मुंबई। 28 मई को अनुराग कश्यप की फिल्म फ्रांस में रिलीज हुई। इसे फ्रांसीसी भाषा में डब किया गया था। अनुराग कश्यप चाहते हैं कि 'अग्ली' भारत में भी रिलीज हो। उन्होंने फिल्म में धूम्रपान के दृश्यों के साथ आने वाली चेतावनी के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। उनका मानना है कि फिल्म देखते समय ऐसी लिखित चेतावनी धूम्रपान के खिलाफ सचेत करने का बचकाना प्रयास भर है। इस तर्क के बावजूद अनुराग अपना केस हार चुके हैं और मानते हैं कि फिलहाल इस मसले में कुछ नहीं किया जा सकता। उन्होंने 'अग्ली' की भारतीय रिलीज का फैसला अब निर्माता और निवेशकों पर छोड़ रखा है।


अपनी फिल्मों से आश्वस्त

अनुराग कश्यप इन दिनों अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'बॉम्बे वेलवेट' की एडिटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन में व्यस्त हैं। रणबीर कपूर, अनुष्का शर्मा और करण जौहर अभिनीत यह फिल्म पिछली सदी की मुंबई की कहानी है, जब यह महानगर आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में नई करवट ले रहा था। अनुराग कश्यप कहते हैं, 'हाल ही में हम लोगों ने एडिटिंग को लॉक किया। अब उसे फाइनल शेप देने का काम चल रहा है। फिल्म के पोस्टर, प्रमोशन और मार्केटिंग की जिम्मेदारी विकास बहल की है। वे सब कुछ प्लान कर रहे हैं। 'फैंटम' में हम लोगों की अच्छी टीम बन गई। अब विकास बहल फिल्म डायरेक्ट करेंगे तो उसकी मार्केटिंग और प्रमोशन का काम हम लोग देखेंगे।'अनुराग कश्यप अपनी निर्माणाधीन फिल्मों के बारे में बातें करने से नहीं हिचकते। मौका मिलते ही रिलीज के पहले वे फिल्म दिखाने भी लगते हैं। इस बार फिल्म बड़ी है और बहुत कुछ दांव पर लगा है। क्या इस बार भी वे वही रुख अपनाएंगे, 'बिल्कुल, अपनी फिल्मों को लेकर मैं आश्वस्त रहता हूं। पहले ही लोग देख लें तो फीडबैक मिल जाता है। मैं दूसरों के प्वाइंट ऑॅफ व्यू भी समझ पाता हूं। इस बार भी फिल्म पूरी होगी तो उसके प्राइवेट शो होंगे।'

दुनिया की फिक्र नहीं

पिछले कुछ समय से कल्कि कोचलिन से अपने संबंधों को लेकर चर्चा में रहे अनुराग कश्यप मानते हैं कि मीडिया हमेशा से पर्सनल बातों और घटनाओं में ज्यादा रुचि रखता है। वह स्वीकार करते हैं, 'कल्कि से मैं अलग हो चुका हूं। फिर भी हमारे संबंध खराब नहीं हुए हैं। हम अब भी बातचीत करते हैं और दोस्त हैं।' हाल ही में दोनों एक टीवी शो में भी साथ दिखे। अनुराग कश्यप के करीबी मानते हैं कि उनके जीवन में फिल्मों का प्रेम बाकी सभी संबंधों पर भारी पड़ता है। फिल्म के निर्माण, निर्देशन और अन्य गतिविधियों में वे इस कदर डूब जाते हैं कि उन्हें न खुद की फिक्र रहती है और न दुनिया की।

साथियों के लिए भी चिंतित

अनुराग को अपनी फिल्मों के साथ साथियों की फिल्मों की भी चिंता रहती है। अनुराग कश्यप की मौजूदगी फिजां में सृजन का संचार करती है। पिछले एक दशक में अनुराग के अनेक सहायकों ने फिल्म निर्देशन में कदम रखा। अनुराग कश्यप किसी भी वाजिब फिल्म के साथ जुड़ने में खुशी महसूस करते हैं। हालांकि अब वे पहले की तरह सभी के लिए उपलब्ध नहीं होते लेकिन अगर कोई उन तक पहुंच गया तो वह निराश होकर नहीं लौटता!

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