18वीं सदी की 'कविता' पर बना था Madhuri Dixit का पुराना गाना, Kavita Krishnamurthy ने गाया था कल्ट गीत
अभिनेत्री माधुरी दीक्षित का एक कल्ट गाना ऐसा भी, जो 18वीं सदी की एक कविता से प्रेरित रहा है।

माधुरी दीक्षित का गीत (फोटो क्रेडिट- स्क्रीन शॉट)
HighLights
31 साल पहले रिलीज हुआ था गाना
माधुरी दीक्षित का कल्ट डांसिंग सॉन्ग
कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में है अमर
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। माधुरी दीक्षित हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने एक्टिंग करियर के दौरान न सिर्फ शानदार फिल्में दी हैं, बल्कि उनमें मौजूद यादगार गीत भी फैंस के फेवरेट रहे हैं। खासतौर पर डांसिंग सॉन्ग के मामले में माधुरी का कोई मुकाबला नहीं रहा है।
माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) का ऐसा ही एक गीत 31 साल पहले रिलीज किया गया था, जो 18वीं सदी के एक लोकप्रियता कविता से प्रेरित रहा था। आइए जानते हैं कि यहां कौन से गाने के बारे में बात की जा रही है।
18वीं सदी की कविता से प्रेरित था माधुरी दीक्षित का गाना
एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित को 90 के दशक की लेडी सुपरस्टार के तौर पर जाना जाता है। उस दौर में माधुरी कई कल्ट गानों का भी हिस्सा रहीं, जिनमें से एक गीत साल 1995 में रिलीज होने वाली याराना (Yarana) से नाता रखता है। माधुरी दीक्षित, ऋषि कपूर और राज बब्बर स्टारर याराना फिल्म से अधिक लोकप्रिय उसका एक गीत रहा था, जिसके बोले थे- मेरा पिया घर आया... (Mera Piya Ghar Aaya)।
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दरअसल माधुरी दीक्षित का मेरा पिया घर आया ओ राम जी... डांसिंग सॉन्ग 18वीं सदी के मशहूर कवि और संत बाबा बुल्ले शाह की कलम से निकली कविता 'मेरा पिया घर आया' से निकली थी। बुल्ले शाह की रचना से प्रेरित होकर माधुरी का ये कल्ट गीतकर बनकर तैयार हुआ था।
आज भी इसे एक डांसिंग और पार्टी एंथम सॉन्ग के तौर पर खूब सुना जाता है। फिल्म याराना के मेरा पिया घर आया... गाने को अपने दौर की मशहूर गायिका कविता कृष्णमूर्ति (Kavita Krishnamurthy) ने मधुर आवाज में गाया था। ये कविता की मीठी आवाज का ही कमाल है कि आज भी श्रोता उनके इस गीत को सुनना पसंद करते हैं।
नुसरत साहब ने दिया था कव्वाली का रूप
बाबा बुल्ले शाह की मेरा पिया घर आया रचना को पाकिस्तान के महान गायक और शहंशाह-ए-कव्वाली नुसरत फतेह अली खान ने सबसे पहले कव्वाली के रूप में गाया था, जिसकी वजह से बुल्ले शाह की ये कविता संगीत की दुनिया में हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गई। 1991 में नुसरत साहब ने अपनी म्यूजिक एल्बम 'द डे, द नाईट, द डॉन, द डस्क' (The Day, the Night, the Dawn, the Dusk) के दौरान इसे रिकॉर्ड किया था।
