नई दिल्ली, जेएनएन। भारतीय आधुनिक थिएटर के पिता कहे जाने वाले दिग्गज थिएटर कलाकार एब्राहिम अलकाज़ी का 94 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें हार्ट अटैक के बाद दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां उन्होंने आख़िरी सांस ली। अलकाज़ी को भारतीय थिएटर में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने का श्रेय दिया जाता है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के पूर्व निदेशक अलकाज़ी के निधन से कला और थिएटर जगत में शोक की लहर छा गयी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है।

रॉयल एकेडमी ऑफ़ ड्रामाटिक्स आर्ट से पढ़े एब्राहिम अलकाज़ी ने 50 से अधिक नाटकों में भाग लिया था। 1950 में उन्हें बीबीसी ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड से नवाज़ा गया था। अलकाज़ी की उपलब्धियों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है। जिन नाटकों में उन्होंने भाग लिया, उनमें गिरीश कर्नाड का तुगलक, आषाढ़ का एक दिन (मोहन राकेश), धर्मवीर भारती का अंधा युग आदि शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने ग्रीक ट्रेजडी, शेक्सपियर, हेनरिक, शेकोव और ऑगस्ट स्ट्रिंगबर्ग के साहित्य को मंच पर प्रस्तुत किया था। 

1940 और 50 के दौर में अलकाज़ी थिएटर जगत के प्रमुख कलाकारों में शामिल थे। 37 साल की उम्र में वो दिल्ली आ गये और नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के डायरेक्टर की ज़िम्मेदारी संभाल ली। वो 1962 से 1977 तक 15 साल इसी पद पर रहे। इंस्टीट्यूट के इतिहास में यह सबसे लम्बा कार्यकाल है। एनएसडी के निदेशक रहते हुए उन्होंने मॉडर्न इंडियन थिएटर के कोर्स को आकार दिया। इसमें उन्होंने पारम्परिक शब्दकोश और आधुनिक मुहावरों को समाहित किया। 

एनएसडी के ट्विटर हैंडल से उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा गया- थिएटर लीजेंड, पद्म विभूषण श्री एब्राहिम अलकाज़ी के निधन से एनएसडी परिवार को शोक संतप्त है। 1962-1977 तक एनएसड के निदेशक रहे थे। देश के लिए यह एक बहुत बड़ा नुकसान है। ख़ास तौर पर थिएटर की दुनिया के लिए।

भारत सरकार ने दिये पद्म सम्मान

1966 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, 1991 में पद्म भूषण और 2010 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। 50 साल की उम्र में उन्होंने एनएसडी से विदा ली और अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में ही आर्ट हेरिटेज नाम से गैलरी स्थापित की, जिसमें आर्ट, फोटोग्राफ और किताबों का संकलन किया। एब्राहिम अलकाज़ी, अरबी पिता और कुवैती मां की संतान थे। उनके नौ भाई-बहन थे। परिवार के पास धन की कमी नहीं थी। अलकाज़ी का बचपन ऐशोआराम में बीता। विभाजन के बाद अलकाज़ी का परिवार पाकिस्तान चला गया था, मगर वो भारत में ही रुक गये। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रद्धांजलि देते हुए लिखा- श्री एब्राहिम अलकाज़ी देश में थिएटर को लोकप्रिय बनाने और लोगों तक पहुंचाने के लिए याद किये जाएंगे। कला और संस्कृति के लिए उनका योगदान सराहनीय है। उनके निधन से दुखी हूं। मेरे विचार उनके परिवार के साथ हैं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।

भारत में फ्रांसीसी दूतावास की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गयी है।

बॉलीवुड ने दी श्रद्धांजलि

बॉलीवुड में एब्राहिम अलकाज़ी को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है। नवाज़उद्दीन सिद्दीकी, मधुर भंडारकर, रणदीप हुड्डा ने ट्वीट करके श्रद्धा सुमन अर्पित  किये। 

(Photo Courtesy- NSD)

Posted By: Manoj Vashisth

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