यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 22, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जब दीपिका पादुकोण को लगने लगा था इस जिंदगी के न कोई मायने हैं ना मकसद, जानें क्यों
दीपिका पादुकोण बॉलीवुड के सबसे चहेते स्टार्स में से एक हैं। दीपिका अपनी प्रोफेशनल लाइफ के अलावा अपनी पर्सनल लाइफ ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जेएनएन। दीपिका पादुकोण बॉलीवुड के सबसे चहेते स्टार्स में से एक हैं। दीपिका अपनी प्रोफेशनल लाइफ के अलावा अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी काफी चर्चा में रहती हैं। फिर चाहें वो उनकी शादी से पहले की जिंदगी हो या शादी के बाद की। दीपिका अपनी जिंदगी के उस बुरे वक्त को अक्सर याद करती रहती हैं जब वो लंबे वक्त के लिए ड्रिपेशन में चली गई थीं और टूट गई थीं। ये बात दीपिका का हर फैन जानता है कि कुछ सालों पहले दीपिका डिप्रेशन में थीं, इस बात को एक्ट्रेस ने न सिर्फ खुले तौर पर स्वीकार किया है, बल्कि एक्ट्रेस अक्सर मैंटल हेल्थ लेकर स्पीच भी देती रहती हैं और कैंपेन में शामिल होती हैं।
अब हाल ही में एक्ट्रेस ने क्लब हाउस सेशन के दौरान फिर से अपने डिप्रेशन के बारे में खुलकर बात की है। एक्ट्रेस ने बताया, ‘ये 2014 के शुरुआती दिनों की बात है, मैं बहुत खीलापन और दिशाहीन महसूस करती थी। मुझे जिंदगी लगता था जिंदगी के कोई मायने नहीं हैं नही कोई मकसद है, मैं इमोशनली और शारीरिक तौर पर कुछ भी महसूस नहीं कर पा रही थी। मुझे एकदम शून्य जैसा महसूस होता था। ये काफी महीनों तक चला। एक बार मेरा परिवार मेरे घर आया हुआ था और वो लोग वापस जाने के लिए पैकिंग कर रहे थे, मैं अपने कमरे में बैठी हुई थी और अचानक रोने लगी। उस वक्त मेरी मां हो एहसास हो गया कि कुछ है जो अलग है। मेरा रोना अलग तरह का था, वो ऐसा रोना नहीं था जैसे में ब्वॉयफ्रेंड या काम की वजह से रोई हूं’।
View this post on Instagram
‘मुझे रोता देख मां लगातार अंदाज़ा लग रहा थीं कि क्या वजह है, लेकिन मैं उन्हें कोई वजह नहीं बता पा रही थी। उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे मदद की जरूरत है। उन्होंने मुझसे कहा कि वो साफ देख सकती हैं कि डिप्रेशन से पहले मैं कैसे जिंदगी जीती थी और अब बिल्कुल बदल गई हूं। बल्कि मैं आपको बताऊं अगर आप रेगुलर सेशन्स भी लेते हैं तो भी आपको इससे लड़ने के लिए बहुत काम करना पड़ता है। मैं डिप्रेशन से पहले अच्छी जिंदगी जीती थी, लेकिन उसके बाद हर दिन मुझे मेहनत करनी पड़ती कि मैं दोबारा पीछे न लौट जाऊं’।
