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'दर्दभरा' था Meena Kumari का आखिरी गीत, 54 साल भी लता मंगेशकर की आवाज में अमर है टाइमलेस सॉन्ग

Published: Sat, 12 Sep 2026 03:49 PM (IST)

Meena Kumari के 54 साल पुराने दर्दभरे और आखिरी गाने को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपने सुरों से सजाया था।

54 साल बाद भी कल्ट बना हुआ है गीत

54 साल बाद भी कल्ट बना हुआ है गीत

HighLights

  1. 54 साल बाद भी कल्ट बना हुआ है गीत

  2. लता मंगेशकर ने दी थी आइकॉनिक गाने को आवाज

  3. दर्दभरा था मीना कुमारी का आखिरी सॉन्ग

एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेसेस में से एक मीना कुमारी ने एक से बढ़कर एक फिल्मों में बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है वहीं उन पर फिल्माए गाने आज भी सदाबहार हैं। जो उनकी खास अदाकारी और एक्सप्रेशन के लिए जाने जाते हैं।

मीना कुमारी (Meena Kumari) को इंडियन सिनेमा की 'ट्रेजडी क्वीन' कहा जाता है क्योंकि उन्होंने फिल्मों में ज्यादातर दर्दभरे, त्याग और उदासी भरे कई किरदार निभाए। इसके साथ ही उनकी असल जिंदगी में काफी संघर्ष था, इसीलिए उनका ये नाम पड़ा।

दर्दभरा था आखिरी गाना

मीना कुमारी का आखिरी गाना भी कुछ ऐसा ही था। एक्ट्रेस की आखिरी फिल्म थी पाकिजा (Pakeezah) जो 1972 में रिलीज हुई थी और इसका गाना चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था (Chalte Chalte Yun Hi Koi) भी उनके आखिरी गानों में से एक था।

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खराब तबीयत में शूट किया गीत

इस दर्दभरे गाने में मीना कुमारी ने शानदार परफॉर्मेंस दी थी। हालांकि कहा जाता है उस वक्त मीना कुमारी की तबीयत थोड़ी नासाज थी लेकिन फिर भी उन्होंने फिल्म नहीं छोड़ी और खराब तबीयत में भी इस गाने पर परफॉर्मेंस दी।

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निजी जिंदगी में किया संघर्ष

जिस तरह मीना कुमारी पर्दे पर उदासी भरे किरदार निभाने के लिए जानी जाती थीं उसी तरह उनकी निजी जिंदगी भी थी। बचपन में आर्थित संकट झेला, चार साल की उम्र में काम शुरू किया। फिल्मों में सफलता मिली लेकिन शादी के बाद घरेलू कलह और पाबंदियों के चलते वे अपने पति कमाल अमरोही से अलग हो गईं।

 

असफल शादी और अकेलेपन ने उन्हें उदासी की ओर ढकेल दिया और फिर उन्हें शराब की लत लग गई। जिसके चलते मीना कुमारी की तबीयत खराब हो गई और लिवर सिरोसिस के चलते सिर्फ 38 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी आखिरी फिल्म पाकीजा फरवरी 1972 में रिलीज हुई थी और उनका निधन फिल्म की रिलीज के कुछ हफ्तों बाद ही मार्च 1972 में हो गया।

मीना कुमारी के इस आखिरी गाने को स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) ने अपने सुरों से सजाया था। इसका संगीत गुलाम मोहम्मद ने दिया था और इसके लिरिक्स मशहूर शायर कैफी आजमी ने लिखे थे।

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