मुंबई। फिल्म 'अंग्रेजी में कहते हैं' 18 मई को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। किसी भी उम्र में प्यार और उसका इजहार किया जा सकता है, इस विषय पर पूरी कहानी केंद्रित है। फिल्म 'अंग्रेजी में कहते हैं' में प्रसिद्ध अभिनता संजय मिश्रा यशवंत बत्रा के किरदार में हैं जिसकी उम्र 52 वर्ष है। संजय की पत्नी किरण बत्रा का किरदार एकावली खन्ना निभा रही हैं। जागरण डॉट कॉम से खास बातचीत करते हुए एकावली खन्ना ने अपने किरदार और सिनेमा को लेकर बात की।

सरल कहानी की खूबसूरत पेशकश

फिल्म की कहानी को लेकर एकावली कहती हैं कि, फिल्म की कहानी बहुत ही सरल है जिसे सरल और खूबसूरत तरीके से पेश भी किया गया है। खास बात यह है कि, बड़ी खूबसूरती से कहानी को कहा गया है। प्यार की बात है तो बतौर अभिनेत्री मुझे किरण बत्रा का किरदार निभाकर बहुत तसल्ली मिलती है। जिस प्रकार गुलजार, ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी की फिल्में हम देखते हैं और दर्शकों ने इन लेजेंड्स की फिल्मों पसंद किया उसी प्रकार से इस फिल्म को भी बनाया गया है। बात करें किसी भी उम्र में प्यार और इजहार की तो, हां मेरा भी यही मानना है कि किसी भी चीज की उम्र नहीं होती है। लेकिन रोमांस की जो बात है उसमें प्यार के लिए हम बंदिशें डाल देते हैं। 20 साल हो गए शादी को तो हाथ नहीं पकड़ना चाहिए। बाहर जाकर एेसा नहीं करना वैसा नहीं करना। इस कारण दिल ही दिल में अपनी बात को दबाना पड़ता है। लेकिन हम जो फील कर रहे हैं तो बया करना चाहिए। खास बात यह है कि टूगेदरनेस की खूबसूरती और वेल्यू की कद्र करना चाहिए तब ही रिश्ता कामयाब रिश्ता कहलाया जाता है। एकावली ने अपने किरदार किरण बत्रा के बारे में बताया कि, किरण हमेशा अपने पति से अपेक्षा रखती है कि वो उसके प्यार को समझे। लेकिन एेसा नहीं होता और एक दिन उसे घर छोड़ कर जाना पड़ता है। जब पति को समझ आता है तब वह प्यार का इजहार करता है।

साल दर साल बदल जाती है स्थिति

रिश्तों को लेकर अपनी बात रखते हुए एकावली खन्ना ने बताया कि, रिश्तों की बनावट हमेशा बहुत अच्छी होती है। लेकिन होता क्या कि साल दर साल प्यार में कमी आने लगती है। बात करें किसी भी कपल की तो शादी से पहले स्थित कुछ और होती है और बाद में कुछ और। एेसा नहीं होना चाहिए। जिस प्रकार एक लड़की शादी से पहले सजती संवरती है और तैयार होती है वैसे ही उसे हमेशा रहना चाहिए। लेकिन अमूमन देखा जाता है कि एेसा नहीं होता। शादी के 10 साल या 20 साल बीतने के बाद यह सब नहीं होता और वहीं रूटीन जिंदगी हम जीने लगते हैं। जहां तक बात करें प्यार के इजहार की तो आंखे सबकुछ बोल देती हैं। जरूरत होती है तो समझने की। हम से मैं की तरफ हम दौड़ने लगते हैं जो कि गलत है। हमेशा हम वाली फीलिंग ही होना चाहिए। लाखों करोड़ों किरण और यशवंत एक दूसरे को चाहते हैं लेकिन कह नहीं पाते।

पत्नी के अलावा माता-पिता को भी फिल्म दिखाएं

फिल्म में दो युवा किरदार भी हैं। अंशुमन झा (जुगनू) जो कि यशवंत बत्रा का जमाई है और शिवानी रघुवंशी (प्रीति) ने यशवंत की बेटी का किरदार निभाया है। जागरण डॉट कॉम से खास बातचीत में अंशुमन ने भी अपने विचार रखते हुए फिल्म औरअपने किरदार के बारे में जानकारी दी। अंशुमन कहते हैं कि, फिल्म की कहानी को नदी की तरह लिखा गया है। हेल्दी रिलेशनशिप में जो वार्म्थ है वो कभी खत्म नहीं होती है वहीं इस फिल्म में दिखाने की कोशिश की गई है। मेरे किरदार की बात करूं तो जुगनू कलरफुल बनारस का मस्तमौजी लड़का है जिसे अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की से प्यार हो जाता है जिसे वो बचपन से जानता है। इस फिल्म में एक व्यक्ति अपने जीवनकाल के हर उम्र के पड़ाव को देख पाएगा चाहे वो 20 का हो, 40 का हो या फिर 60 साल का। साथ में इस बात का भी प्रमुखता से जिक्र है कि होममेकर को बिल्कुल भी कम न समझे या फिर उन्हें टेकन फॉर ग्रांटेड न लें। वे भी बराबर की हकदार हैं और उनका भी घर पर उतना ही हक है जितना कि पति का। शिवानी फिल्म में एक खूबसूरत लाइन कहती हैं, ''प्यार करने का भी नाम है, चुप रहने का भी। लेकिन सुनाई तब ही देता है जब कहा जाता है।'' फिल्म कहती है कि सिर्फ प्यार करिए मत उसे एक्सप्रेस भी करिए। मेरी दर्शकों से गुजारिश है कि वे फिल्म देखने जरूर जाएं तो अपने माता-पिता को साथ जरूर ले जाएं।

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Posted By: Rahul soni