Lata Mangeshkar का 58 साल पुराना गाना जिसकी वजह से 'आत्महत्या' करने से बचे कई लोग, मिला नया जीवन
लता मंगेशकर की जादुई आवाज के गाने शायद ही ऐसे हैं जिसे कोई पसंद नहीं करता होगा। आज हम बात ...और पढ़ें

लता मंगेशकर के पॉपुलर गाने (फोटो-इंस्टाग्राम)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की आवाज में वो जादू था कि सुनते ही गाना सीधे दिल में उतर जाता है। उनके गाने केवल शब्द और धुन नहीं, बल्कि गहरी भावनाओं का संगम हैं जो सीधे सुनने वाले की रूह को छू लेते हैं। वहीं बॉलीवुड में कई ऐसी फिल्में हैं जो कहानी से ज्यादा अपने गानों को लेकर चर्चा में रहीं।
हर भाव को बारीकी से पिरोया
कोई सैड सॉन्ग सुनने का शौकीन है तो किसी को रोमांटिक गानें ज्यादा पसंद होते हैं। सुरों पर लता मंगेशकर की ऐसी पकड़ थी कि वे हर शब्द के भाव को इतनी बारीकी से पिरोती थीं कि हर इंसान उन्हें अपनी कहानी महसूस करने लगता है।

यह भी पढ़ें- जीनत अमान नहीं, Lata Mangeshkar को राज कपूर बनाना चाहते थे 'रूपा', इस कमेंट से चिढ़ गई थीं 'सुर सम्राज्ञी'
लोग इन गानों में खुद की कहानी ढूंढने लगते हैं। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि कोई गाना कभी किसी को सुसाइड करने से बचा पाएगा? ऐसा एक गाना आया था 58 साल पहले जिसने कई लोगों को आत्महत्या करने से रोका। यह गाना उन लोगों के लिए था, जो प्यार में टूटे हुए एक आस लेकर बैठे हुए थे।
नूतन थीं फिल्म में लीड एक्ट्रेस
हम बात कर रहे हैं 1968 में आई फिल्म सरस्वती चंद की जिसमें नूतन और मनीष ने लीड रोल प्ले किया था। मनीष ने फिल्म में असीम और नूतन ने कुमुद का रोल प्ले किया था। इस फिल्म के गाने छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए को लेकर ऐसा कहा जाता है कि इसने उस जमाने में कई लोगों को आत्महत्या करने से बचाया था। इस गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज से सजाया था।
-1774174196602.jpg)
इस गाने के बोल इंदीवर ने लिखे थे। कल्याणजी-आनंदजी ने गाने को अपने संगीत से सजाया था। यह गाना उस दौर में प्यार में ठोकर खाए और बिछड़े लोगों के लिए बड़ा सहारा बना था। इस गाने को सुनकर लोगों को लगा जैसे वो उनके मन की आवाज समझ रहा है। इसने अनजाने में ही सही कई लोगों को नई जिंदगी दी।
