प्रियंका सिंह, मुंबई। ‘विक्की डोनर’, ‘बधाई हो’, ‘अंधाधुन’ जैसी फिल्में कर चुके अभिनेता आयुष्मान खुराना इस साल फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर के 10 साल पूरे कर रहे हैं। ‘विक्की डोनर’ से शुरू हुआ उनका सफर ‘अनेक’ और ‘डाक्टर जी’ जैसी फिल्मों से जारी है। अपने फिल्मी सफर व आने वाली फिल्मों को लेकर आयुष्मान खुराना ने बातचीत की प्रियंका सिंह से...

नए साल की शुरुआत कैसी रही, खुद के लिए क्या संकल्प लिया है?

मैं अपनी फिल्म ‘एक्शन हीरो’ के लिए मार्शल आर्ट सीख रहा हूं। यही नए साल का संकल्प है।

अपने करियर के इन 10 साल को कैसे परिभाषित करेंगे?

ये 10 साल बहुत ही खूबसूरत रहे हैं। रचनात्मक फिल्ममेकर्स और लेखकों के साथ काम करने का मौका मिला है। उनके बिना यह सफर संभव नहीं हो पाता। सबसे ज्यादा शुक्रिया अपने दर्शकों का करूंगा, जो इन 10 साल में इतने परिपक्व हो चुके हैं कि अलग तरह की कहानियां अपनाने लगे हैं। यह सफर मेरे दर्शकों और मेरे आसपास के क्रिएटिव माइंड का मिलाजुला मिश्रण है। आप दुनिया के उन 100 लोगों की लिस्ट में भी शामिल किए गए हैं, जो लोगों को प्रभावित करते हैं।

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क्या जिम्मेदारियों का यह टैग मुश्किल लगता है?

बिल्कुल, यह जिम्मेदारी मुझ पर है, इसलिए मैं कोई भी फिल्म नहीं कर सकता हूं। मुझसे लोगों की एक उम्मीद जुड़ी है कि अगर मैं कोई फिल्म करूंगा तो वह अच्छा संदेश देगी। कुछ गलत, दकियानूसी और पिछड़ी हुई बात नहीं कहेगी। इन्हीं जिम्मेदारियों की वजह से स्क्रिप्ट का चयन करना मेरे लिए और भी मुश्किल हो जाता है।

तो क्या ये जिम्मेदारियां आपके काम का दायरा सीमित कर रही हैं?

बिल्कुल, मैं बचपन से हिंदी कमर्शियल सिनेमा का फैन रहा हूं। मैं वैसी फिल्में करना चाहूंगा, लेकिन फिर उन फिल्मों में लोगों को कुछ ऐसी चीज नजर नहीं आएगी, जिससे लोग सवाल उठा सकें कि समाज के लिए फलां बात गलत है। कमर्शियल फिल्मों में सिर्फ एंटरटेनमेंट होगा। ‘ड्रीम गर्ल’ के बाद आपने कमर्शियल फिल्में नहीं की हैं।

क्या इसकी वजह यह है कि रियलिस्टिक विषय वाली आपकी फिल्में कमर्शियली हिट हो रही हैं?

हां, लेकिन मैं कमर्शियल फिल्में और करना चाहूंगा। मर्शियल फिल्में थिएटर तक दर्शकों को लाने के लिए बहुत जरूरी होती हैं। फिल्में जितनी चलेंगी, इंडस्ट्री उतनी आगे बढ़ेगी। इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने में कमर्शियल फिल्मों का बहुत बड़ा हाथ होता है। आपने एक बार कहा था कि बाक्स आफिस का सोमवार, शुक्रवार से बड़ा होता है।

क्या सोमवार का दबाव अब 10 साल बाद कम हुआ है?

वह दबाव अब नहीं लेता हूं। बाक्स आफिस को दिमाग में रखकर मैं फिल्म नहीं करता हूं। फिल्मों के जरिए अच्छी कहानी कहना चाहता हूं, जिससे समाज में एक बातचीत हो, लोगों तक कहानी किसी भी तरह से पहुंच जाए। बाकी आप अपनी मेहनत और प्रतिभा से फिल्म बना सकते हैं, आगे की चीजें आपके हाथों में नहीं होती हैं। मैं चुनौतीपूर्ण कहानियां कहना चाहता हूं, जिसमें एक रिस्क हो। रिस्क लेकर ही मेरा पूरा करियर बना है। आगे भी रिस्क लेता रहूंगा।

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स्टार बन जाने के बाद फैंस के बीच पहुंचना मुश्किल हो जाता है। क्या यही वजह है कि आप इंटरनेट मीडिया पर बहुत ज्यादा एक्टिव हैं?

हां, मैं उन फैंस से अब भी जुड़ा हुआ हूं, जो मुझे तब सपोर्ट करते थे, जब ‘विक्की डोनर’ फिल्म रिलीज हुई थी। जब भी दिल्ली जाता हूं, उनसे मिलता हूं। कुछ फैंस मुंबई में हैं, उनसे मुलाकात होती रहती है। उनको अपनी नई फिल्मों की स्क्रीनिंग पर बुलाता हूं। यह बात सही है कि इन 10 साल में जो सफलता मिली है, उसकी वजह से कई और लोग भी जुड़ गए हैं। कई फैन क्लब्स को भी फालो करता हूं। उन्हें और मुझे दोनों को ही इससे प्रोत्साहन मिलता है। अपनी आगामी फिल्म ‘अनेक’ के लिए कायांतरण किया है।

‘डाक्टर जी’ फिल्म में भी आपका लुक अलग है। शारीरिक बदलाव कई बार मुश्किल हो जाते होंगे?

मुझे ये रोमांचक लगते हैं। मेरे लिए यह प्रक्रिया सहज है। मैं अपने किरदारों से बहुत जल्दी अलग भी हो जाता हूं। अपने किरदारों को कभी घर पर लेकर नहीं जाता हूं। ‘बाला’ फिल्म की शूटिंग खत्म होने के अगले दिन ही मैंने ‘गुलाबो सिताबो’ की शूटिंग शुरू कर दी थी। दोनों किरदार बहुत अलग थे। ‘बधाई हो’ और ‘अंधाधुन’ फिल्में मैंने एक साथ शूट की हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि आप किस तरह के एक्टर हैं। मैं मैथड एक्टर नहीं हूं। स्पांटेनियस एक्टर हूं। जब एक फिल्म के सेट पर जाता हूं तो उसे अपना लेता हूं। आसपास के जो कलाकार हैं उनके साथ एक्टिंग के साथ रिएक्ट ज्यादा करता हूं तो मजा आता है।

Edited By: Priti Kushwaha