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मुंबई। ‘आर पार’, देवदास, सुजाता और बंदिनी जैसी महान फिल्मों को लिखने वाले नबेंदु घोष की इस साल जन्मशताब्दी चल रही है। हाल ही में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्पलॉइज और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन ने उनकी याद में एक समारोह का आयोजन किया जहां नबेंदु घोष से जुड़ी यादों को तारोताज़ा किया गया।

इस दौरान क्लासिकल फिल्म दो बीघा जमीन, सुजाता,बंदिनी ,देवदास, अभिमान,तीसरी कसम ,माँ, परख आदि की स्क्रिप्ट पर चर्चा हुई। नबेंदु घोष के बेटे शुभांकर घोष ने इस अवसर पर बताया कि राजकपूर और तीसरी कसम फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर इसके अंत से खुश नहीं थे, जिसके बाद नबेंदु घोष को कहा गया कि इस एन्ड बदलना पड़ेगा, मगर नबेंदु घोष अपनी जिद पर अड़े रहे और उन्होंने शर्त रख दिया कि अगर एंड बदलना हो तो फिल्म का टाइटल तीसरी कसम भी बदलना होगा। फिल्म बिना बदलाव के प्रदर्शित हुई और एक यादगार बनी। आज ऐसी स्वतंत्रता लेखकों को कम मिलती है।

फेडरेशन के प्रेसिडेंट बी.एन. तिवारी ने बताया कि नबेंदु घोष की क्लासिकल फिल्म बंदिनी में भी बदलाव की बात थी और अभिनेत्री निर्माता चाहते थे कि नूतन, धर्मेंद्र की लवर बने और अंत में उन्हीं के साथ रहें लेकिन नबेंदु घोष ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया।

इस अवसर पर नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनएफडीसी) के एम.के.व्यास ने बताया कि नबेंदु घोष की फिल्म माँ के प्रिंट काफी सहेज कर रखी गयी है। इस दौरान शकील वारसी ने बताया कि किस तरह तीसरी कसम का गाना शैलेन्द्र जी ने राजकपूर जी के डर से बाथरूम में छिपकर लिखा था। शैलेन्द्र इस फिल्म के निर्माता और गीतकार दोनो थे। शैलेन्द्र ने शूटिंग शुरू करा दी लेकिन इस फिल्म के गाने कंप्लीट नही थे।ये बात राजकपूर जी को पता चली तो वे गुस्से में शैलेन्द्र जी के घर आ गये। शैलेन्द्र जी को पता चला कि राजकपूर साहब गुस्से में आये हैं तो वे बाथरूम में छिप गए और वहां तुरंत उनके दिमाग मे ये गीत आया। बाहर निकलकर शैलेन्द्र जी राजकपूर जी के सामने गए तो राजकपूर साहब ने पूछा इस फिल्म का गीत अब तक क्यों नहीं लिखा गया और शैलेन्द्र जी ने कहा कि गीत लिख दिया हूँ ।ये गीत ‘सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है... आज भी सदाबहार है।

अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने भेजे अपने वीडियो संदेश में कहा कि दादा के साथ हमने दो अंजाने में काम किया। वे एक ही स्कूल थे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और गायक शान तथा गायिका पामेला जैन ने क्लासिकल फिल्मो के गीत तेरी बिंदिया रे और मुसाफिर हूँ यारों एवं अभिक देव ने एसडी बर्मन के गाये गाने ओ मांझी रे गाकर पूरी तरह शमां बांध दिया।

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Posted By: Manoj Khadilkar

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