'अच्छे कलाकार बनकर भी क्या कर लोगे अगर...', बॉलीवुड में स्टारडम और टाइपकास्टिंग पर Ranvir Shorey की दो टूक
फिल्मी गलियारों में जहां 'स्टार' बनने की होड़ मची है, वहीं रणवीर शौरी की दुनिया सिर्फ और सिर्फ उनके किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। पढ़ें उनसे बातचीत के मुख्य अंश..

रणवीर शौरी ने स्टारडम को लेकर एक्टर्स पर कसा तंज? फोटो- Imdb

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रियंका सिंह, नई दिल्ली। फिल्मों और वेब सीरीज के चुनाव में अपनी अलग सोच रखने वाले बेहतरीन अभिनेता रणवीर शौरी (Ranvir Shorey) मानते हैं कि एक कलाकार की असली पहचान उसके निभाए गए पात्रों बनती है, न कि उसके 'स्टारडम' से।
जल्द ही ऋतिक रोशन (Hrithik Roshan) के प्रोडक्शन की फिल्म 'मेस' और वेब सीरीज 'द पिरामिड स्कीम' में नजर आने वाले रणवीर का कहना है कि वह सिर्फ खुद को व्यस्त रखने के लिए प्रोजेक्ट नहीं चुनते, बल्कि ऐसे किरदारों की तलाश में रहते हैं, जिनका कहानी में ठोस महत्व हो।
मैं टाइपकास्टिंग के साथ सहज हूं-रणवीर शौरी
रणवीर शौरी कहते हैं कि वह काफी सोच-समझकर और समय लेकर अपने किरदार चुनते हैं। उन्होंने कहा, "अगर मैंने कुछ भी कर लिया, तो इसका सीधा सा मतलब है कि मैं टाइपकास्टिंग के साथ सहज हूं। अगर मुझे एक ही तरह के रोल बार-बार मिल रहे हैं और मैं बस उन्हें किए जा रहा हूं, तो यह सही नहीं है।"
स्टारडम पर अपनी बेबाक राय रखते हुए उन्होंने कहा, "लोग कहते हैं कि यह सुपरस्टार है, वो स्टार है। मेरा हमेशा से यही मानना रहा है कि एक कलाकार उतना ही अच्छा है, जितना उसका पात्र है। अगर किसी कहानी में आपके किरदार का कोई महत्व ही नहीं है, तो आप अच्छे कलाकार बनकर भी क्या कर लोगे? यही कारण है कि मैं सिर्फ 'कुछ करने के लिए' काम नहीं करना चाहता।"
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'रोल की लंबाई से नहीं उसके रस से मतलब है'
रणवीर का मानना है कि जैसे-जैसे एक कलाकार अच्छा काम करता जाता है और उसे सराहना मिलती है, तो उसे और बेहतर काम करने की लत लग जाती है। इसके बाद वह अपने किरदारों में गहराई और 'रस' ढूंढने लगता है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए रणवीर कहते हैं, "मैंने कभी ऐसा कहा ही नहीं कि मुझे हमेशा मुख्य रोल ही चाहिए या रोल की लंबाई बड़ी होनी चाहिए। मैंने इन चीजों पर कभी इतना ध्यान दिया ही नहीं। मैं सिर्फ यह देखता हूं कि उस पात्र में रस कितना है।"
कई बार कलाकारों पर एक्शन, कॉमिक या रोमांटिक हीरो का 'लेबल' लग जाता है। आप पर कभी कोई ऐसा लेबल क्यों नहीं लगा?
इस पर रणवीर स्पष्टता से कहते हैं, "आप पर कोई लेबल न लगे, इसके लिए आपको उस दिशा में सचेत होकर काम करना पड़ता है। इस फिल्म इंडस्ट्री का चलन यही है कि आपको लेबल किया जाएगा। खासकर, जितना आप मुख्यधारा वाले सिनेमा की ओर बढ़ेंगे, उतना ही आप देखेंगे कि यहां सफलता को फिर से भुनाने का ही तरीका चलता है।"

वे आगे समझाते हैं, "एक चीज जो चल गई है, उसको फिर से बनाओ, ताकि फिर से सफलता मिले। कास्टिंग में भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। अगर आपका एक तरह के किरदार में सिक्का चल गया है, तो आप पर दबाव होगा और उसी तरह के रोल आपको बार-बार मिलने लगेंगे। ऐसे में आपको टाइपकास्ट होने से बचने के लिए उन्हें करने से साफ मना करना होगा।"
