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शोले के साथ 43 साल पहले सेंसर बोर्ड ने किया था ऐसा, दिल में आज भी टीस है

Publish Date:Sat, 13 Jan 2018 04:16 PM (IST) | Updated Date:Tue, 16 Jan 2018 11:39 AM (IST)
शोले के साथ 43 साल पहले सेंसर बोर्ड ने किया था ऐसा, दिल में आज भी टीस हैशोले के साथ 43 साल पहले सेंसर बोर्ड ने किया था ऐसा, दिल में आज भी टीस है
उस सीन में ठाकुर (संजीव कुमार ) गब्बर सिंह ( अमज़द खान) को कील लगे अपने जूते से कुचल कर मार देता है। 'तेरे लिए तो मेरे पैर ही काफ़ी हैं' डायलॉग आज भी इसी कारण फेमस है।

मुंबई। भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे लोकप्रिय फिल्म 'शोले' भी आज से करीब 43 साल पहले सेंसर बोर्ड के सख़्ती से बच नहीं पाई थी और न चाहते हुए भी शोले के मेकर्स को सेंसर की बात माननी पड़ी, जो बात आज भी उनके दिल में चुभती है।

साल 1975 में आई शोले की यादें फिर ताज़ा हो गई हैं, जिसे इस बार ज़िंदा किया है शोले के निर्देशक रमेश सिप्पी ने। पुणे इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित हुए रमेश सिप्पी ने इस मौके पर उस समय की सेंसरशिप को याद किया है। डॉक्टर जब्बार पटेल के साथ एक संवाद के दौरान जब आज के दौर में सेंसर की दशा और दिशा को लेकर एक सवाल किया गया तो रमेश सिप्पी ने बताया कि उन्होंने शोले का अंत अलग तरह से शूट किया था। उस सीन में ठाकुर (संजीव कुमार ) गब्बर सिंह ( अमज़द खान) को कील लगे अपने जूते से कुचल कर मार देता है। 'तेरे लिए तो मेरे पैर ही काफ़ी हैं' डायलॉग आज भी इसी कारण फेमस है। लेकिन सेंसर बोर्ड ने इस पर सख़्त ऐतराज़ किया था। सेंसर ने उसे पास किया। रमेश सिप्पी कहते हैं कि उन्हें समझ ही नहीं आया कि वो क्या करें। ठाकुर मारे भी तो कैसे? पिस्तौल या बंदूक से तो मार नहीं सकता। उसके तो हाथ ही नहीं थे। सेंसर को फिल्म में इतनी ज़्यादा हिंसा भी पसंद नहीं थी। हम पूरी तरह सेंसर के फैसले के ख़िलाफ़ थे लेकिन कर भी क्या सकते थे। अंत बदलना ही पड़ा। बता दें कि शोले , देश में लगे आपातकाल के दौरान रिलीज़ हुई थी।

इस मौके पर रमेश सिप्पी ने ये भी कहा कि फिल्मों में सेक्स और हिंसा ढूंसने से कोई फायदा नहीं होता है। ये बात फिल्म वालों को समझ लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वो इस बात से सहमत नहीं हैं जब लोग कहते हैं कि आजकल की फिल्मों कुछ कंटेंट होता ही नहीं। राजकुमार हिरानी की फिल्में देखिये, कितनी बेहतरीन बनती हैं।

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पुणे इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत शुक्रवार हुई। रणधीर, ऋषि और राजीव कपूर ने समारोह का उद्घाटन किया।

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Web Title:ramesh sippy remembers when censor board did not pass climax of sholay(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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