राहुल सोनी, मुंबई। फिल्म मुक्काबाज़ में विनीत कुमार सिंह ने न सिर्फ एक्टिंग की है बल्कि फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने के साथ गानेे भी लिखें हैं। इस बारे में विनीत ने खुद बताया कि, वे तो एक्टिंग करना चाहते थे लेकिन लीड रोल की तलाश ने उन्हें स्क्रिप्ट लिखने पर मजबूर कर दिया।

अनुराग कश्यप निर्देशित फिल्म मुक्काबाज़ को लेकर बातचीत करते हुए विनीत कुमार सिंह ने एक खास बात साझा की कि, वो तो सिर्फ एक्टिंग करना चाहते थे लेकिन उन्हें स्थितियां एेसी बनी कि उन्हें खुदके लिए ही स्क्रिप्ट लिखनी पड़ी। जागरण डॉट कॉम से खास बातचीत करते हुए विनीत कहते हैं कि, गैंग्स अॉफ वासेपुर का दानिश खान और बॉम्बे टॉकीज़ का विजय लोगों के जहन में था, चूंकि लोगों ने मुझे इन्हीं किरदारों में देखा था। यहां तक की बेस्ट सपोर्टिंग रोल के लिए नॉमिनेट भी हुआ। लेकिन मेरी इच्छा लीड रोल करने की थी। इसलिए खुद अपने लिए स्क्रिप्ट लिखी। एेसा नहीं था कि स्क्रिप्ट लिखने के बाद सब आसान हो गया था। चूंकि, स्क्रिप्ट लिखने के बाद तीन साल तक घूमा हूं। डायरेक्टर्स और मेकर्स का यही कहना था कि, आपकी स्क्रिप्ट अच्छी है लेकिन आपको हम दूसरा अच्छा रोल देते हैं, जो कि मुझे स्वीकार नहीं था। इसलिए मैंने यह सोच रखा था कि फिल्म में लीड रोल तो मैं ही करूंगा। मुझे यह अच्छे से पता था कि, एक मुक्काबाज़ की कहानी है जो कि स्पोर्ट्सपर्सन है तो उसके लिए स्टेमिना और स्ट्रेंथ अच्छी होनी चाहिए। इसलिए तब से ही शुरूआत कर दी थी जिससे अगर कोई फिल्ममेकर या डायरेक्टर फिल्म बनाने के लिए तैयार होता है तो मैं पूरी तरह से तैयार रहूं। इसलिए रोज दो घंटे की एक्सरसाइज और प्रेक्टिस करता था यह मानकर की मेरी फिल्म बनेगी।

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पैसे कमाने होते तो डॉक्टर क्या बुरा था

विनीत ने बताया कि, कई मेकर्स ने तो यह तक कह दिया कि आपको पैसा दे दिया जाएगा और वैसे भी आपको पैसा ही चाहिए न। लेकिन मैंने उन्हें साफ मना कर दिया। चूंकि, मैं एमडी मेडिसन (डॉक्टर) हूं और अगर पैसे ही कमाने होते तो डॉक्टरी करता। फिल्में क्यों करता। इसका एक कारण यह भी था कि मुझे एक्टिंग करने में खूब मजा आता है। इसलिए खुदके लिए ही कहानी लिखी थी। आखिरकार अनुराग कश्यप ने मेरी एक्टिंग स्किल को अच्छे से पहचाना और मुझे लीड रोल करने का मौका मिला।

Posted By: Rahul soni