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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 21, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Kabir Singh Movie Review: एक अनोखी लव स्टोरी, Shahid Kapoor की शानदार परफॉर्मेंस, मिले इतने Stars

By Rahul soniEdited By:
Published: Fri, 21 Jun 2019 08:01 AM (IST)Updated: Sat, 22 Jun 2019 10:10 AM (IST)

Kabir Singh Movie Review फिल्म में Shahid Kapoor और Kiara Advani की अहम भूमिका है।

Kabir Singh Movie Review: एक अनोखी लव स्टोरी, Shahid Kapoor की शानदार परफॉर्मेंस, मिले इतने Stars
Kabir Singh Movie Review: एक अनोखी लव स्टोरी, Shahid Kapoor की शानदार परफॉर्मेंस, मिले इतने Stars

पराग छापेकर, मुंबई। बेइंतहा प्यार करने, प्यार में कुर्बान हो जाने वाले प्रेमी और प्यार में तबाह हो जाने वाले प्रेमी। प्रेम के ऐसे कई स्वरूप बॉलीवुड ने हमें समय-समय पर दिखाए हैं। बॉलीवुड की तकरीब सारी हिट फिल्मों में यही फार्मूला भी नजर आता है। कमर्शियल फिल्मों की रीढ़ की हड्डी होता है प्यार। लेकिन कबीर सिंह इन सब कैटेगरी में आते हुए भी बेहद सफाई से इन सब से बाहर निकल जाते हैं।

अपनी कॉलेज लाइफ की महबूबा प्रीति से एकदम अपारंपरिक ढंग से प्यार करने वाला कबीर सिंह (शाहिद कपूर) कभी भी अपनी प्रेमिका प्रीति (कियारा आडवाणी) से यह नहीं पूछता कि वह उससे प्यार करती है या नहीं। बस वह पहली नजर से उससे प्यार करने लगता है और प्रीति को भी उससे कब प्यार हो जाता है उसे खुद पता नहीं चलता। लेकिन चीजें तब बिगड़ जाती हैं जब प्रीति के पिताजी शादी के लिए मना कर देते हैं और उसकी शादी किसी और से कर देते हैं। यहीं से शुरू होता है कबीर सिंह का वह सफर जिसमें वह अपने आप को तबाह करना शुरू करता है।

युवावस्था का दिशा भ्रम, परिस्थिति के सही आकलन का अभाव और सब कुछ खो देने का पुरजोर एहसास कबीर को पतन के उस रास्ते पर ढकेल देता है जहां से कबीर का लौटना लगभग नामुमकिन सा हो जाता है। नशे में खोया कबीर एक बेहतरीन सर्जन है। इस काम में कभी उसे असफलता नहीं मिली। मगर एक घटना के बाद कबीर से वह काम भी छूट जाता है और उसके बाद उसकी जिंदगी में क्या-क्या होता है इसी ताने-बाने पर बुनी गई है 'कबीर सिंह'।

शायद कहानी आपने सुनी हुई लग सकती है मगर निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने इस कहानी को कहने का जो तरीका सामने लाया है वह एकदम अनोखा है। फिल्म की हर एक फ्रेम संदीप की गिरफ्त में रही। एक ऐसे नायक की कहानी कहना जिसमें हीरोइज्म का बिल्कुल अभाव हो मगर साथ-साथ आपको उससे प्यार भी होता रहे इसे पेश करना बेहद मुश्किल काम है जिसे संदीप ने बखूबी निभाया। फिल्म के सारे क्राफ्ट को संदीप ने बड़ी ही खूबसूरती के साथ इस्तेमाल किया है ,वह स्क्रीनप्ले हो या सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर हो या गाने, इन सभी को संदीप ने फिल्म को अलग स्तर पर ले जाने के लिए किरदार की तरह इस्तेमाल किया है । 

अभिनय की बात की जाए तो शाहिद कपूर एक बार फिर साबित करते नजर आते हैं भूमिका कितनी ही मुश्किल क्यों ना हो वह उसे साध ही लेते हैं। जिंदगी से भरे हुए कॉलेज के स्टूडेंट से लेकर सब कुछ जानते बूझते खुद की जिंदगी को तबाह करता हुआ एक असामान्य सर्जन। इन सारे ही रंगों को शाहिद ने खूबसूरती के साथ अंजाम दिया है। कियारा आडवाणी का किरदार मेरी समझ से थोड़ा कमजोर किरदार रहा। वह कबीर के सामने इतनी बेबस क्यों रही इसका कोई कारण या लॉजिक फिल्म में कहीं पर नजर नहीं आता। लेकिन फिर भी कियारा ने प्रीति को जी लिया। इसके अलावा लीजेंडरी एक्टर कामिनी कौशल, सुरेश ओबेरॉय जैसे कलाकारों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। अर्जन बाजवा को कुछ और सीन दे दिए जाते तो अच्छा होता।

सबसे उल्लेखनीय परफॉर्मेंस रहा कबीर सिंह के दोस्त बने (सोहम मजूमदार) का, जिन्होंने हर सीन में साबित किया कि वह एक बेहतरीन अभिनेता हैं। ऐसा नहीं है कि सब कुछ अच्छा-अच्छा है। फिल्म की लंबाई बहुत ज्यादा है जो आप को खल सकती है। इंटरवल तक हीरोइन की मासूमियत शायद आपको बेवकूफी भी लग सकती है। कहते हैं कोई भी कलाकृति संपूर्ण नहीं होती अच्छाइयों के साथ थोड़ी बहुत बुराई आना भी लाजमी है ।कुल मिलाकर कबीर सिंह एक अलग हटके फिल्म है, ऐसी लव स्टोरी है जिसके बारे में आप जानते तो हैं लेकिन उसे अभी तक आपने देखा नहीं है, तो जाहिर तौर पर यह आपका मनोरंजन करेगी।

कलाकार- शाहिद कपूर,कियारा आडवाणी, सोहम मजूमदार, कामिनी कौशल, सुरेश ओबेरॉय 

निर्देशक- संदीप वांगा 

स्टार्स -  5 में से 3.50 (साढ़े तीन) स्टार

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