मुंबई। चढ़ते सूरज को सलाम करने वाली कहावत से बॉलीवुड कभी अंजान नहीं रहा लेकिन भेड़चाल के नाम पर बॉक्स ऑफ़िस का गणित बिठाने वाले मेकर्स, शाहरुख़ और सलमान खान जैसे क्राउड-पुलर्स पर ही डोरे डालते रहे हैं। इधर समय बदला है तो खांस की जगह सिंह फेवरेट होने लगा है। बात रणवीर सिंह की है, जिनमें मेकर्स ने अपना ‘100 करोड़ी’ ढूंढ लिया है।

दरअसल, रणवीर सिंह ख़बरों के भाव में हों या बॉक्स ऑफ़िस पर कलेक्शन की तराजू में, आजकल कुछ ज़्यादा ही वजनी हो गए हैं। एक दिलचस्प बात जो ये देखने मिली है (और ट्रेड पंडितों ने भी माना है) कि शाहरुख़ और सलमान के साथ काम कर चुके निर्देशक अब रणवीर के साथ या तो फिल्म साइन कर चुके हैं या कोशिश में हैं।

असल में बात इसलिए उठी है क्योंकि बुधवार को करण जौहर ने निर्देशन में फिर से कदम रखने का ऐलान करते हुए फिल्म तख़्त की घोषणा की। अब वो भंसाली के ‘ऐतिहासिक ग्रैन्जर’ से प्रभावित हैं या एस एस राजमौली की विशालकाय कमाई यानि ‘बाहुबली’ से, जिसका वो भी हिस्सा रहे हैं, पता नहीं । करण की फिल्म तख़्त में ढेर सारे सितारे तो हैं लेकिन नज़र रणवीर सिंह पर ज़्यादा है। आठ साल के छोटे से करियर में रणवीर ने करण जौहर का प्रोडक्शन तो साइन किया (सिंबा से) लेकिन करण अपना निर्देशन दें, वो भी प्यार-प्यार छोड़ कर तख़्त-ओ-ताज के लिए, ये रणवीर जैसे सितारे के लिए जीत के सामान ही है।

संजय लीला भंसाली के साथ सलमान और शाहरुख़ खान का कनेक्शन सबको मालूम है। दबंग ने भंसाली के साथ ख़ामोशी और हम दिल दे चुके सनम (सावरिया में गेस्ट अपीयरेंस) में काम किया है तो शाहरुख़ ने देवदास में। किंग खान के साथ साहिर लुधियानवी का प्रोजेक्ट भी पाइपलाइन में रहा। रणवीर सिंह ने भंसाली खेमे में तीन बार एंट्री मारी है। गोलियों की रासलीला- रामलीला, बाजीराव मस्तानी और पद्मावत के जरिये।

शाहरुख़ खान और ख़ासकर अजय देवगन को लेकर फिल्में बनाने के लिए फेमस रोहित शेट्टी को भी जब पुलिस की वर्दी में एक नए चेहरे को देखने का मन हुआ तो उनके ‘शीशे’ में रणवीर सिंह ही नज़र आये। यही हाल सलमान खान के करीबी डायरेक्टर कबीर खान का भी है जिनकी विश्वकप क्रिकेट विजय की कहानी के लिए रणवीर सिंह ही फिट नज़र आये। एक और बड़े मेकर्स की तो बात ही और है। रणवीर सिंह को बॉलीवुड में खड़ा ही उन्होंने किया है। कभी जिस शाहरुख़ खान के जरिये यशराज फिल्मी प्यार के भवसागर में गोते लगवाता था, रणवीर ने उनके साथ पहले तीन फिल्में ( बैंड बाजा बारात, लेडीज़ वर्सेज रिक्की बहल और गुंडे) की। बाद में किल दिल में भी हीरो बनाये गए। यही नहीं जब आदित्य चोपड़ा को आठ साल बाद निर्देशन में वापसी का मन हुआ तब भी 'बेफिक्रे' के लिए उनके दिल और दिमाग ने रणवीर सिंह का ही ज़िक्र किया ।

स्वाभाविक है, एनर्जी का भंडार कहे जाने वाले रणवीर सिंह को बड़े मेकर्स इसलिए भी पसंद कर रहे हैं क्योंकि वो उनके लिए कैश-रजिस्टर से कम नहीं। तगड़ी ओपनिंग और दो से तीन सौ करोड़ की गारंटी के लिए फिलहाल ये नाम उपयुक्त है। वैसे भी फिल्मी दुनिया में दिन जिसका हो, रात भी उसी की होती है।

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By Manoj Khadilkar