अनुप्रिया वर्मा, मुंबई। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब एक और विवाद शुरू हो चुका है। अब तक तो राजपूत संगठन और करणी सेना द्वारा ही फिल्म को लेकर विवाद था।

लेकिन अब सीबीएफसी द्वारा भी इस पर नाराजगी को व्यक्त किया जा रहा है। हम आपको बता दें कि सीबीएफसी इस बात पर नाराजगी नहीं जता रही है कि फिल्म का कंटेंट क्या है, बल्कि फिल्म के मेकर्स द्वारा बिना सीबीएफसी के सर्टिफाइड किये बगैर फिल्म की प्राइवेट स्क्रीनिंग को लेकर नाराजगी जता रही है। जी हां, सीबीएफसी प्रमुख प्रसून जोशी ने मीडिया से बातचीत में स्वीकारा है कि सीबीएफसी का फिर अस्तित्व ही क्या है, जब अगर आप बिना सीबीएफसी के फिल्मों की स्क्रीनिंग प्राइवेट चैनलों के लिए कर रहे हैं। प्रसून जोशी के इस बयान के बाद ऐसा माना जा रहा है कि हो सकता है कि फिल्म की रिलीज़ की तारीख आगे बढ़ जाए चूंकि सीबीएफसी को अब तक डॉक्यूमेंट्रस नहीं मिले हैं और न ही मेकर्स से आवश्यक दस्तावेज मिले हैं। सीबीएफसी का कहना है कि एक स्क्रीनिंग के लिए यह जरूरी है कि आपको सीबीएफसी या सरकार की तरफ से एग्जेंपसन सर्टिफिकेट दिया जाये। हां, यह सच है कि मेकर्स यह दलील दे सकते हैं कि यह प्राइवेट स्क्रीनिंग थी, लेकिन ऐसा लग रहा है कि उन्होंने सारी पार्टियों को और चैनलों को बुलवाया है।

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प्रसून जोशी ने यह भी कहा है कि सट्रिफिकेशन के प्रोसेस को इतने हल्के में लिया जा रहा है और अपनी सहूलियत के अनुसार काम किया जा रहा है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि मेकर्स ने आखिर बिना किसी भी सर्टिफिकेट के स्क्रीनिंग रखी कैसे। प्रसून का यह भी कहा है कि पद्मावती का एप्लीकेशन इस हफ्ते रिव्यू के लिए डाला गया है, लेकिन मेकर्स के एडमिट पेपर अब तक पूरे नहीं थे। फिल्म में डिस्क्लेमर का हिस्सा कि फिल्म फिक्शन है या हिस्टोरिकल यह अब तक रिक्त छोड़ा गया था और हमने उन्हें सारे महत्वपूर्ण दस्तावेज देने को कहा था। लेकिन अभी जो हुआ है समझ के बाहर है। अब ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीबीएफसी अब क्या कदम उठाती है। बता दें कि पद्मावती के विपक्ष में लगातार विवाद हो रहे हैं। फिल्म के गाने को लेकर भी शोर शराबा हो रहा है।

Posted By: Rahul soni

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