फिल्म के ऑस्कर से बाहर होने से निराश नहीं हैं हीरामंडी फेम ताहा शाह बदुशा, कहा- 'ये हमारा मकसद...'
अभिनेता ताहा शाह बदुशा अपनी फिल्म 'पारो - द अनटोल्ड स्टोरी आफ ब्राइड स्लेवरी' के 98वें ऑस्कर की रेस से ...और पढ़ें

हीरामंडी के एक सीन में ताहा शाह (फोटो-इंस्टाग्राम)
HighLights
अपने काम से जवाब देते हैं ताहा शाह
ताहा ने जताया इंडस्ट्री पर भरोसा
आस्कर की रेस से बाहर हुई फिल्म
प्रियंका सिंह, मुंबई। अभिनेता ताहा शाह बदुशा (Taha shah Badussha) अपनी फिल्म ‘पारो - द अनटोल्ड स्टोरी आफ ब्राइड स्लेवरी’ के 98वें आस्कर की रेस से बाहर होने पर निराश नहीं हैं। उनका मानना है कि एक छोटी फिल्म का हजारों फिल्मों के बीच एलिजिबिलिटी लिस्ट तक पहुंचना ही है बड़ी जीत है।
ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर आएंगी हमारी फिल्में
भले ही पारो - द अनटोल्ड स्टोरी आफ ब्राइड स्लेवरी फिल्म 98वें आस्कर के कंटेंशन सूची से आगे नहीं बढ़ पाई हो, लेकिन इस फिल्म के अभिनेता ताहा शाह बदुशा इससे निराश नहीं हैं। वह कहते हैं कि ऐसे कदम हर फिल्ममेकर के सपनों को जीवित रखते हैं, क्योंकि जब ऐसी छोटी फिल्में आस्कर तक पहुंचती हैं, तो एक उम्मीद बंधती है। वैसे भी हमारी फिल्में ग्लोबल प्लेटफार्म पर आने की हकदार हैं, क्योंकि हमारे यहां बहुत अच्छी फिल्में बनती हैं।

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इस पर बात करते हुए एक्टर ने कहा कि मेरे लिए तो हीरामंडी : द डायमंड बाजार सीरीज भी आस्कर जैसी थी, जिसने जीवन और करियर दोनों बदल दिया था। बाकी आस्कर में नामिनेशन तक पहुंचने की जद्दोजेहद अलग होती है, बहुत पैसे और मेहनत लगानी पड़ती है। हमारी छोटी फिल्म थी, जिसे जागरूकता फैलाने के लिए बनाया गया था। हजारों फिल्मो में से यह फिल्म एलिजिबिलीट लिस्ट में पहुंचीं थी, जो बड़ी जीत है।
फिल्म ने लोगों की सोच को बदला
पारो फिल्म भारत में दुल्हन तस्करी और जबरन शादी के मुद्दे को उठाती है। ताहा कहते हैं कि मैं यह सोचकर फिल्म के साथ नहीं जुड़ा था कि यह फिल्म किसी की सोच को बदल देगी। मैं बस चाहता हूं कि जिन महिलाओं की पहचान नहीं है, उन्हें पहचान मिले, लोग उन महिलाओं की मदद की पहल करें, जिन्हें जरुरत है। आस्कर की वजह से मिली ग्लोबल पहचान किसी भी फिल्म को और बड़ा बना देती है, यही पारो के साथ भी हुआ है। पारो को देखकर जब लोगों ने कान फिल्म फेस्टिवल में तालियां बजाई थीं, तो अहसास हुआ कि मैं तो उन दिनों भी बहुत काम करता था, जब मेरा काम कोई नहीं देख रहा होता था। आप मेहनत कर रहे होते हैं, नतीजा नहीं निकलता है, तो हार मानने का भी मन करता है। फिर तालियां मिलती हैं, तो तीन-चार घंटे तक उसका असर रहता है, फिर उसी मेहनत में लग जाते हैं।
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क्यों लिया 5 साल का गैप
साल 2011 से लेकर 2026 तक का समय क्यों लग गया, खुद को साबित करने में? इस प्रश्न का उत्तर देते हुए ताहा कहते हैं कि क्योंकि मैं फिल्म इंडस्ट्री में पैदा नहीं हुआ हूं। लोगों को आपको और आपके काम को जानने में समय लगता है। इंडस्ट्री आप पर भरोसा करे। किस्मत हमारे हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में सिर्फ मेहनत करना है। मैं मेहनत करने में यकीन करता हूं, उसके बाद देखा जाएगा।
