मुंबई। सुनील दत्त, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, राजेश खन्ना, गोविंदा जैसे कामयाब सितारों को अपनी सियासी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राजनीति में कूदते हुए तो अक्सर देखा गया है, मगर कभी-कभी गंगा उल्टी भी बहने लगती है। बॉलीवुड में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिनका बचपन सियासत का ककहरा पढ़ते हुए बीता, लेकिन जब करियर चुनने की बारी आयी तो सिल्वर स्क्रीन की चकाचौंध ने उन्हें अपनी तरफ़ खींच लिया। इस लेख में ऐसे ही कलाकारों की चर्चा...

महाराष्ट्र की राजनीति में विलास राव देशमुख का अहम स्थान और योगदान रहा है। कांग्रेस के कद्दावर नेता और सूबे के मुख्यमंत्री रहे विलास राव के छोटे बेटे रितेश देशमुख ने पिता के नक्शे-क़दम पर चलने के बजाए मनोरंजन इंडस्ट्री को अपनी मंज़िल बनाया। रितेश ने 2003 में हिंदी फ़िल्म तुझे मेरी क़सम से अपना फ़िल्मी करियर शुरू किया और पिता से अलग अपनी पहचान क़ायम की। रितेश ने वक़्त के साथ बेहतरीन एक्टर्स में अपना नाम शामिल किया। धमाल, हाउसफुल जैसी सफल फ्रेंचाइजी का वो हिस्सा रहे हैं और अपनी पॉलिटिकल फैमिली वाली पहचान को पीछे छोड़ चुके हैं। हालांकि रितेश लोकसभा चुनाव में योगदान कर रहे हैं। उन्होंने लातूर में हुई एक रैली में प्रियंका गांधी को कोट करते हुए कहा कि देश में बदलाव के लिए 56 इंच का सीना नहीं, अच्छे दिल की ज़रूरत है। रितेश ने कहा कि देश को मोबाइल और कम्प्यूटर कांग्रेस की वजह से ही मिला है।

नेहा शर्मा के बारे में बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि वो राजनीतिक परिवार से आती हैं। नेहा, भागलपुर के विधाय अजीत शर्मा की बेटी हैं। उनके पिता बिज़नेसमैन थे, जिन्होंने राजनीति का दामन थामा। 2015 में नेहा के पिता ने कांग्रेस के टिकट पर विधान सभा का चुनाव लड़ा था। नेहा ने 2007 में तेलुगु फ़िल्म चिरुता से फ़िल्मी करियर शुरू किया था। 2017 में नेहा मुबारकां में अर्जुन कपूर के अपोज़िट नज़र आयी थीं। 

राम विलास पासवान बहुत पुराने और बड़े नेता माने जाते हैं। मौजूदा मोदी सरकार में वो मंत्री भी हैं। पासवान के बेटे चिराग ने अपने पिता से अलग फ़िल्मों में करियर बनाने की कोशिश की थी। 2011 में चिराग ने मिले ना मिले हम से बॉलीवुड डेब्यू किया था, जिसमें कंगना रनौत उनकी लीडिंग लेडी थीं। मगर, एक फ़िल्म करने के बाद ही शायद चिराग की समझ में आ गया कि यह दुनिया उनके बस की नहीं, लिहाज़ा अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने बिहार लौट गये और अब पिता के साथ सियासी करियर बनाने में जुटे हैं। 

सलमान ख़ान की बहन अर्पिता के पति आयुष शर्मा हिमाचल प्रदेश की ताक़तवर राजनीतिक फैमिली के सदस्य हैं। आयुष जाने-माने पॉलिटिशियन सुखराम के पोते और अनिल शर्मा के बेटे हैं। अनिल शर्मा ने पहले कांग्रेस और फिर भाजपा के टिकट पर हिमाचल प्रदेश विधान सभा का चुनाव लड़ा था। मगर, आयुष ने सियासत को अपना करियर नहीं चुना। अर्पिता से शादी के बाद 2018 में सलमान ने लवयात्री से आयुष को बतौर हीरो लांच किया।

अरुणोदय सिंह ने 2009 की फ़िल्म सिकंदर से बॉलीवुड में अपनी पारी शुरू की थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि वो कांग्रेस के वेटरन लीडर और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे अर्जुन सिंह के पोते हैं। अरुणोदय फ़िलहाल ऑल्ट बालाजी की सीरीज़ अपहरण में नज़र आ रहे हैं।  

बॉलीवुड और साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकीं अदिति राव हैदरी भी ऐसे परिवार से संबंध रखती हैं, जिसकी जड़ें हैदराबाद की राजनीति में गहरे तक जाती हैं। अदिति हैदराबाद रियासत के प्रधानमंत्री रहे अकबर हैदरी की ग्रेट ग्रैंडडॉटर हैं। असम के गवर्नर रहे मोहम्मद सालेह अकबर हैदरी की अदिति ग्रैंड नीस हैं। अदिति के नाना राजा जे रामेश्वर राव ने ब्रिटिश हुकूमत के दौर में प्रशासन से जुड़े रहे थे। आमिर ख़ान की पत्नी किरण राव भी इसी परिवार से आती हैं। अदिति के नाना, किरण राव के दादा हैं। 

सैफ़ अली ख़ान के पूर्वज जहां पटौदी रियासत के नवाब रहे हैं, वहीं उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह के परिवार का भी राजनीति से गहरा रिश्ता रहा है। अमृता की मां रुख़साना सुल्ताना आपातकाल के दौरान 1970 के दशक में संजय गांधी की पॉलिटिकल एसोसिएट रही थीं। 

Posted By: Manoj Vashisth

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