नवरात्र में मन के विकारों पर विजय का संकल्प, अभिनेता विशाल जेठवा और अनंत जोशी की क्या है राय?
नवरात्र के महत्व को लेकर बॉलीवुड अभिनेता विशाल जेठवा और अनंत जोशी ने खुलकर बात की है।
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विशाल जेठवा और अनंत जोशी (फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम)
HighLights
आज से शुरू हुए शारदीय नवरात्र
विशाल जेठवा और अनंत जोशी के विचार
जीवन में नवरात्र का क्या है महत्व
प्रियंका सिंह और दीपेश पांडे, मुंबई: नवरात्र केवल मां दुर्गा की आराधना और गरबा-डांडिया का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी नकारात्मक शक्तियों पर विजय पाने का भी अवसर है। मां के नौ स्वरूपों की उपासना के इन नौ दिनों में जहां शक्ति और सकारात्मकता का संचार होता है, वहीं मन के डर, अहंकार और दूसरी बुराइयों को दूर करने का संकल्प भी
लिया जा सकता है। अभिनेता विशाल जेठवा और अनंत जोशी मां की भक्ति के साथ अपने भीतर की बुराइयों पर विजय पाना चाहते हैं।
जीवन से डर के राक्षस का वध करना है : विशाल जेठवा
नवरात्र का त्योहार मर्दानी 2, होमबाउंड फिल्मों के अभिनेता विशाल जेठवा के दिल के बेहद करीब है। इस नवरात्र वह अपने भीतर बैठे डर के राक्षस का अंत करना चाहते हैं। विशाल कहते हैं कि मेरे भीतर बैठा डर मेरे लिए पाजिटिव और निगेटिव दोनों है। उसी डर की वजह से काम को लेकर योजनाएं बना लेता हूं। वहीं यही डर मुझे भविष्य में क्या होगा, उसकी चिंता करवाता है। यह डर वर्तमान में मुझे चैन से सोने नहीं देता है।
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मुझे अपने भीतर से डर के इस राक्षस का वध करना है। ऐसा कर पाया, तो जिंदगी आसान होगी। इसके साथ ही मेरे लिए किसी भी नकारात्मकता से दूर रहना भी अहम है। इसमें मेरा परिवार मेरा बहुत साथ देता है। मेरा परिवार के इरादे ही मेरे लिए नेक हो सकते हैं, न की उन कुछ इंडस्ट्री के लोगों के जो मुंह पर प्यार से बात करते हैं, लेकिन उनमें से कइयों के इरादे गलत होते हैं, वह जो नहीं कहते हैं, वह समझ आ जाता है। मम्मी, भाई, दीदी के साथ समय बिताने से सब ठीक लगता है। कई बार उस मंदिर में जाकर बैठ जाता हूं, जहां बचपन में जाया करता था, वहां काफी सकारात्मक महसूस होता है।
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जहां तक इस पर्व का मनाने की बात है, तो मैं गुजराती हूं, हमारे यहां काफी धूमधाम से नवरात्र मनाया जाता है। माता की पूजा होता है, व्रत रखा जाता है, मेरे भाई तो इन नौ दिनों में चप्पल भी नहीं पहनते हैं। गरबो रखा जाता है, जिस पर माता का दीया होता है, नवरात्र के आखिरी दिन उसका विसर्जन करते हैं। मैं जब चौथी कक्षा में था, तब मिट्टी से माता की मूर्ति बनाता था। अब तो संभव नहीं हो पाता है, अब गणपति की मूर्ति अपने हाथों से बनाता हूं।
गरबा भी पहले की तरह नहीं खेल पाता हूं। पहले तो नौ दिन के लिए नौ अलग कपड़े पहनता था, नई-नई चीजें लेकर आता था, मिक्स एंड मैच करके पहनता था, ताकि हट कर दिखूं। मेरा एक दोस्त था, उसके पास गरबा के कपड़े नहीं होते थे, तो मैं उसे अपने कपड़े दे देता था, फिर वह ऐसे बर्ताव करता था, जैसे उसके अपने कपड़े हो।
गरबा-डांडिया खेलते हुए मुझे प्यार भी हुआ था। कोफी छोटा था, मुझे एक लड़की पसंद आ गई थी, सोचा था गरबा के आखिरी दिन उसे प्रपोज करूंगा, लेकिन मेरी हिम्मत ही नहीं पड़ी। यह बात मैंने किसी को बताई नहीं थी। आगामी दिनों में विशाल अब्बास-मस्तान की फिल्म 3 मंकीज में नजर आएंगे।
अहंकार रूपी राक्षस का करना चाहूंगा अंत : अनंत जोशी
फिल्म ट्वेल्थ फेल तथा मामला लीगल है, गुल्लक और चुंबक वेब सीरीज के अभिनेता अनंत जोशी कहते हैं, ‘मैं अपने अंदर के अहंकार रूपी राक्षस को खत्म करना चाहूंगा। अहंकार कई बुराइयों की जड़ है, जो इंसान के साथ हमेशा बना रहता है। बाकी सारी बुराइयां रक्तबीज की तरह हैं, वो आती हैं, हम उन्हें खत्म करते हैं और वो फिर आ जाती हैं। मुझे लगता है कि आज दुनिया की ज्यादातर समस्याएं अहंकार से ही जुड़ी हैं, जिसके हटने पर हम सभी सरल और सहज बन सकते हैं।
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हमें कई बार तो अहंकार सिर्फ मनुष्य योनि में पैदा होना का ही हो जाता है। मैं कभी इसके चक्कर में न पड़ूं, इसको लेकर सजग हूं। मैं अक्सर अपने दोस्तों और माता-पिता से इस पर विचार-विमर्श करता रहता हूं। इंसान के लिए तो यह स्वाभाविक है, आता-जाता रहता है, इसलिए निरंतर इस पर चिंतन करते रहना होता है। हमें तो कभी-कभी तो पता ही नहीं चलता है कि हमने कितनी बातें सिर्फ अहंकार में बोल दी हैं। मेरी कोशिश रहती है कि अगर अहंकार में कुछ बोल भी दिया है, तो उसमें सुधार लूं।

बतौर कलाकार हम तो अलग-अलग भूमिकाओं का चोला पहनते हैं। जिस दिन हम इस अहंकार में आ गए हैं, हम तो फलां व्यक्ति हैं, तो हम किसी दूसरे पात्र का चोला सही ढंग से नही पहन पाएंगे। कलाकार अपनी जीवन में जो भी हासिल करता है, उसके पीछे एक पूरी टीम काम करती हैं।
ऐसे में अहंकार में किसी की बात न सुनने, अपनी ही अलग दिशा में बढ़ने पर हम स्वयं को ही खो देंगे। फिल्म ट्वेल्थ पास के बाद लोगों का बहुत प्यार मिला, उस समय भी मेरी कोशिश यही रही कि अहंकार से दूर रहा जाए। ऐसी कोई बड़ी वजह भी नहीं रही कि मुझे अहंकार आए। मुझे सहज रहना ज्यादा पसंद है। लोगों का जो प्यार मिला, उसे जिम्मेदारी की तरह देखता हूं, तो फिर अहंकार की जगह ही नहीं बचती हैं।’
