स्मिता श्रीवास्तव।कोरोना काल की वजह से लंबे इंतजार के बाद नवोदित कलाकार अहान शेट्टी की फिल्म ‘तड़प’ इस सप्ताह सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। यह तेलुगु फिल्म ‘आर एक्स 100’ की हिंदी रीमेक है। पहली फिल्म की रिलीज से पहले बढ़ी धड़कनों के बीच सुनील शेट्टी के बेटे अहान से महबूब स्टूडियो में हुई बातचीत के अंश...

कोरोना काल की वजह से रिलीज में हुई देरी को लेकर कितनी तड़प थी?

हमें 10 महीने इंतजार करना पड़ा था। हमारा आखिरी शेड्यूल मार्च, 2020 में शूट होना था। फिल्म के लिए मैंने अपनी फिजीक बनाई थी, लेकिन (हंसते हुए) कोविड के टाइम सब बेकार हो गया था। किसी को नहीं पता था कि आगे क्या स्थिति होने वाली है। (निर्माता) साजिद नाडियाडवाला सर बेहद सपोर्टिव थे। उनके अलावा भी मेरे दोस्त, मेरी फैमिली हर कोई सपोर्ट कर रहा था। अब फिल्म रिलीज हो रही है तो मैं बहुत खुश हूं।

आपके पिता चाहते थे कि फिल्म थिएटर में ही रिलीज हो...

जी। जिसका साजिद सर और बाकी टीम ने सम्मान भी किया। वैसे मुझे थिएटर या ओटीटी से फर्क नहीं पड़ता है। ओटीटी भी बड़ा प्लेटफार्म है जिसने कई एक्टर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका दिया है। दर्शकों के लिए भी अच्छा है कि उन्हें अलग-अलग तरीके की कहानियां देखने का मौका मिलता है।

पिता की किस सीख पर अमल कर रहे हैं?

जब मैं 11 या 12 साल का था तब पापा ने एक बात समझाई थी। वह हमेशा कहते थे कि खुद की पहचान एक अच्छे इंसान के तौर पर बनाओ। मैं भी वही कोशिश कर रहा हूं। जहां तक संघर्ष की बात है तो उनका कहना है कि जरूरी नहीं कि हर शुक्रवार को फिल्म चले, लेकिन उस डर को खुद पर हावी मत होने देना। अपनी गलतियों से सीखना।

पिछले कुछ अर्से से नवोदित कलाकार विद्रोही प्रेमी की भूमिका में नजर आ रहे हैं। लांचिंग के दौरान क्या लगा था?

तेलुगु फिल्म ‘आर एक्स 100’ की कहानी काफी अलग है। इसमें मेरे किरदार के दो अलग रूप देखने को मिलेंगे। एक तरफ प्यारा सा ईशाना है, दूसरी ओर गुस्सैल ईशाना। तो मुझे लगा कि यह अलग तरह की डेब्यू फिल्म है। मूल फिल्म में काफी ट्विस्ट और टर्न भी हैं। मुझे लगा कि यह टिपिकल लवस्टोरी नहीं है। पहली फिल्म में ही खुद को चैलेंज करना था। तकनीकी तौर पर इसमें डबल रोल निभा रहा हूं। मिलन लूथरिया नामचीन निर्देशक हैं।

कई बार कलाकार कहते हैं कि वह गुस्से को दिखाने के लिए बुरी चीजों को याद करते हैं। आपने क्या तरीका अपनाया?

मैं मैथेड एक्टिंग नहीं करता हूं। अगर गुस्सा लाना है तो सिर्फ कैमरे के सामने आएगा। उसके बाद मैं टीम के पास जाकर खूब हंसी-मजाक करता हूं। जब कैमरे के सामने आता हूं तो किरदार में उतर जाता हूं। दुखी दिखने के लिए एक दिन पहले से उदास रहना नहीं शुरू करता।

एक्शन से कितना लगाव रहा है?

पापा की वजह से ‘बार्डर’, ‘मोहरा’, ‘बलवान’ जैसी कई एक्शन फिल्में देखीं और उनका फैन रहा हूं। बचपन में कराटे भी करता था। उसे भी फिल्म में शामिल करना था। इस फिल्म में मेरा बहुत ही अलग तरह का एक्शन देखने को मिलेगा। इसके लिए कोई खास प्रशिक्षण नहीं लिया, लेकिन कैमरे के एंगल से एक्शन को लेकर बहुत कुछ सीखने को मिला।

स्टार किड होने का भार है?

बिल्कुल है। पापा एक्शन हीरो रहे हैं तो वह टैगलाइन मेरे साथ भी जुड़ गई है। वह प्रेशर है मगर मेरे लिए जरूरी यह है कि उस प्रेशर को न लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकूं।

बचपन में सेट की कैसी यादें हैं?

मैं बचपन में सेट पर खूब क्रिकेट खेलता था। पापा को शूटिंग के समय ज्यादा देखता नहीं था। दरअसल, मुझे एक्टर बनने का शौक नहीं था। मुझे आर्मी ज्वाइन करनी थी। अमेरिकन स्कूल आफ बांबे में पढ़ाई के दौरान आट्र्स और ड्रामा का विकल्प था तो मैंने ड्रामा का विकल्प लिया। मैं वास्तव में इंट्रोवर्ट हूं। अपनी दुनिया में रहता हूं। ड्रामा के जरिए लगा कि इमोशन को अलग-अलग किरदारों में व्यक्त कर सकता हूं। वहां से एक्टिंग से लगाव हुआ।

फिल्म में काफी बाइक चलाई है, निजी जीवन में बाइक चलाने का कितना शौक रहा है?

फिल्म के लिए शूटिंग से पहले मुझे बाइक चलाना सीखना पड़ा था। उसके साथ फिल्म में काफी स्टंट भी हैं। जिन्हें मैंने खुद किया है। उसके लिए काफी अभ्यास किए। (हंसते हुए) हालांकि मुझे निजी तौर पर बाइक चलाने की इजाजत नहीं है। मम्मा और पापा दोनों हमेशा से बाइक चलाने को लेकर मेरे विरुद्ध रहे हैं जबकि उनकी लवस्टोरी बाइक पर साथ घूमने से ही शुरू हुई थी।

 

Edited By: Ruchi Vajpayee