नई दिल्ली, जेएनएन। Panipat Controversy: 'पानीपत' फ़िल्म को लेकर राजस्थान में राजनीति गरमाने लगी है। फ़िल्म को बैन करने की मांग के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने डिस्ट्रीब्यूटर्स को जाट समाज से बात करने की सलाह दी है। फ़िल्म में महाराज सूरजमल को लेकर दिखाए हिस्से पर राजस्थान के कुछ जगहों से आपत्ति आ रही है। इस बीच भरतपुर इलाके में लोग फ़िल्म के खिलाफ़ प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर लिखा, 'फिल्म में महाराजा सूरजमल जी के चित्रण को लेकर जो प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए थीं... सेंसर बोर्ड इसमें हस्तक्षेप करे और संज्ञान ले। डिस्ट्रीब्यूटर्स को चाहिए कि फिल्म के प्रदर्शन को लेकर जाट समाज के लोगों से अविलम्ब संवाद करें।' इसके अलावा उन्होंने महापुरुषों के सम्मान की भी बात की। उन्होंने लिखा, 'फिल्म बनाने से पहले किसी को भी किसी के व्यक्तित्व को सही परिप्रेक्ष्य में दिखाना सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि विवाद की नौबत नहीं आए। मेरा मानना है कि कला का, कलाकार का सम्मान हो परंतु उनको भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी जाति,धर्म,वर्ग के महापुरुषों और देवताओं का अपमान नहीं होना चाहिए।

मुख्यमंत्री से पहले राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह भी महाराज सूरजमल के चित्रण को लेकर फ़िल्म पर बैन लगाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने भी ट्वीट कर लिखा था कि मेरा मानना है कि हरियाणा, राजस्थान और उत्तर भारत के जाट समुदाय में भारी विरोध को देखते हुए इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए, अन्यथा कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है। बता दें कि विश्वेंद्र सिंह महाराज सूरजमल के वशंज हैं। फिलहाल उन्होंने फ़िल्म के खिलाफ़ प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर भी ट्वीट किया है।

इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और सांसद हनुमान बेनीवाल भी सवाल उठा चुके हैं। बात यूं है कि फ़िल्म में दिखाया गया है, 'सूरजमल ने पहले अफगानों के खिलाफ मराठों की मदद की। लेकिन जब उनकी मांग नहीं मानी गई, तो उन्होंने पेशवा सदाशिव भाऊ का साथ नहीं दिया।' वहीं, विरोध करने वालों का दावा है कि सूरजमल ने छह महीने तक मराठाओं को शरण दी थी।

Posted By: Rajat Singh

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