रुपेशकुमार गुप्ता, मुंबईl लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर बनी फिल्म मंटो का ट्रेलर जारी कर दिया गया हैl इस फिल्म में फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने सआदत हसन मंटो की भूमिका निभाई हैl

फिल्म के पहले पोस्टर के जारी होने से ही फिल्म को लेकर उत्सुकता थीl फिल्म का निर्देशन नंदिता दास ने किया हैl इस फिल्म को कान फिल्म फेस्टिवल, टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे कई फेस्टिवल में सिलेक्ट किया गया थाl फिल्म का ट्रेलर अब दर्शकों के सामने है। फिल्म के ट्रेलर की शुरुआत सआदत हसन मंटो के कोर्ट के कटघरे में खड़े होकर सच्चाई नहीं कह पाने पर प्रश्नचिन्ह लगाने से शुरू होती हैl वह कोर्ट को यह समझाते नजर आते हैं कि उनकी कहानियां कुछ नहीं बल्कि समाज का एक दर्पण हैंl फिल्म का ट्रेलर सआदत हसन मंटो के फिलॉसफी को दर्शाता हैl साथ ही वह महिला पात्रों के बारे में क्या सोचते हैं, उसे भी उजागर करता हैl गौरतलब है कि उनके अक्षम्य लेखन पर प्रश्नचिन्ह लगाए जाते थे, जिसे भी इस फिल्म में उजागर किया गया हैl इस फिल्म में मंटो के माध्यम से यह दर्शाने का प्रयत्न किया गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ एक लेखक पर लेखन का एक दायित्व भी आता हैl जबकि सआदत हसन मंटो का सदैव मानना था कि सच्चाई खुलकर और जोर से कहना चाहिए चाहे भले ही उससे कोई विचलित हो जाएl इस फिल्म का लेखन और निर्देशन नंदिता दास ने किया हैl फिल्म में रसिका दुग्गल के अलावा ताहिर भसीन ऋषि कपूर और जावेद अख्तर भी अहम भूमिका में नजर आएंगेl वहीं फिल्म में दिव्या दत्ता, परेश रावल, चंदन राय सान्याल और राजश्री देशपांडे हैl फिल्म 21 सितंबर को रिलीज हो रही हैl 


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आपको बता दें कि, किस्सों में विवादित लेकिन महानता में निर्विवाद साहित्यकार सआदत हसन मंटो के जीवन पर बनी नंदिता दास की फिल्म मंटो का जब टीज़र आया था तब इसे जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था। ये फिल्म 40 और 50 दशक के उस लेखक के जीवन पर बनी फिल्म है, जिन्होंने अपने बाग़ी और बेबाक तेवरों से दुनिया को आइना दिखाने की कोशिश की।

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सदाअत हसन मंटो के बारे में बताएं तो उन्होंने अपनी 42 साल और 8 महीने की जिंदगी में इश्क, त्रासदी, सांप्रदायिक झगड़ों पर खूब लिखा। बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, पांच रेडियो नाटक संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह लिखने वाले मंटो पर अश्लीलता के कई आरोप लगे। उन्हें कुल 6 बार अदालत में जाना पड़ा। 3 बार ब्रिटिश भारत में 3 बार पाकिस्तान में। लेकिन एक भी बार मामला साबित नहीं हो पाया। उनकी लेखनी समाज को उधेड़ देने वाली थी।

Posted By: Rahul soni