नई दिल्ली, जेएनएन। कोरोना वायरस पैनडेमिक के दौरान प्रवासी मजदूरों की मदद करके अभिनेता सोनू सूद को  एक मसीहा के तौर पर देखा जाने लगा था। अलग-अलग शहरों में अटके-भटके लोगों को सोनू सूद ने अपने ख़र्च से उनके घरों तक पहुंचाया। धीरे-धीरे सोनू के चैरिटी वर्क का विस्तार होता चला गया और लोग सोशल मीडिया के ज़रिए उनसे अलग-अलग मदद मांगने लगे। किसी ने पढ़ाई के लिए मदद मांगी तो किसी ने बिज़नेस के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई। जितना बन पड़ा, सोनू ने लोगों को निराश नहीं किया। कभी-कभी ऐसी मदद भी लोग मांगने लगते हैं कि सोनू को ख़ुद हाथ खड़े करने पड़ते हैं।

ऐसे ही एक मामले में एक शख़्स ने सोनू से कहा कि वो उन्हें बिहार चुनाव के लिए भाजपा से एमएलए का टिकट दिलवा दें। युवक ने बताया कि वो भागलपुर से चुनाव जीतकर लोगों की सेवा करना चाहता है। सोनू सूद भी इस फ़ैन का मंतव्य समझ गये। उन्होंने उसी अंदाज़ में जवाब दिया- बस ट्रेन और प्लेन की टिकट के अलावा मुझे कोई टिकट दिलवाना नहीं आता मेरे भाई। 

सोनू मदद के मामले में काफ़ी आगे निकल गये हैं। बेरोज़गार हुए लोगों को काम-धंधा दिलवाने के साथ वो ज़रूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठा रहे हैं। सोनू सूद ने हाल ही में बच्चों को स्कॉलरशिप देने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है, ताकि उनकी शिक्षा में किसी तरह की कमी ना आने पाये। सोनू ने अपनी मां के नाम पर यह स्कॉलरशिप शुरू की है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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Hindustan Badhega Tabhi, Jab Padhenge Sabhi! My mother Prof.Saroj Sood always believed that everyone deserves an equal chance to a healthy happy future. So launching full scholarships for students on her name Prof.Saroj Sood scholarships today for higher education. I believe,financial challenges should not stop any one from reaching their full potential. Send in your entries at scholarships@sonusood.me (in next 10 days) and we will reach out to you.

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एक्टर ने एक ट्वीट कर बताया था- ''हमारा भविष्य हमारी काबिलियत और मेहनत तय करेगी। हम कहां से हैं, हमारी आर्थिक स्थिति का इस से कोई सम्बन्ध नहीं। मेरी एक कोशिश इस तरफ-स्कूल के बाद की पढ़ाई के लिए फुल स्कॉलरशिप...ताकि आप आगे बढ़ें और देश की तरक्की में योगदान दें। Email करें scholarships@sonusood.me''

लॉकडाउन के दौरान प्रवासियों की मदद को लेकर सानू ने कहा था- ''पिछले करीब साढ़े तीन महीने एक तरीके से मेरे लिए जीवन को बदलने वाले अनुभव रहे। माइग्रेंट्स के साथ 16 से 18 घंटे रहना और उनका दर्द बंटना। मैं जब उनको उनके घर के लिए अलविदा कहने जाता था, तब मेरा दिल खुशियों से भर जाता था। उनके चेहरे पर मुस्कान, उनकी आंखों में खुशी के आंसू, मेरी लाइफ के सबसे स्पेशल अनुभव रहे। मैं वादा करता हूं कि मैं तब तक काम करता रहूंगा, जब तक आखिरी माइग्रेंट अपने घर और प्रियजनों के पास नहीं पहुंच जाता।'' सोनू ने इसके अलावा मुंबई पुलिस को 25 हज़ार फेस शील्ड भी डोनेट की थीं।

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