जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। सांवली-काली त्वचा को गोरा बनाने और गोरे लोगों की तुलना में काली रंगत वालों को दोयम दर्जे का समझने की भारतीयों की मानसिकता को ध्यान में रखकर शुरू किया गया एक अभियान अब अंतरराट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। डार्क इज ब्यूटीफुल यानी श्याम रंग सुंदर है नामक अभियान 2009 में शुरू हुआ था, लेकिन उसे हाल में प्रचार और गति तब मिली जब अभिनेत्री नंदिता दास उससे जुड़ीं।

इस अभियान के तहत वर्कशाप और सेमिनार आयोजित करने के साथ इंटरनेट और मीडिया के जरिये लोगों को जागरूक कर उन कंपनियों के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है जो सांवली-काली त्वचा को गोरा बनाने के उत्पाद बनाती हैं। अभिनेता शाहरुख खान इस अभियान के निशाने पर खास तौर से हैं, क्योंकि वह गोरा बनाने वाली एक क्रीम का विापन कर रहे हैं। अब तक 13 हजार से अधिक लोग इस अभियान की ऑनलाइन याचिका को अपना समर्थन दे चुके हैं।

इस अभियान ने अंतरराट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा है। पिछले कुछ दिनों में यूरोप-अमेरिका के टीवी चैनलों और मुख्यधारा के तमाम बड़े समाचार पत्रों ने इस अभियान का जिक्र करते हुए उसकी तारीफ की है। साथ ही इस पर हैरत जताई है कि भारतीय लोग गोरी त्वचा के इतने दीवाने क्यों हैं? डार्क इज ब्यूटीफुल टीम के अनुसार भारत में त्वचा को गोरी रंगत प्रदान करने का दावा करने वाले किस्म-किस्म के उत्पादों का बाजार चार सौ मिलियन डॅालर सालाना पार कर गया है। पिछले वर्ष भारतीयों ने अपनी त्वचा को गोरा बनाने के लिए 233 टन क्रीम और कुछ अन्य उत्पादों का इस्तेमाल किया।

नंदिता दास के अनुसार भारत में सांवली त्वचा वालों को कमतर समझने की मानसिकता बहुत गहरी है। इसके कई ऐतिहासिक, धार्मिक कारण हैं, लेकिन विज्ञापन और फिल्मों का भी योगदान कम नहीं है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

Bigg Boss

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस