मुंबई। 71वें कान फ़िल्म फेस्टिवल का कारवां समापन की ओर है। फ्रांस के कान शहर में हर साल होने वाले इस फेस्टिवल में दुनियाभर के सेलेब्रिटीज़ और फ़िल्मकार जुटते हैं। कुछ ग्लैमर का जलवा बिखरता है तो कुछ बिज़नेस की बातें होती हैं। भारतीय सिनेमा का कान से रिश्ता कई साल पुराना है। इस बार कान फ़िल्म समारोह में रेड कार्पेट के अलावा भी विभिन्न वर्गों में भारतीय फ़िल्मों का जलवा नज़र आया। 

The Extraordinary Journey Of The Fakir: अंग्रेज़ी शीर्षक वाली ये फ़िल्म इंग्लिश-फ्रेंच प्रोडक्शन है, जिसमें साउथ सिनेमा के सुपरस्टार धनुष ने मुख्य भूमिका निभायी है। ये कॉमेडी फ़िल्म है। कान फ़िल्म फेस्टिवल में धनुष का ये डेब्यू था, जहां वो अपनी इस फ़िल्म को प्रमोट करने के लिए पहुंचे थे। द एक्स्ट्राऑर्डिनरी जर्नी ऑफ़ द फ़कीर को केन स्कॉट ने निर्देशित किया है। ये एक स्ट्रीट मैजिशियन के बारे में है, जो लोगों को यक़ीन दिला देता है कि उसके पास कुछ ख़ास ताक़त है। 

मंटो- नंदिता दास निर्देशित मंटो कान फ़िल्म फेस्टिवल के Un Certain Regard सेक्शन में शामिल की गयी। इस सेक्शन में जगह पाने वाली मंटो इकलौती भारतीय फ़िल्म है। हर साल इस सेक्शन में 20 ऐसी फ़िल्मों का चुनाव किया जाता है, जिनकी कहानी बिल्कुल अलग या मौलिक होती है। उर्दू साहित्य के मशहूर कहानीकार सअादत हसन मंटो की बायोपिक में नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ने मुख्य किरदार निभाया है। फ़िल्म में ताहिर राज भसीन और रसिका दुग्गल ने भी अहम किरदार निभाये हैं। ग़ौरतलब है कि मंटो का फ़र्स्ट लुक पिछले साल कान फेस्टिवल में ही रिलीज़ किया गया था। 

शॉर्ट फ़िल्में- शॉर्ट फ़िल्म केटेगरी में इस बार दो फ़िल्में फ़िल्म समारोह का हिस्सा बनीं। ये फ़िल्में हैं- सर और अस्थि। सर जहां क्रिटिक्स वीक सेक्शन के लिए रेस में थी तो अस्थि को शॉर्ट फ़िल्म कॉर्नर सेक्शन में जगह मिली। सर में तिलोत्तमा शोम ने मुख्य किरदार निभाया है, जबकि अस्थि में अंतरा यादवल्ली राव मुख्य भूमिका में हैं। मां-बेटी के संबंधों पर आधारित 14 मिनट की इस फ़िल्म को दिनकर राव ने डायरेक्ट किया है, जबकि लावण्य राव ने प्रोड्यूस किया है। फ़िल्म में अंतरा ने मीरा नाम किरदार निभाया है, जो अपनी मां की अस्थियां विसर्जित करने के लिए हरिद्वार जाती है। मगर, मां से लगाव के कारण ये उसके लिए आसान नहीं होता। अस्थि को कान फ़िल्म समारोह में धनुष का भी सपोर्ट मिला, जिन्होंने फ़िल्म का पोस्टर रिलीज़ किया।

 

2002 में बदला गया नाम

71वां कान फ़िल्म फेस्टिवल 8 मई को शुरू हुआ था और 19 मई तक चलेगा। फेस्टिवल की शुरुआत 1946 में हुई थी। पहले इसे इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के नाम से जाना जाता था, मगर 2002 में कान शहर में होने की वजह से इसका नाम कान फ़िल्म फेस्टिवल कर दिया गया। फ़िल्मी हस्तियों का ये मेला हर साल लगता है और 10 दिन तक चलता है। दुनियाभर से समारोह में डॉक्यूमेंट्री और सभी जॉनर की फ़िल्में आमंत्रित की जाती हैं और उनकी स्क्रीनिंग की जाती है। कान फ़िल्म समारोह में दिखायी जाने वाली पहली फ़िल्म चेतन आनंद की नीचा नगर है, जिसे ग्रैंड प्रिक्स अवॉर्ड मिला था। 

 

2003 में संजय लीला भंसाली की देवदास को कान फ़िल्म फेस्टिवल में प्रीमियर का मौक़ा मिला। इस समारोह में शामिल होने वाली ऐश्वर्या राय बच्चन पहली भारतीय सेलेब्रिटी बनीं। 2016 में छह भारतीय फ़िल्मों को कान फ़िल्म समारोह में शामिल होने का अवसर मिला, जिनमें बाहुबली- द बिगिनिंग और रमन राघव 2.0 शामिल थीं। 2017 में कोई भारतीय फ़िल्म कान फ़िल्म समारोह का हिस्सा नहीं बन सकी।

Posted By: Manoj Vashisth