अनुप्रिया वर्मा, मुंबई. वर्ष 1991में फिल्म अकेला का वह दृश्य याद है आपको, जिसमें अमिताभ बच्चन और जैकी श्रॉफ की खलनायक के साथ मार-पीट होती है और उसी दौरान मीनाक्षी शेषाद्री सीढ़ियों से गिर जाती हैं. वह दृश्य आज भी आपके ज़हन में यहीं बात याद दिलाती होगी कि मीनाक्षी  ने किस खूबसूरती से वह सीन किया है. क्या बहादुरी दिखायी. लेकिन एक बार फिर से उस दृश्य को अगर ध्यान से देखेंगे तो शायद आप पहचान पाएं कि वह दृश्य मीनाक्षी  ने खुद नहीं, बल्कि उनकी बॉडी डबल ने किया है.

जाहिर है कि इसमें भी बड़ी बात नहीं है. फिल्मों में अभिनेता और अभिनेत्री के तो बॉडी डबल होते ही थे. लेकिन आप यह बात सुन कर हैरान हो सकते हैं कि उस बॉडी डबल, जिसने ये सीढ़ियों से गिरने वाले दृश्य निभाए थे. वह महिला तीन महीने की गर्भवती थीं. एक और सीन याद कीजिये, अमृता सिंह और विनोद खन्ना की फिल्म सीआइडी. फिल्म के एक सीन में अमृता सिंह ने पहली मंजिल से छलांग लगाई है. दरअसल, वह बॉडी डबल ने ही निभाया था. तब उनको पांच महीने की प्रेगनेंसी थी. फिर भी उस महिला को इस बात की न तो चिंता थी न फ़िक्र. वह जांबाजी से फिल्मों में स्टंट कर रही थीं. गुंडों के साथ हाथा-पाई कर रही थीं.

यहां बात हो रही है, उस जांबाज स्टंट वूमेन रेशमा पठान की, जिन्होंने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में 50 सालों का सफर पूरा किया है. पिछले दिनों उन्होंने गोलमाल रिटर्न्स में छोटा सा किरदार निभाया तो दूसरी तरफ उन्होंने स्टार प्लस के शो ये रिश्ता क्या कहलाता है में भी दादी के किरदार के लिए स्टंट किया था. हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की पहली महिला स्टंट वुमेन, जिन्हें अपने काम से इस कदर प्यार था कि गर्भवती होने के बावजूद वह आराम के बारे में नहीं सोच पायीं.

सुन कर यह बातें फिल्मी ही लगती हैं कि एक गर्भवती महिला क्या वाकई में स्टंट कर सकती हैं. सीढ़ियों से गिर सकती हैं. पानी में जाकर छुप सकती हैं. दूसरे माले से छलांग लगा सकती है. लेकिन हकीकत यही है रेशमा ने ताउम्र अपने काम को इसी तरह खुद को समर्पित किया था. हाल ही में जब अमिताभ बच्चन ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने 50 साल का सफर पूरा किया तो इसकी सोशल मीडिया पर जम कर चर्चा हुई.लेकिन लाइमलाईट से दूर रेशमा की जिंदगी में झांकने की न तो किसी ने कोशिश की, न ही इसकी दरकार नजर आयी.

वैसे भी फिल्म इंडस्ट्री में सितारा तो वहीं है, जिस पर कैमरे की नजर है. शेष फिल्म सिर्फ हीरो-हीरोइन से नहीं बनतीं, इससे कौन वास्ता रखता है. हालांकि, भला हो जी फाइव ने हाल ही में जब बिदिता नाग को लेकर द शोले गर्ल का निर्माण किया तो रेशमा पठान की थोड़ी चर्चा हुई, फिल्म को उनकी बायोपिक फिल्म माना गया है.ऐसे में रेशमा पठान, जो कि कई अभिनेत्रियों के स्टंट की तारीफों के पीछे की मुख्य कारण हैं, उन्हें थोड़ी तवज्जो मिली. नाम की तरह रेशमा की जिंदगी में कुछ भी रेशम सा नहीं रहा, बल्कि उन्होंने काफी कठिनाई से अपनी जिंदगी में मुकाम हासिल किया. हां, मगर अपने सरनेम की तरह ही पठानों वाला स्वभाव और जिद्द उनमें कूट-कूट के भरा था.

हाल ही में उन्होंने जागरण डॉट कॉम से बातचीत में अपने जीवन और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कुछ ऐसे सच शेयर किये, जो हैरान करने वाले थे. रेशमा को उस दौर में 175 रुपये प्रतिदिन की कमाई मिलती थी. एक बार शोले के एक सीन में खुश होकर धर्मेंद्र ने उन्हें 100 रुपये ईनाम दिया था. 

पीरियड्स में भी किया स्टंट, प्रेगेंसी का पता ही नहीं था

रेशमा ने अपनी बातचीत के दौरान एक अजीब बात बताई. उन्होंने बताया कि उन्होंने माहवारी के दौरान भी फिल्मों के लिए स्टंट किया. उन्होंने कभी कोई ब्रेक नहीं लिया. अपनी शारीरिक हालत के बारे में वह कहती हैं कि उन्हें एक प्रॉब्लम थी कि पीरियड हर महीने नहीं होता था. हालांकि उनकी डॉक्टर ने उन्हें कहा कि यह कोई बड़ी दिक्कत नहीं है. ऐसे में रेशमा आराम से अपनी जिंदगी में मग्न थीं. नतीजा यह हुआ कि जब उनके पीरियड अनियमित हुए और वह प्रेग्नेंट हुईं तब भी वह इस बात का अनुमान ही नहीं लगा पायीं कि वह प्रेग्नेंट हैं और तभी वह तीन महीने की प्रेग्नेंट थीं. उस वक़्त उन्होंने अकेला में सीढ़ियों से गिरने वाला सीन किया था. तब भी उन्हें इस बात का एहसास नहीं था. बाद में जब डॉक्टर के पास गयीं तो उन्हें पता चला कि प्रेग्नेंट हैं. लेकिन उन्हें उस वक़्त भी यह पता नहीं था कि उन्हें क्या नहीं करना है. डॉक्टर ने भी नहीं बताया था. उस वक़्त भी रेशमा ने शूटिंग जारी रखी. फिर पांच महीने हो गये. जब अमृता के लिए सीआईडी में काम किया. इस बार तो सेकेंड फ्लोर से छलांग लगा दी. जाकर पानी में छुपीं.

एक सीन में तो पब्लिक भागती है और रेशमा के ऊपर गिरती हैं, उस वक़्त भी वह गर्भवती ही थीं. बाद में घर आयीं तो काफी दर्द हो रहा था. बाद में जब डॉक्टर के पास गयीं तो उनकी हालत देख कर डॉक्टर डर गई थीं. डॉक्टर को लगा बच्चा नहीं बचेगा. लेकिन जब जांच हुई तो बच्चा दुरुस्त था. डॉक्टर ने कहा कि यह मिरैकल है. वरना जो हालात थे, उसमें बच्चे का बच्चा मिलना नामुमकिन था. दिलचस्प बात यह है कि बाद में रेशमा ने उन्हें जन्म दिया. बच्चा दुरुस्त पैदा हुआ. रेशमा खुद डॉक्टर बनना चाहती थी. लेकिन नहीं बन पायीं. बाद में बेटा डॉक्टर बना. इस बात की बेहद तसल्ली है उन्हें.

कोई डायट नहीं एक्सरसाइज़  नहीं

रेशमा ने बताया कि उन्होंने आजतक कभी भी फिटनेस के लिए कोई कसरत नहीं की. उनके गुरु अजीम के साथ वह इतना स्टंट करती थीं कि सब हो जाता था.

तनुश्री को इस बात के लिए सलाम करना चाहती हैं

रेशमा का कहना है कि वह तनुश्री दत्ता को इस बात के लिए सलाम करती हैं कि तनुश्री ने मी टू अभियान को आवाज़ दी. एक लंबा दशक देख चुकीं रेशमा का कहना है कि उस दौर में टॉप के हीरो हीरोइन और यहां तक कि सेट पर जितनी भी महिला होती थीं. सबका फायदा उठाने की कोशिश करते थे. वह कभी भी कमरे में बुलाते थे और यहां तक कि जिस हीरोइन के साथ उनके अच्छे संबंध होते थे, उन्हें ही अगली फिल्म में लेने की जिद्द करते थे. रेशमा को भी जब भी किसी हीरो ने गलत निगाह से देखने की कोशिश की. वह साफ़ साफ़ मना कर देती थीं और कहती थीं कि इज्जत देती हूं तो इज्जत लेलो. वहीं कई बार वह कहती हैं कि जब एक्टिंग का रोल डिमांड करती थीं तो कुछ निर्देशक या प्रोडूसर कहते थे कि तुम्हें हमारी शर्त माननी होगी. जब बुलाये आना होगा. इसलिए उन्होंने एक्टिंग के बारे में सोचना छोड़ दिया था. उन्हें ख़ुशी है तनुश्री ने आवाज उठाई है तो अब कम से कम बुरी नजर से देखना कम करेंगे फिल्म सेट पर.

हेमा की लाड़ली

रेशमा ने हेमा मालिनी के लिए शोले में काम किया था. उनके लिए फिल्म में बॉडी डबल रहीं. वह कहती हैं कि हेमा उन्हें बहुत प्यार देती थीं. जया उन्हें पसंद करती थीं. फिर रेखा, नीतू, मुमताज ने भी खूब इज्जत दी. वहीं एक अभिनेत्री, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनका नाम लिए बगैर वह कहती हैं कि उसे बिल्कुल पसंद नहीं था कि हम उनके सामने की कुर्सी पर अगर बैठ भी जायें तो. वह अभिनेत्री बुरा मान जाती थी. लेकिन रेशमा का मानना है कि आज की अभिनेत्रियाँ अधिक इज्जत देती हैं. श्रद्धा और आलिया के बारे में वह कहती हैं कि वह बहुत इज्जत देती हैं.

सुनील दत्त और नर्गिस करते थे सम्मान

सुनील दत्त के साथ रेशमा ने रेशमा और शेरा के अलावा कई फिल्मों में स्टंट वुमेन  के रूप में काम किया है. ऐसे में जब सायरा बानो के लिए वह एक फिल्म की शूटिंग के दौरान सुनील के घर पहुंचीं तो वह शॉट के बीच में धूप में खड़ी थीं. तब नर्गिस ने आकर उन्हें कहा कि घर के अंदर चलो, उन्हें यह बात अच्छी लगी थी कि इतनी बड़ी स्टार उन्हें इतना सम्मान दे रही हैं. फिर घर में उन्होंने देखा कि एक कमरे में कुरआन, चर्च और भगवान सबकी पूजा हो रही है. तो वह समझ गयीं कि उन्हें महसूस हुआ कि सुनील और नर्गिस कितने अच्छे आदमी है और हर मजहब को एक मानते थे. सुनील दत्त की खास बात थी कि अगर सेट पर किसी को खरोच भी लग जाए तो वह पैक अप करके पहले इंसान को अस्पताल ले जाते थे. उसके बाद शूटिंग करते थे.

और अमिताभ ने उन्हें पहचान लिया रेशमा

कहती हैं कि अमिताभ बच्चन हमेशा से काफी फोकस्ड होकर काम करना पसंद करते थे, लेकिन आर्टिस्ट की बहुत मदद करते थे. वह और जया उन्हें हमेशा ही सम्मान देते थे. एक बार जब दोनों किसी स्टूडियो में आस पास शूटिंग कर रहे थे. अमिताभ अपने बॉडीगार्ड के साथ थे. रेशमा दूर खड़ी थीं. लेकिन अमिताभ ने उन्हें पहचान लिया और बुलाया और हाल चाल पूछा. उन्होंने यह भी कहा कि जया आपको याद करती है. रेशमा इस बात से अभिभूत हो गई थीं कि अमिताभ ने इतना सम्मान दिया. वहीँ अमिताभ के अलावा सलमान के बारे में रेशमा कहती हैं कि वह आप कह कर नमस्ते कहता और सेट पर कभी किसी को अगर चोट भी आई तो वह उन्हें तुरंत इलाज के लिए भेजता था.

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