नई दिल्ली, जेएनएन। हिंदी सिनेमा में वक़्त-वक़्त पर ऐसी फ़िल्में आती रही हैं, जिन्होंने अपनी कहानी और किरदारों से लम्बे अर्से तक दर्शकों का ना सिर्फ़ मनोरंजन किया, बल्कि कालजयी फ़िल्में बन गयीं। मगर इनमें कुछ फ़िल्में ऐसी हैं, जिन्हें रिलीज़ के वक़्त असफल माना गया था। 

ऐसी ही फ़िल्म है जाने भी दो यारों। 1983 में रिलीज़ हुई 'जाने भी दो यारों' एक सेटायर फि़ल्म है। सिस्टम के करप्शन पर गहरी चोट करने वाली फ़िल्म में नसीरूद्दीन शाह, रवि वासवानी, पंकज कपूर, ओम पुरी और सतीश शाह ने मुख्य किरदार निभाए।

आज ये कॉमेडी फ़िल्म कल्ट क्लासिक मानी जाती है, मगर मगर रिलीज़ के समय इसने निर्माताओं को रुला दिया था। कुंदन शाह निर्देशित ये फ़िल्म ऑल टाइम क्लासिक है और इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDB) की रेटिंग के अनुसार टॉप 100 बॉलीवुड फ़िल्मों में शामिल है। 

राजकुमार संतोषी की कॉमेडी फ़िल्म 'अंदाज़ अपना-अपना' अकेली फ़िल्म है, जिसमें आमिर ख़ान और सलमान ख़ान साथ आए थे। रिलीज़ के समय फ़िल्म फ्लॉप करार दी गयी थी, मगर IMDB की टॉप 100 फ़िल्मों में अंदाज़ अपना-अपना 12वें स्थान पर है और आज कल्ट मानी जाती है।

अमिताभ बच्चन की 'अग्निपथ' भी ऐसी ही फ़िल्म है, जो रिलीज़ के समय फ्लॉप रही, मगर बाद में इसे अमिताभ बच्चन की दमदार एक्टिंग की वजह से क्लासिक का दर्ज़ा मिला। 

शाह रुख़ ख़ान की मणि रत्नम निर्देशित दिल से... आज हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फ़िल्मों में शुमार है। मगर, रिलीज़ के वक़्त फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर सफल नहीं रही। मनीषा कोईराला ने फीमेल लीड रोल निभाया था।

शान हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्मों की लिस्ट में शामिल है, मगर एक हिट मसाला फ़िल्म के सारे तत्व होते हुए भी शान रिलीज़ के समय नहीं चली थी, जबकि निर्देशक रमेश सिप्पी ने इससे पहले शोले जैसी ब्लॉकबस्टर फ़िल्म दी थी। हालांकि दोबारा रिलीज़ होने पर फ़िल्म को अच्छी-खासी सक्सेस मिली।

1981 की फ़िल्म उमराव जान ऑल टाइम क्लासिक फ़िल्मों में शामिल है, मगर बॉक्स ऑफ़िस के हिसाब से फ़िल्म फ्लॉप रही। रेखा की ख़ूबसूरती और अदाओं ने इसे वक़्त के साथ क्लासिक बना दिया। 

शोमैन राज कपूर की फ़िल्म 'मेरा नाम जोकर' को आज हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्मों में गिना जाता है, मगर सन् सत्तर में रिलीज़ हुई ये फ़िल्म इतनी बड़ी फ्लॉप रही कि राज कपूर की माली हालत काफी ख़राब हो गई थी। इसकी सिनेमेटिक वैल्यू की वजह से फ़िल्म कल्ट-क्लासिक मानी जाती है।

15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई शोले रिलीज़ के दो हफ़्तों तक फ्लॉप रही थी। मगर, जब स्ट्रैटजी बदलकर इसे रिलीज़ किया गया तो फ़िल्म कल्ट-क्लासिक बनने के साथ ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों में भी शामिल हुई। 

1959 में आयी काग़ज़ के फूल हिंदी सिनेमा की क्लासिक फ़िल्मों में गिनी जाती है। मगर, रिलीज़ के समय यह फ़िल्म बड़ी फ्लॉप साबित हुई थी। इस फ़िल्म के ज़िक्र के बिना भारतीय सिनेमा की यात्रा पूरी नहीं होगी। उस दौर में दर्शकों द्वारा नकारी गयी इस फ़िल्म को आज कल्ट और क्लासिक माना जाता है।

Posted By: Manoj Vashisth

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