जोधा अकबर के लिए नहीं बनी थी 18 साल पुरानी कव्वाली, एक शर्त पर A. R. Rahman ने मूवी में डालने की दी थी परमिशन
18 साल पहले एक ऐसी 'कव्वाली' ए आर रहमान ने फिल्म 'जोधा-अकबर' में डाली थी, जो आज भी सुकून देती ...और पढ़ें

'जोधा-अकबर' के लिए नहीं लिखी गई थी कव्वाली/ फोटो- Instagram

समय कम है?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। साल 2008 में आशुतोष ग्वारिकर के निर्देशन में बनी ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'जोधा अकबर' हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में से एक है। इस फिल्म में ऐश्वर्या राय ने 'जोधा' और ऋतिक रोशन ने 'अकबर' का किरदार अदा किया था। मूवी के सेटअप से लेकर इसकी कहानी ने तो दर्शकों के दिलों को छुआ ही, लेकिन इसके गाने काफी पॉपुलर हुए।
मूवी का गाई कव्वाली 'ख्वाजा मेरे ख्वाजा' को सुनकर आज भी लोगों को जो सुकून मिलता है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ये गीत कभी भी 'जोधा-अकबर' के लिए लिखा ही नहीं गया था, बल्कि इसे तो सिंगर ए आर रहमान ने किसी और की गुजारिश पर बनाया था। क्या है 'ख्वाजा' जी की कव्वाली के 'जोधा-अकबर' से जोड़ने के पीछे की कहानी, नीचे डिटेल में पढ़ें।
अजमेर शरीफ में इनकी गुजारिश पर बनाई कव्वाली
'जोधा-अकबर' की कव्वाली 'ख्वाजा मेरे ख्वाजा' से जुड़ा किस्सा शेयर करते हुए ए आर रहमान ने एनडीटीवी को से खास बातचीत में बताया था कि ये कव्वाली कभी भी जोधा-अकबर के लिए नहीं बनी थी। दरअसल, 15 साल तक ए आर रहमान अजमेर शरीफ 'ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती' की दरगाह पर गए थे, जहां उन्हें एक खादिम मिला, जिन्होंने ए आर रहमान से ये सवाल किया कि आपने कभी ख्वाजा जी पर कोई गाना कभी क्यों नहीं बनाया?
ए आर रहमान भी ये बात सुनकर सोच में डूब गए, लेकिन गाना बनाने के लिए उनके पास कोई धुन नहीं थी। वह लगातार सोचते रहे और एक दिन जब वह ऑस्ट्रेलिया जाने वाली फ्लाइट में बैठे, उसी दौरान उनके दिमाग में एक ऐसी धुन आई, जो उन्होंने लिरिक्स के साथ ख्वाजा साहब को समर्पित कर दी। ये कव्वाली उन्होंने फिल्म के लिए नहीं, बल्कि इबादत के लिए आए लोगों के बनाई थी और खुद के लिए बनाई थी।

ए आर रहमान ने निर्देशक को एक शर्त पर सौंपी कव्वाली
कई सालों के बाद जब आशुतोष ग्वारिकर ऋतिक-ऐश्वर्या के साथ जोधा-अकबर बना रहे थे, तो उस समय वह ए आर रहमान के पास पहुंचे और उन्होंने सिचुएशन बताते हुए कहा कि जब अकबर अजमेर शरीफ जाता है, वहां के लिए कुछ चाहिए। निर्देशक की ये बात सुनकर ए आर रहमान मुस्कुरा दिए और उन्होंने आशुतोष ग्वारिकर को वह कव्वाली सुनाई, जो उन्होंने बनाई थी।

कव्वाली सुनते ही निर्देशक आशुतोष ग्वारिकर के चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गई। हालांकि, ए आर रहमान ने कव्वाली 'जोधा-अकबर' में डालने से पहले निर्देशक के सामने ये शर्त रखी थी कि कव्वाली में एक लाइन भी नहीं बदलनी चाहिए। इस बात के लिए डायरेक्टर रेडी हो गए और 'जोधा-अकबर' में ये कव्वाली जस के तस बिना छेड़छाड़ के डाली गई। इस गाने को जहां ए आर रहमान ने गाया, तो वहीं इसके लिरिक्स 'काशिफ' ने लिखे।
