अमित कर्ण, मुंबई। अपनी फिल्मों से चार दशक तक लोगों का मनोरंजन व उन्हें प्रेरित करने वाले सदाबहार नायक शशि कपूर को छठे जागरण फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा जाएगा।

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शशि कपूर ने लगभग 200 फिल्मों में काम किया। उनमें 'प्यार किए जा' (1966), 'हसीना मान जाएगी' (1968), 'प्यार का मौसम', 'कन्यादान' (1969), 'अभिनेत्री' (1970), 'शर्मीली' (1971), 'वचन', 'चोर मचाए शोर' (1974), 'फकीरा' (1978), 'हीरा लाल पन्ना लाल' (1978), 'सत्यम शिवम सुंदरम' और 'फर्ज की जंग' (1989) प्रमुख हैं। नौवें दशक में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण शशि कपूर ने फिल्मों में काम करना लगभग बंद कर दिया।

वे गिनती के ऐसे कलाकारों में से एक हैं, जिन्होंने कमर्शियल व आर्ट फिल्मों में तो संतुलन साधा ही, इंटरनैशनल सिनेमा में खासे सक्रिय नाम रहे। 'मेरे पास मां है' संवाद को उन्होंने अमर बना दिया। उन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पृथ्वी थिएटर को पुनर्जीवित किया। वह आज भी देश की शान है।

शशि कपूर ने अपना प्रॉडक्शन हाउस फिल्मवालाज भी स्थापित किया। उसके तहत 1978 की 'जुनून', 1981 की 'कलयुग' और '36 चौरंगी लेन' उल्लेखनीय हैं। उसके बाद 'विजेता' और 'उत्सव' ने तो उन्हें माहिर प्रड्यूसर तक साबित कर दिया। 'कलयुग' के बाद उन्होंने कैरेक्टर रोल भी निभाने शुरु कर दिए। 1984 की फिल्म 'मुहाफिज' में उन्होंने शायर की कमाल की भूमिका निभाई।

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उनके अलावा फेस्टिवल में मेकअप के पुरोधा पंधारी जुकर को सिनेमा में अद्वितीय योगदान के लिए नवाजा जाएगा। वे इंडस्ट्री में बीते पांच-छह दशकों से सक्रिय हैं। वे अमिताभ बच्चन से लेकर अभिषेक बच्चन व शर्मिला टैगोर से लेकर सोहा अली खान व सैफ अली खान तक को अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपने अनुभव के चलते सितारा बिरादरी उन्हें पंधारी दादा के नाम से पुकारती है।

इतना ही नहीं, छठे जागण फिल्म फेस्टिवल के जलसे को लकदक बनाने के लिए फिल्म बिरादरी की अधिकांश नामचीन हस्तियां समापन व पुरस्कार समारोह में मौजूद रहेंगी। फेस्टिवल के इस संस्करण की क्लोजिंग फिल्म 'रजवाड़े एंड संस' है। इसी के साथ दुनिया का सबसे बड़े घुमंतू फेस्टिवल इस साल का सफर पूरा करेगा।

इस बार इस फेस्टिवल ने 16 शहरों व 10 राज्यों में यात्रा की। सुदूर इलाकों के लोगों को न केवल सैकड़ों अच्छी फिल्में दिखाई गईं, बल्कि सिनेमा के माध्यम से विभिन्न देशों की संस्कृति का झरोखा दर्शन कराया। सिने पुरोधाओं ने अपने अनुभवों से फिल्मों में करियर बनाने वालों का ज्ञानवर्धन भी किया।

सुधीर मिश्रा, तिग्मांशु धूलिया, राजकुमार हिरानी, इम्तियाज अली, कबीर खान, आर.बाल्की, सौरभ शुक्ला, आनंद एल राय ने फेस्टिवल को खुले दिल से सपोर्ट किया। उनमें से ज्यादातर ने फेस्टिवल के साथ सफर भी किया।

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Posted By: Monika Sharma

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