लिए दस लोग भी लगते थे। सबको एकसाथ उसे जलाना होता था। उस दौर में वीएफएक्स नहीं था। सभी एक्टर खुद एक्शन परफार्म करते थे।

समय के साथ बदला है एक्शन

आज की फिल्मों का एक्शन काफी बदल चुका है। 'दंगल', 'बाजीराव मस्तानी', 'पद्मावत', 'काबिल' समेत कई फिल्मों के एक्शन डायरेक्टर शाम कौशल कहते हैं, 'लोग कहानी के साथ एक्शन देख रहे होते हैं। अगर किरदार लार्जर दैन लाइफ हैं तो एक्शन भी उसके मुताबिक होगा। तब हारनेस, केबिल वगैरह का इस्तेमाल करना पड़ता है। उसके लिए हैरतअंगेज, रोंगटे खड़े कर देने वाला और सांसें थाम देने वाला एक्शन दिखाना होता है।

'कृष' की डिमांड लार्जर दैन लाइफ थी मगर 'दंगल' की नहीं। बाजीराव असल जिंदगी में साहसी थे। रणवीर का ढाल के ऊपर से चलने वाला सीन आइकॉनिक बन गया। संजय लीला भंसाली की 'गंगूबाई काठियावाड़', आनंद एल राय की 'अतरंगी रे' और मणिरत्नम की फिल्म में एक्शन कोरियोग्राफ कर रहे शाम कौशल के पास एक्शन से सबंधित सामान का अपना संग्रह है।

शाम कहते हैं, 'कृष' से मैंने हारनेस का इस्तेमाल करना शुरू किया। एक्शन के लिए उपयोग में आने वाले साजो सामान मैं अपने ही प्रयोग करता हूं। इन्हें मैं अमेरिका से मंगवाता हूं। उनमें कई चीजों साल में एक-दो बार ही उपयोग में आती हैं। मैं उनके साथ सुरक्षा को लेकर आश्वस्त रहता हूं।'

एक्टर की भूमिका भी अहम

फिल्म के एक्शन डिजाइन करने में निर्देशक की भूमिका के संबंध में 'बागी 2', 'बागी 3' के निर्देशक अहमद खान कहते हैं, 'अपनी फिल्मों में एक्शन मैं खुद पूरा डिजाइन करता हूं। मैं ऐसे लोगों को हायर करता हूं, जो उसे कोरियोग्राफ करते हैं। एक्शन करना एक्टर पर निर्भर करता है कि वह कितना और कैसे कर पाएगा। कितना सीखा हुआ है? अब तमाम सुरक्षा के उपकरण आ चुके हैं। उसके बावजूद टाइगर श्रॉफ एक्शन को लेकर शुरू से लेकर अंत तक उसमें इनवॉल्व रहते हैं। यह टीम वर्क होता है। 'बागी' सीरीज की फिल्मों के लिए निर्माता साजिद नाडियाडवाला ने भी अहम इनपुट दिए।

वीएफएक्स का इस्तेमाल

'अक्स' फिल्म में अमिताभ बच्चन को 300 फीट से नीचे गिराने और 'धूम' और 'धूम 2' में लाइव एक्शन कराने का श्रेय एक्शन डायरेक्टर एलन अमीन को जाता है। उनके मुताबिक 'धूम 2' में अभिषेक बच्चन और रितिक रोशन का वॉटरफॉल पर फाइट सीक्वेंस जैसे एक्शन सीन सब रियल थे। एलन अमीन कहते हैं, 'कहानी के मुताबिक मैं एक्शन सीक्वेंस बनाता हूं। उनके अंदर स्टोरी बोर्ड बनाकर, वीएफएक्स प्लान करके निर्देशक को बताता हूं।

'मिशन कश्मीर' के दौरान मैंने पहली बार केबल का इस्तेमाल किया था। सिर्फ केबल को स्क्रीन से मिटाने के लिए वीएफएक्स का इस्तेमाल किया था। आज वीएफएक्स इतना बढ़ गया है कि एक्टर अगर शॉट नहीं दे सकता है तो उनके चेहरे को डुप्लीकेट के चेहरे पर लगा देते हैं और पूरा एक्शन कर सकते हैं।' वीएफएक्स की वजह से बैकग्राउंड बदलने से लेकर भीड़ को दिखाना भी आसान हो गया है।

वीएफएक्स के प्रयोग के संबंध में शाम कौशल कहते हैं, 'बाजीराव मस्तानी' के लिए हमने तीन सौ घोड़े रखे थे। 'पद्मावत' में हमने 45 घोड़े दो दिन से ज्यादा नहीं रखे। यह सब सीक्वेंस की जरूरत के आधार पर भी निर्भर करता है।'

मौजूदा दौर में कैसे होगी शूटिंग

हालांकि कोविड 19 वजह से फिल्मों में एक्शन की दुनिया पर प्रभाव पड़ने की बात की जा रही है। एक्शन कोरियोग्राफर गीता टंडन करती हैं, 'जानदार एक्शन गढ़ने के लिए बॉलीवुड में पूरी तकनीक है। मगर कोविड की वजह से नवंबर से पहले शूटिंग शुरू होने की संभावना नजर नहीं आती है, क्योंकि एक्शन के लिए बड़े ग्रुप की जरूरत होती है।

अहमद खान कहते हैं, 'मैं डांस और एक्शन दोनों दुनिया से हूं। दोनों में सब कुछ नजदीकी से ही होता है। गिरेबान पकड़कर ही पंच मारना होगा। डांस करना है तो हाथ पकड़ना होगा। बहरहाल हम निर्देशों के अनुसार ही काम करेंगे।' वीएफएक्स के प्रयोग पर अनिल शर्मा कहते हैं, 'वीएफएक्स के लिए बजट भी देखना होता है। यह एक करोड़ से लेकर कितना भी हो सकता है। वीएफएक्स से मेकर्स के लिए राहें आसान हुई हैं। इसका प्रयोग बढ़ने की पूरी संभावना है।'

शाम कौशल कहते हैं, 'शूटिंग शुरू होने पर कोई भी सीधे एक्शन की शूटिंग आरंभ नहीं करेगा। आसान सीन से शूट शुरू करेंगे। हालात को देखते हुए उसका हल ढूंढऩा पड़ेगा। काम के साथ कहानी साथ भी न्याय करना है।' एलन अमीन कहते हैं, 'स्टंटमैन मास्क पहनकर फाइट नहीं कर सकते हैं। वैक्सीन जब तक नहीं आएगी, तब तक एक्शन करना आसान नहीं होगा।'

महंगे एक्शन सीन

  • साहो 90- करोड़ खर्च किए गए थे एक एक्शन सीन पर। जिसमें 37 कार और 5 ट्रक तोड़े गए।
  • रोबोट 2.0- 20 करोड़ खर्च हुए अक्षय कुमार और रजनीकांत के एक एक्शन सीन पर।
  • बाहुबली 2- 30 करोड़ खर्च हुए क्लाइमेक्स सीन पर जबकि 'बाहुबली' के क्लाइमेक्स सीन पर 15 करोड़ खर्च किए गए।
  • ढिशूम- 3 करोड़ खर्च हुए मोरक्को में फिल्माए 12 मिनट लंबे चेजिंग सीन पर।
  • पुष्पा- 6 करोड़ खर्च हुए महज 6 मिनट के एक्शन सीन पर। दक्षिण भारत के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन की आने वाली यह एक्शन फिल्म हिंदी सहित पांच भाषाओं में रिलीज होगी।

Posted By: Manoj Vashisth

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