मुंबई। 17 मई को अपनी दौर के दिग्गज फ़िल्म डायरेक्टर प्रकाश मेहरा की पुण्यतिथि होती है। इंडियन फ़िल्म इंडस्ट्री में कुछेक डायरेक्टर जिन्होंने अपने दम से सिनेमा का कैनवास बदल डाला उनमें से प्रकाश मेहरा भी हैं। प्रकाश मेहरा सिनेमा के माध्यम से मुश्किल कहानियों को बेहद सहजता से पर्दे पर उतारने की क्षमता वाले फ़िल्मकार थे।

अमिताभ बच्चन निसंदेह आज एक महानायक हैं। लेकिन, कभी उनकी डूबती नैया को संभालने वाले प्रकाश मेहरा ही थे। जब बिग बी अमिताभ बच्चन की एक के बाद एक कई फ़िल्में फ्लॉप होती रहीं और वो भारी मन से मुंबई छोड़ने का मन बना रहे थे तब उनकी ज़िंदगी में प्रकाश मेहरा एक उम्मीद बनकर आये। प्राण के कहने पर उन्होंने अमिताभ बच्चन को यह फ़िल्म दी और उसके बाद आप सब जानते हैं यह फ़िल्म एक इतिहास बना गयी। यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर बिग बी को ज़ंजीर न मिली होतो तो उनका कैरियर आज कुछ अलग तरह का होता! बहरहाल, प्रकाश मेहरा की पुण्यतिथि पर आइये जानते हैं उनकी लाइफ से जुड़ी ये कुछ ख़ास और दिलचस्प बातें!

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उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में 13 जुलाई 1939 को जन्में प्रकाश मेहरा का बचपन पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में बीता। जहां वो अपनी चाची के साथ रहते थे! काम की बात करें तो प्रकाश मेहरा ने 21 साल की उम्र में 1950 के दशक में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर अपने काम की शुरूआत की थी। उन्होंने ‘उजाला’ (1959) और ‘प्रोफेसर’ (1962) आदि में प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर कार्य किया।

साल 1968 में जाकर उनकी मेहनत रंग लाई और 'हसीना मान जायेगी' से बतौर निर्देशक उनके कैरियर की शुरुआत हुई। साल 1968 में उन्होंने शशि कपूर की फ़िल्म ‘'हसीना मान जाएगी’ का निर्देशन किया जिसमें शशि कपूर ने दोहरी भूमिका निभाई थी। इसके बाद 1971 में उन्होंने ‘मेला’ का निर्देशन किया जिसमें फिरोज और संजय ख़ान ने मुख्य भूमिका निभाई थी। साल 1972 में आई फ़िल्म ‘समाधि’ भी सफल रही। प्रकाश मेहरा की फ़िल्मों में एक गज़ब की रवानी दिखती है जो देखने वाले को बरबस अपनी और खींच कर रखती है! संगीत भी उनके फ़िल्मों की एक बड़ी ताकत रही है। 

एंग्री यंग मैन का जन्म

साल 1973 में प्रकाश मेहरा ने ‘जंजीर’ का निर्माण और निर्देशन किया। यह भारतीय फ़िल्म इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई। ‘जंजीर’ से फ़िल्म इंडस्ट्री को अमिताभ बच्चन के रूप में एंग्री यंग मैन मिला। उसके बाद अमिताभ बच्चन और प्रकाश मेहरा की जोड़ी ने सात और फ़िल्में की, जिनमें से 'जादूगर' को छोड़कर छह फ़िल्में ‘खून पसीना’, ‘हेराफेरी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ सभी सुपर-डुपर हिट रहीं। यह फ़िल्में आज भी अमिताभ बच्चन की यादगार फ़िल्मों में शुमार हैं।

‘ज़ंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय की भूमिका को जीवंत बना देने वाले अमिताभ बच्चन इस फ़िल्म के लिए प्रकाश मेहरा की पहली पंसद नहीं थे। प्रकाश मेहरा पहले इस फ़िल्म के लिए धर्मेंद्र को लेना चाहते थे लेकिन, बात नहीं बनी।उसके बाद वह देव आनंद के पास गए और फिर राजकुमार के पास। लेकिन, किस्मत में तो ‘ज़ंजीर’ के विजय के किरदार पर अमिताभ बच्चन का नाम लिखा था।  लगातार 12 फ्लॉप देने वाले अमिताभ, प्रकाश मेहरा के निर्देशन में ऐसे छाए कि उनके समकालीन अभिनेता उनसे काफी पीछे छूट गए।

बता दें कि ‘ज़ंजीर’ की कहानी धर्मेंद्र सबसे पहले प्रकाश मेहरा के पास लेकर गए थे और वो खुद इसमें काम करना चाहते थे। लेकिन, तभी प्रकाश मेहरा ‘समाधि’ पर काम कर रहे थे तो वो कहानी धर्मेंद्र को पसंद आ गयी। उसके बाद धर्मेन्द्र ने  ‘ज़ंजीर’ की कहानी उन्हें दे दी और दोनों में यह तय हो गया कि धर्मेंद्र समाधि करेंगे और ज़ंजीर पर प्रकाश मेहरा फ़िल्म बनायेंगे!

सम्मान की बात करें तो इंडिया मोशन पिक्चर्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन ने 2006 में उन्होंने लाइफ टाइम पुरस्कार से सम्मानित किया। साल 2008 में इसी संस्था ने उन्हें एक निर्माता के रूप में लाइफ टाइम पुरस्कार से सम्मानित किया। क्या आप जानते हैं प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के उन पहले निर्देशकों में से थे जिन्होंने हॉलीवुड में भी हाथ आजमाया। लेकिन, भारी बजट के कारण उनका वह प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सका।

बहरहाल, प्रकाश मेहरा ने वर्ष 1996 में मशहूर अभिनेता राजकुमार के बेटे पुरू राजकुमार को लेकर ‘बाल ब्रह्मचारी’ फ़िल्म बनाई, लेकिन उनकी यह फ़िल्म नाकाम रही। बतौर निर्देशक यह उनकी आखिरी फ़िल्म थी। 

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रणधीर कपूर, विनोद खन्ना और हेमा मालिनी के साथ फ़िल्म ‘हाथ की सफाई’, भी उनकी चर्चित फ़िल्मों में से रही है! डायरेक्टर के अलावा एक निर्माता के रूप में भी उन्होंने ‘खून पसीना’ और ‘'दलाल’जैसी फ़िल्में बनाई। ‘दलाल’ में मिथुन चक्रबर्ती हीरो थे। 17 मई 2009 को निमोनिया और दूसरी बीमारियों के कारण मुंबई में उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन, अपनी फ़िल्मों के जरिये आज भी प्रकाश मेहरा अपने चाहने वालों के दिलों में प्रकाश फैला रहे हैं! 

By Hirendra J