अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। ओम पुरी सिर्फ़ काम के बाद पैकअप करने में विश्वास नहीं रखते थे। उन्होंने अपनी फिल्मों और अपने धारावाहिकों के सेट पर दोस्त भी बनाये। कुछ ऐसी ही दोस्ती उन्होंने एक कछुए से भी की थी। उस वक़्त वो शादीशुदा नहीं थे और बैचलर लाइफ़ जी रहे थे।

ओम पुरी के साथ माचिस, भारत एक खोज और किरदार जैसे प्रोजेक्ट्स में सह-निर्देशक और प्रमुख कॉस्टयूम डिज़ाइनर के रूप में काम कर चुके सलीम आरिफ़ बताते हैं कि ओम पुरी अपने काम को लेकर जितने सजग रहते थे, वो अपने घर के एक अहम सदस्य की भी उतनी ही चिंता करते थे और वह था उनके घर का एक कछुआ, जिसे वह कोलकाता से लेकर आये थे और अपने घर में वह अपने परिवार के सदस्य की तरह ही रखते थे। शूटिंग के ब्रेक में भी वो हमेशा उस कछुए की कहानी सुनाया करते थे और फिर काम ख़त्म करके फौरन घर भागते कि पता नहीं कछुए को दाना-पानी मिला होगा या नहीं?

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यही नहीं सलीम बताते हैं कि कोलकाता से उनका अलग ही लगाव रहा। कछुए के अलावा वह कोलकाता से एक रिक्शा लेकर भी आये थे, जो उन्होंने अपने पास हमेशा संभालकर रखा। इसके बाद वो कोलकाता से ऐसा इश्क कर बैठे, कि प्रेम भी वहीं हुआ। सलीम कहते हैं- ''मैं उन्हें भोला जाट कहकर बुलाता था। उन्हें लोग भले ही सीरियस एक्टर मानें, लेकिन उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी। कॉमेडी करेक्टराइजेशन में उनका जवाब नहीं था।

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सलीम बताते हैं कि माचिसकी शूटिंग के दौरान ओम पुरी के साथ शुरुआत में काफी असहज थे। डरे हुए थे, लेकिन ओम पुरी ने सबको बुलाकर अपने साथ बिठाना और गप्पे लड़ाना शुरू कर दिया था। ताकि वो सहज हो जायें और हुआ भी यही। बाद में सारे न्यूकमर्स चंद्रचुड़, अरशद सभी जाकर उनसे ही अपनी लाइन्स को लेकर चर्चा करते थे और इससे गुलजार साहब को बहुत सहूलियत हो गयी थी।

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सलीम आगे बताते हैं कि ओमजी हमेशा यह बात जरूर दोहराते थे कि शबाना आज़मी ने उनकी और नसीर की फोटो देखकर कहा था कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हीरो बनने की और वे बड़े मजे लेकर यह किस्सा सुनाते थे।हालांकि सलीम यह बताते हैं कि कई बार जब वो हमारे साथ कहीं बैठे होते और कोई सामने से आकर उनके चेहरे के गड्ढों को देख कर कहता था कि हां सही में गड्ढे हैं तो उन्हें बुरा लगता था।

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कम लोग जानते हैं कि गोविंद निहलानी की फ़िल्म अर्द्धसत्य में यही गड्ढे यूएसपी बने, जैसा उनका किरदार था। गोविंद निहलानी ने लाइटनिंग के ज़रिए उन गड्ढों को और उभारा था। जब उन्हें ऐसे निर्देशकों का साथ मिलने लगा तो ओम पुरी का भी कांफिडेंस बढ़ता गया।

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