नई दिल्ली, जेएनएन। बॉलीवुड के दिग्गज कॉमेडियन अभिनेता महमूद उन कलाकारों में से एक थे जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। महमूद 50 से 70 के दशक में हिंदी सिनेमा में काफी सक्रिय रहे थे। उन्होंने फिल्मों में अपने अलग-अलग किरदारों से बड़े पर्दे पर दर्शकों के दिलों को खूब जीता था। महमूद का जन्म 29 सितंबर, 1932 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता मुमताज अली बॉम्बे टॉकीज स्टूडियो में काम करते थे।

महमूद के आठ भाई बहन थे जिसमें से बहन मीनू मुमताज बड़ी अभिनेत्री थीं। बचपन में घर की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए महमूद, मलाड और विरार के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनों में टॉफियां बेचा करते थे। बचपन के दिनों से ही महमूद का रुझान अभिनय की ओर था। पिता की सिफारिश के कारण 1943 में उन्हें बॉम्बे टॉकीज की फिल्म 'किस्मत' में मौका मिला। फिल्म में महमूद ने अभिनेता अशोक कुमार के बचपन की भूमिका निभाई थी, जिसे खूब सराहा गया।

इसके बाद महमूद जूनियर आर्टिस्ट के तौर पहचाने जाने लगे। उन्होंने 'दो बीघा जमीन', 'जागृति', 'सीआईडी', 'प्यासा' जैसी फिल्मों में छोटे मोटे रोल किए। महमूद के अभिनय की गाड़ी फिल्म 'भूत बंगला', 'पड़ोसन', 'बांम्बे टू गोवा', 'गुमनाम', 'कुंवारा बाप' से दौड़नी शुरू हो गई थी। बाद में महमूद ने 'कुंवारा बाप' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया था। महमूद ने कुछ फिल्में प्रोड्यूस भी की और 'भूत बंगला' जैसी फिल्मों से भरपूर प्रयोग भी किए। एक समय ऐसा था जब फिल्म के मुख्य अभिनेता भी महमूद के फिल्म में होने पर इनसिक्योर महसूस करने लगते थे।

लेखक मनमोहन मेलविले ने अपने एक लेख में महमूद और किशोर से जुड़ा एक दिलचस्प किस्से लिखा है। दरअसल महमूद ने अपने करियर के सुनहरे दौर से गुजर रहे किशोर से अपनी किसी फिल्म में एक रोल देने की गुजारिश की थी। लेकिन महमूद की प्रतिभा से पूरी तरह वाकिफ किशोर ने कहा था कि वह ऐसे किसी शख्स को मौका कैसे दे सकते हैं, जो भविष्य में उन्हीं के लिए चुनौती बन जाए।

इस पर महमूद ने बड़ी विनम्रता से कहा कि एक दिन मैं भी बड़ा फिल्मकार बनूंगा और आपको अपनी फिल्म में रोल दूंगा। महमूद अपनी बात के पक्के साबित हुए और आगे चलकर जब उन्होंने अपनी होम प्रोडक्शन की फिल्म 'पड़ोसन' शुरू की तो उसमें किशोर कुमार को काम दिया। इन दोनों महान कलाकारों की जुगलबंदी से यह फिल्म बॉलीवुड की सबसे बड़ी कॉमेडी फिल्म साबित हुई।

तीन दशक लंबे करियर में महमूद ने 300 से ज्यादा हिंदी फिल्में में काम किया था। अभिनेता, निर्देशक, कथाकार और निर्माता के रूप में काम करने वाले महमूद ने शाहरुख खान को लेकर वर्ष 1996 में अपनी आखिरी फिल्म 'दुश्मन दुनिया का' बनाई, लेकिन वह बॉक्स ऑफिस पर नाकाम रही। महमूद को अपने सिने करियर में तीन बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  

Edited By: Anand Kashyap