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बॉक्स ऑफिस का मायाजाल, प्रमोशन का बदला गणित, ट्रेंड में फिल्मों की सफलता का नया फंडा

By Smita SrivastavaEdited By: Ashish Rajendra
Published: Thu, 19 Feb 2026 07:01 PM (IST)

बदलते समय के साथ-साथ अब फिल्मों के प्रमोशन और बॉक्स ऑफिस सफलता के मापदंड भी पूरी तरह से बदल गए ...और पढ़ें

बदल गया फिल्मों का तरीका (फोटो क्रेडिट- फेसबुक)

बदल गया फिल्मों का तरीका (फोटो क्रेडिट- फेसबुक)

HighLights

  1. बॉक्स ऑफिस के नंबर्स का बदला गणित

  2. बदल गया फिल्मों की प्रमोशन का पूरा तरीका

  3. सिनेमा पर पड़ रहा है ओटीटी का प्रभाव

एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई। फिल्मों की सफलता अब केवल उनके कंटेंट या शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलते मीडिया परिदृश्‍य, डिजिटल प्‍लेटफार्म के विस्तार और दर्शकों की बदलती आदतों ने फिल्म प्रचार की रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है।

पहले फिल्मों का प्रचार मुख्य रूप से रिलीज से पहले होता था और रिलीज के बाद प्रचार लगभग समाप्‍त मान लिया जाता था। अब फिल्म रिलीज होने के बाद भी उसका प्रचार जारी रहता है। इसके कारणों की पड़ताल करती थीम स्‍टोरी:

मर्दानी 3 की प्लानिंग

बीते दिनों रिलीज हुई फिल्म मर्दानी 3 में खलनायिका का किरदार निभाने वाली मल्लिका प्रसाद ने एक दिलचस्प तथ्य साझा किया था। उन्होंने बताया कि यशराज फिल्म्स (YRF) और फिल्म के निर्माताओं ने जानबूझकर प्री-रिलीज के दौरान उनके ‘अम्मा’ वाले लुक को छिपाकर रखा, ताकि रिलीज के समय दर्शकों को शाक वैल्‍यू (चौंकाने वाला प्रभाव) मिल सके।

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फ्रेंचाइज की पहली महिला विलेन के रूप में दर्शक उन्हें सीधे बड़े पर्दे पर देखें, यही इस रणनीति का उद्देश्य था। यानी फिल्म प्रमोशन में रहस्य और ‘शॉक वैल्यू’ को भी एक प्रभावी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। दरअसल, बड़े बैनर और बड़े बजट की फिल्मों में पिछले कुछ वर्षों से यह प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है कि फिल्म रिलीज के बाद भी स्टार कास्ट और निर्माता उसके प्रचार में सक्रिय रहते हैं।

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ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन के अनुसार इसे मार्केटिंग का विस्तारित रूप कहा जा सकता है। पहले फिल्म गुरुवार तक प्रमोट होती थी और शुक्रवार को रिलीज के साथ ही उसका प्रचार लगभग समाप्त हो जाता था। लेकिन आज दर्शक मनोरंजन के अनगिनत विकल्पों से घिरे हुए हैं जैसे थिएटर, ओटीटी, टीवी, सोशल मीडिया और विभिन्न भाषाओं की फिल्में जिसके कारण उनकी याददाश्त और ध्यान का दायरा सीमित हो गया है। पहले अगर किसी फिल्म की रिलीज डेट 15 दिन या एक महीने पहले बता दी जाती थी, तो लोगों को वह याद रहती थी। अब इतनी फिल्में लगातार रिलीज हो रही हैं कि दर्शकों को तारीखें याद रखने में कठिनाई होती है।

ओटीटी प्लेटफार्म के आगमन के बाद फिल्मों का अधिकतम बिजनेस एक- दो सप्ताह में ही हो जाता है इसलिए लगातार प्रचार करना जरूरी हो गया है। आगे वह कहते हैं कि इस निरंतर प्रचार का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए फिल्म की चर्चा उन दर्शकों तक भी पहुंच जाती है, जिन्होंने फिल्म अभी तक नहीं देखी होती। वे सकारात्मक प्रतिक्रियाओं और चर्चाओं से प्रभावित होकर फिल्म देखने की योजना बना लेते हैं। यही ‘वर्ड आफ माउथ’ और डिजिटल चर्चा मिलकर फिल्म के बाक्स आफिस प्रदर्शन को मजबूती देते हैं।

सफलता का जश्न मनाना जरूरी

फिल्म बार्डर 2 का उदाहरण भी इस बदलते ट्रेंड को स्पष्ट करता है। रिलीज से पहले फिल्म को ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा और प्रमोशन के दौरान कलाकारों ने मीडिया इंटरव्यू से दूरी बनाए रखी। हालांकि फिल्म की टीम ने अलग-अलग आयोजनों के जरिए प्रचार जारी रखा। जब फिल्म 500 करोड़ क्लब के करीब पहुंची,तब मुंबई में निर्माता भूषण कुमार और निधि दत्ता के साथ सनी देओल, अहान शेट्टी, वरुण धवन और फिल्म की अन्य अभिनेत्रियां प्रेस कांफ्रेंस में शामिल हुईं।

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निधि दत्ता मानती हैं कि डिजिटल दौर में ट्रोलिंग अब बड़ी फिल्मों के साथ सामान्य बात हो गई है। निधि के अनुसार, ‘आजकल हर बड़ी फिल्म ट्रोलिंग का सामना करती है। हमारा ध्यान हमेशा गुणवत्ता और प्रामाणिकता पर रहा। जब आप अपने विजन को लेकर आश्वस्त हों और सम्मान के साथ काम करें, तो बाहरी शोर मायने नहीं रखता। अंततः सिनेमाघर में दर्शकों की प्रतिक्रिया ही असली सच्चाई होती है।’

वे आगे कहती हैं कि बाक्स आफिस के आंकड़े दर्शकों की स्वीकार्यता को दर्शाते हैं, इसलिए दर्शकों और मीडिया के साथ सफलता का जश्न मनाना जरूरी होता है। इससे फिल्म के प्रति सकारात्मक माहौल और चर्चा बनी रहती है और जो दर्शक फिल्म देख चुके हैं, उनके अनुभव को और व्यापक बनाया जा सकता है।

लगातार याद दिलाना पड़ता है

वहीं फिल्म वितरण और मार्केटिंग से जुड़े समीर दीक्षित का मानना है कि आज फिल्म अगर एक सप्ताह थिएटर में चल जाती है, तब भी दर्शकों को लगातार याद दिलाना पड़ता है कि वह अभी सिनेमाघरों में लगी है। वे बताते हैं कि हाल ही में उन्होंने फिल्म मयसभा का वितरण करते हुए रिलीज के दो सप्ताह बाद तक टीवी प्रोमो और अखबारों में प्रचार जारी रखा। पहले फिल्म रिलीज के 15 दिन पहले तक ही प्रचार होता था और रिलीज के साथ खत्म हो जाता था, लेकिन अब रिलीज से पहले और बाद दोनों समय प्रचार चलता है।

दरअसल, आज दर्शक कई बार फिल्म देखने का निर्णय तुरंत लेते हैं। वे ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म खोलकर देखते हैं कि कौन-सी फिल्म ट्रेंड में है और उसी आधार पर टिकट बुक कर लेते हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि फिल्म की मौजूदगी इंटरनेट, टीवी, रेडियो और आउटडोर प्रचार में हर माध्यम पर बनी रहे । दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखना अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

कभी उल्टा भी पड़ जाता है रिलीज के बाद का प्रमोशन

हालांकि फिल्म प्रचार के कुछ तरीके विवादास्पद भी माने जाते हैं, जैसे रिलीज के तीन या चार दिन बाद ‘एक पर एक मुफ्त’ टिकट आफर या टिकट के दामों में कटौती। समीर दीक्षित का कहना है कि ऐसे ऑफर कई बार यह संकेत भी देते हैं कि फिल्म की एडवांस बुकिंग कमजोर है या निर्माता को अपने प्रोडक्ट पर पूरा भरोसा नहीं है। शुरुआती दिनों में ऐसे ऑफर दर्शकों के बीच नकारात्मक संदेश भी भेज सकते हैं।

स्पष्ट है कि लगातार संवाद, मीडिया उपस्थिति और डिजिटल चर्चा न केवल फिल्म की लोकप्रियता बनाए रखते हैं, बल्कि बाक्स आफिस पर उसकी लंबी दौड़ सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत होने की संभावना है, क्योंकि दर्शकों का ध्यान आकर्षित करना और बनाए रखना आज फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।

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