स्मिता श्रीवास्तव, जेएनएन। कोरोना काल में रणवीर शौरी की वेब सीरीज व फिल्में लगातार रिलीज हुई हैं। डार्क ह्यूमर कॉमेडी से लैस उनकी मर्डर मिस्ट्री आधारित वेब सीरीज 'सनफ्लॉवर’ जी5 पर रिलीज हो रही है। 'सनफ्लावर’ मुंबई के एक मध्यमवर्गीय हाउसिंग सोसाइटी की कहानी है। इस सीरीज में रणवीर शौरी पुलिस अधिकारी दिगेंद्र की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले वेब सीरीज 'रंगबाज’ और फिल्म 'लूटकेस’ में भी वह पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा चुके हैं। पेश हैं उनसे बातचीत के कुछ अंश..

सवाल : इस कठिन दौर में जिंदगी कैसी चल रही है?

जवाब : पिछले साल लॉकडाउन की प्रैक्टिस हुई थी, वही काम आ रही है।

सवाल : आपका काम लॉकडाउन में भी रिलीज हुआ। लगातार दिखते रहना कितना जरूरी है?

जवाब : दो धारी तलवार है। अगर आप ज्यादा दिखाई दें तो कहते हैं लोगों के मन से उतर भी सकते हैं। बिल्कुल न दिखाई दें तो भुलाए भी जा सकते हैं। मेरी कोशिश हमेशा यही रहती कि ओवर एक्सपोज न हूं। थोड़ा सलेक्टिव होकर काम करूं। पिछले साल मेरे छह प्रोजेक्ट रिलीज हुए। दरअसल, साल 2018-19 में मैंने जितना भी काम किया था वह संयोग से लॉकडाउन में सब रिलीज हो गया। उसकी वजह से मेरी प्रेजेंस पिछले साल कुछ ज्यादा रही। वरना मैं हेल्दी बैलेंस करने की कोशिश करता हूं।

सवाल : 'सनफ्लावर’ की शूटिंग पिछले साल लॉकडाउन खुलने के बाद हुई थी। उस माहौल में शूटिंग करने में डर नहीं लगा?

जवाब : लॉकडाउन खुलने के बाद कोविड के प्रोटोकाल को मेंटेन करते हुए हमने शूटिंग की थी। संक्रमित होने का डर तो था। उसी दौरान मैं सतोष सिवान की फिल्म 'मुंबईकर’ की शूटिंग भी कर रहा था। उसी दौरान मैं भी कोविड की चपेट में आया था। मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझमें कोरोना के ज्यादा लक्षण नहीं थे, लेकिन खौफ तो फिर भी है। कोरोना के नए वैरिएंट की कहानियां सुन रहा हूं तो डर तो लगता है पर काम तो करना ही है।

 

 

 

 

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सवाल : सनफ्लॉवर में फिर पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रहे हैं। क्या पुलिस के किरदार में काफी शेड्स होते हैं?

जवाब : जी, हम यह टेंडेंसी देखते हैं कि हमारे जो पुलिस आफिसर के किरदार होते हैं उन्हें या तो बहुत जेनेरिक पुलिस अधिकारी बना दिया जाता है। मतलब वह पुलिस में हैं और मामले की पड़ताल कर रहे हैं। या फिर उन्हें कैरीकेचरिश बना दिया जाता है। मेरी कोशिश यही होती है कि किरदार पुलिस ऑफिसर का हो, लेकिन इंसान के तौर पर अलग होना चाहिए। चाहे 'रंगबाज’ हो या 'लूटकेस’ या 'सनफ्लॉवर’ मेरा किरदार पुलिस अधिकारी का है, लेकिन उनके ह्यूमन वैल्यूज अलग हैं। उनके तौर-तरीके अलग हैं। 'खोसला का घोंसला’ के बाद 'बजाते रहो’ और 'तितली’ में भी मैंने दिल्ली के लड़के का किरदार निभाया था। हमेशा कोशिश यही होती है कि हर किरदार को अलग पहचान दे सकूं। 'सनफ्लॉवर’ की स्क्रिप्ट में वंडरलैंड जैसी क्वालिटी थी कि आप इस दुनिया में घुसते हैं और रम जाते हैं। सोसाइटी में रहने वाले अलग-अलग लोगों का मिजाज जुदा है। साथ में मर्डर मिस्ट्री है।

सवाल : डिजिटल पर मिल रहे काम से कितनी संतुष्टि है?

जवाब : डिजिटल को मैं आशीर्वाद मानता हूं। मुझे जिस तरह के रोल डिजिटल पर मिल रहे हैं वे आम हिंदी फिल्मों में कतई नहीं मिलते। खास तौर पर मेन स्ट्रीम फिल्मों में। 'एक था टाइगर’ की तीसरी किस्त में आपकी वापसी हो रही है।

सवाल : अर्से बाद किरदार में आना कितना मुश्किल होगा?

जवाब : नया कैरेक्टर बनाने में ज्यादा मेहनत लगती है। पुराने किरदार को आगे बढ़ाने में उतनी मेहनत नहीं लगती है। एक बार ढांचा बन जाता है तो आपका काफी काम हो जाता है। उसके बाद आपको वह जिंदगी जीना होता है। पुराने किरदार को जीने का अपना मजा है। फिलहाल फिल्म का काम रुका हुआ था। विनय पाठक के साथ आपकी जोड़ी काफी पसंद की जाती रही है। उनके साथ कोई

सवाल : प्रोजेक्ट कर रहे हैं?

जवाब : बिल्कुल आगे कुछ समय में आधिकारिक घोषणा होगी। हमारा साथ में प्रोजेक्ट आने वाला है।

सवाल : फिल्म 'मुंबईकर’ में आपको किस अवतार में देखेंगे?

जवाब : उसमें मैं गैंगस्टर की भूमिका में हूं। उसमें अलग ही अवतार में देखेंगे। बहुत मजेदार किरदार है। बहुत रंगीन किरदार है। फिल्म में मेरे साथ विक्रांत मैसी, विजय सेतुपति, सचिन खेड़ेकर जैसे मंझे हुए कलाकार हैं।

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