नई दिल्‍ली, जेएनएन। हिंदी सिनेमा के गीतों को शिखर पर पहुंचाने वाली गायिका शमशाद बेगम आज ही के दिन 23 अप्रैल 2013 को दुनिया को अलविदा कह गई थीं। उनके गाए गीत आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। आईए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक पहलू।

पहले गाने के लिए 12 रुपये बतौर फीस मिली
पंजाब के अमृतसर में जन्‍मी शमशाद बेगम का शुरू से ही संगीत की ओर झुकाव रहा। उन्‍होंने अपने संगीत करियर में करीब 6000 हजार गाने गाए। वह अपने जमाने की सबसे चर्चित सिंगर थीं। शमशाद बेगम को पहली बार गाने के लिए 12 रुपये बतौर फीस मिली थी। यह फीस आगे चलकर लाखों में रुपये में तब्‍दील हो गई।

कजरा मोहब्‍बत वाले गाने ने शमशाद को हर दिल में जगह दे दी
हिंदी सिनेमा को शमशाद बेगम ने कालजयी गाने दिए जो लोगों की जुबान पर रट गए। 40 और 50 के दशक में फिल्‍मी संगीतों पर उनका ही नाम लिखा रहता था। इन्‍हीं में से पतंगा फिल्‍म का गाना मेरे पिया गए रंगून खूब पसंद किया गया। इस गाने ने युवाओं के दिलों में घर कर लिया। इसके बाद उनका गाना कजरा मोहब्‍बत वाला, लेके पहला पहला प्‍यार, कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना जैसे गानों को शमशाद ने अपनी आजवा देकर अमर बना दिया। यह गाने बेहद लोकप्रिय साबित हुए।


रेडियो से फिल्‍मों की ओर झुकाव बढ़ा
कट्टर मुस्लिम परिवार में 14 अप्रैल 1919 जन्‍मी शमशाद साहित्यिक विचारों वाली महिला थीं। संगीत में रूचि होने के चलते वह अकसर गाने गुनगुनाया करती थीं। उन्‍होंने बाद ऑल इंडिया रेडियो पेशावर केंद्र पर नौकरी भी की। यहां से उनके संगीत को नई दिशा मिली और वह फिल्‍मों के लिए गाने लगीं।

जातिगत बेडि़यां तोड़कर हिंदू युवक से किया विवाह
खुले विचारों वाली शमशाद बेगम की मुलाकात वकील गणपत लाल से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। लेकिन गणपत लाल हिंदू थे ऐसे में मुश्किल तो आनी ही थी। शमशाद ने जब घरवालों को अपने प्‍यार की जानकारी दी तो घर वाले बौखला गए। परिजनों ने हिंदू युवक से विवाह की मंजूरी नहीं दी। इस पर शमशाद ने घर से बगावत कर गणपत लाल से विवाह कर लिया। उस वक्‍त शमशाम सिर्फ 15 साल की थीं।


भारत सरकार ने नागरिक सम्‍मान से नवाजा
संगीत के क्षेत्र अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने शमशाद बेगम का सम्‍मान किया। उन्‍हें 2009 में भारत के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान पद्म भूषण से नवाजा गया। तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उनके कालजीय गायिका बताते हुए यह सम्‍मान दिया था। शमशाद बेगम की सुरीली आवाज 23 अप्रैल 2013 को शांत हो गई। वह इस दुनिया को छोड़कर चली गईं।

Posted By: Rizwan Mohammad