रुपेशकुमार गुप्ता, मुंबईl फिल्म अभिनेत्री सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर समलैंगिक समुदाय पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के पहले उनके विचार व्यक्त किए हैंl सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया पर समलैंगिक लोगों के अधिकार की बात करते हुए यह लिखा है कि इन लोगों के अधिकार एक लंबे समय से लंबित है और देश की कानून व्यवस्था को इन समुदायों को अन्य लोगों से अलग करने वाले कानून का अब अंत कर देना चाहिएl

सेलिना जेटली समलैंगिक लोगों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली एक कार्यकर्ता मानी जाती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि समलैंगिक लोगों के अधिकार एक लंबे समय से लंबित हैl मानवाधिकार सभी अधिकारों पर सबसे उच्च स्तर रखता हैl कानून व्यवस्था को यह चाहिए कि वह समलैंगिक लोगों के अधिकारों को बांटने वाले कानून को खत्म कर दे, जो कि भारत की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक देश की आवश्यकता भी हैl सेलिना ने सोशल मीडिया पर इस बारे में इसलिए अब अपने विचार व्यक्त किए क्योंकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय भारतीय आचार संहिता के 377 धारा की वैधता पर उठाए गए प्रश्न पर सुनवाई कर रहा हैl जिसके चलते सेलिना जेटली ने कहा कि धारा 377 हटना चाहिएl धारा 377 का इतिहास यह है कि सन 1860 में बना यह कानून प्रकृति के विरुद्ध किए जाने वाले शारीरिक संबंध को आपराधिक श्रेणी में लाता हैl जिसके चलते 2009 में दिल्ली की उच्च न्यायालय ने इसे सतही स्तर पर अवैध करा दिया था लेकिन 2013 में सर्वोच्च न्यायालय ने उस आदेश को पलटते हुए इसे बनाए रखा, साथ ही यह भी कहा था कि धारा 377 रद्द करना यह काम संसद का है ना कि न्यायपालिका काl इसके पहले दिए एक इंटरव्यू में सेलिना जेटली ने कहा था कि समलैंगिक व्यक्ति उनके जीवन के कई प्रकार के आयामों में संघर्ष करता है। विशेषकर महिलाएं उन्हें तो इसके अलावा और भी कई प्रकार के लड़ाइयों का समाज में सामना करना पड़ता हैl 

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सेलिना ने कई बॉलीवुड फिल्मों में काम किया है। इसमें अपना सपना मनी-मनी, नो एंट्री, हे बेबी, गोलमाल रिटर्न्स, जैसी फिल्में शामिल हैं। 

 

Posted By: Rahul soni