मो. रफी ने गाया जन्माष्टमी का सुपरहिट भजन, राग हमीर से सजा कल्ट गीत; 66 साल से अमर है 'मुस्लिम संगीतकारों' का गाना
मोहम्मद रफी का गाया कृष्ण भजन 66 साल बाद भी जन्माष्टमी पर खूब बजता है। शास्त्रीय संगीत से सजा यह गीत मुस्लिम संगीतकारों ने मिलकर अमर बनाया था।

66 साल से हर जन्माष्टमी पर बजता है ये क्लासिकल गीत/ फोटो- Youtube
HighLights
कृष्ण भजन को फ्री में गाने के लिए तैयार थे रफी साहब
66 सालों से कान्हा की भक्ति में लीन कर देता है गीत
दिलीप कुमार ने रियल में बजाया था गाने में सितार
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जन्माष्टमी की तैयारियां शुरु हो चुकी हैं। 4 सितंबर को देशभर में धूमधाम से कृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। बॉलीवुड में भी कान्हा की भक्ति पर वैसे तो कई गाने बने हुए हैं, लेकिन राग हमीर से सजा मोहम्मद रफी की आवाज में एक भजन पिछले छह दशक से लोगों के मन में बसा हुआ है।
जब भी राधा-कृष्ण के प्रेम का जिक्र होता है, तो शास्त्रीय संगीत से सजा भजन कृष्ण भक्तो को मंत्रमुग्ध कर देता है। कौन सा है कृष्ण कनहैया का वो गीत, जिसे मुस्लिम संगीतकारो ने किया अमर, पढ़ें उससे जुड़ा दिलचस्प किस्सा।
मोहम्मद रफी की जादुई आवाज ने बनाया भजन को कालजयी
जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर जिस गाने से जुड़ा किस्सा हम आपको बता रहे हैं, वह साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म 'कोहिनूर' का है, जिसमें दिलीप कुमार ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म का श्रीकृष्ण भजन 'मधुबन में राधिका नाचे रे' उस समय बहुत ही लोकप्रिय हुआ था। आज भी यह क्लासिकल म्यूजिक का सबसे अच्छा उदाहरण माना जाता है।
दिलीप कुमार और कुमकुम पर फिल्माया गया ये भजन राग हमीर पर आधारित है। कृष्ण भक्ति पर बने इस गीत की सबसे बड़ी खासियत यै है कि दिलीप कुमार ने 'मधुबन में राधिका नाचे रे' के लिए सितार बजाने की सिर्फ एक्टिंग नहीं की थी, बल्कि उन्होंने कई महीनों तक उस्ताद हलीम जाफर खान से सितार सीखा था।
-1788432016422.webp)
मुस्लिम संगीतकारों ने मिलकर बनाया कृष्ण भजन को यादगार
इस भजन को बनाने के पीछे मेकर्स की काफी मेहनत लगी थी। यह बात शायद ही आपको पता होगी की राधा और कृष्ण के प्रेम को दर्शाते गीत को गाने से लेकर इसका म्यूजिक और लिरिक्स मुस्लिम संगीतकारों ने मिलकर तैयार किया था। गाने के लिरिक्स जहां शकील बदायुनी ने लिखे थे, तो वहीं इसका म्यूजिक नौशाद अली ने तैयार किया था और इस जादुई गीत को हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी ने गाया था।
मोहम्मद रफी फ्री में गाने को थे तैयार
जब कोहीनूर आई तो उस समय तक रोमांटिक गानों का दौर काफी चरम पर था। ऐसा कहा जाता है कि जब नौशाद अली यह शास्त्रीय संगीत धुन बना रहे थे, तो फिल्म के निर्माता वी.एन.सिंह को यह डर था कि शायद अलापों और सरगम से भरपूर इस गीत को ऑडियंस नहीं समझ पाएगी।
Video Credit- HD Songs Bollywood Youtube
हालांकि, उनके इस डर को समझते हुए मोहम्मद रफी ने उन्हें यह सुनिश्चित किया कि जब तक 'मधुबन में राधिका नाचे रे' हिट नहीं होगा, तब तक वह इसके लिए एक पैसा नहीं लेंगे। गाना जैसे ही रिलीज हुआ तो हर किसी की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि मोहम्मद रफी की गायिकी से उस्ताद बड़े गुलाम इतने खुश हुए कि वह उनकी तारीफ करते हुए नहीं थके थे।
