वाराणसी, [जागरण संवाददाता]। बॉलीवुड की फिल्मों में पटकथा लेखन से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले विख्यात स्क्रिप्ट राइटर कमलेश पांडेय दोयम दर्जे की फिल्मों की बाढ़ के लिए दर्शक व निर्माता दोनों को जिम्मेदार मानते हैं। वह कहते हैं कि दोनों मिलकर औचित्यहीन फिल्में बना रहे हैं। बेटा, सौदागर, तेजाब, दिल, खलनायक, रंग दे बसंती सरीखी नामचीन फिल्मों की कहानी लिखने वाले कमलेश का साफ कहना है कि फिल्मों में इन दिनों भेड़चाल है।

निर्माता-निर्देशक नकल करने में ही खुद को सुरक्षित पा रहे हैं। मूलत: बलिया के रहने वाले कमलेश की इंटर तक की शिक्षा इलाहाबाद में हुई किंतु बाद में उन्होंने मुंबई को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और अपनी लेखन प्रतिभा से बॉलीवुड में लंबी छलांग लगाई। दैनिक जागरण फिल्म फेस्टिवल में भाग लेने आए कमलेश ने बालीवुड के मौजूदा हालात पर बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि फिल्मी दुनिया के जोखिम भरे दौर में आज हर निर्माता-निर्देशक नकल करने में ही खुद को सुरक्षित महसूस करता है।

किसी भी फिल्म को बनाने में कम से कम चार से पांच करोड़ खर्च होते हैं। फिल्म में अगर एक फॉर्मूला चल गया तो फिर लाइन लग जाती है। निर्माता सोचता है जो बिक रहा है वही बनाओ, कुछ नया क्यों। उन्होंने कहा कि सौ में दस फिल्में किसी तरह अपना खर्चा निकालती हैं किंतु 85 फिल्में किसी काम लायक नहीं होतीं। सिर्फ पांच फीसदी ही सफल होती हैं। सिर्फ स्क्रिप्ट के दम पर ही फिल्म चलती है। अगर स्टार के दम पर फिल्में चलतीं तो अमिताभ बच्चन, सलमान खान और शाहरुख से अलावा अन्य कलाकारों की फिल्में फ्लॉप न होतीं। लोग फिल्म की कहानी ही देखने जाते हैं। हां, यह जरूर है कि यदि अमिताभ सरीखा कलाकार हो तो सोने पे सुहागा कहा जा सकता है।

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